फिरोजाबाद: उप कृषि निदेशक सभागार में 50 किसानों को दी गई आधुनिक व वैज्ञानिक खेती की जानकारी; मृदा जांच और जैविक खाद के प्रयोग पर विशेषज्ञों ने दिया जोर।
फिरोजाबाद। दबरई स्थित उप कृषि निदेशक सभागार में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI), नई दिल्ली के सस्य विज्ञान संभाग द्वारा जिले के 50 किसानों के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण डॉ. संजय सिंह राठौर के मार्गदर्शन में संचालित परियोजना के तहत आयोजित हुआ, जिसमें किसानों को जैविक खाद, संतुलित पोषण प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
कार्यक्रम में जिला कृषि अधिकारी सुमित चौहान ने किण्वित जैविक खाद के वैज्ञानिक महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि इसके नियमित प्रयोग से मिट्टी में जैविक कार्बन और आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा में वृद्धि होती है। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी और फसल की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के कीट विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. इंद्र देव चौधरी ने किसानों को रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल से होने वाले नुकसान के प्रति आगाह किया। उन्होंने कहा कि अंधाधुंध कीटनाशक छिड़काव से मित्र कीट नष्ट हो रहे हैं, इसलिए किसानों को जैविक खाद व प्राकृतिक विकल्पों को अपनाना चाहिए।
अपर जिला कृषि अधिकारी विष्णु शंकर ने किसानों से अपील की कि वे अपने खेतों की मिट्टी की जांच कराए बिना उर्वरकों का प्रयोग न करें। उन्होंने मृदा परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर ही जैविक एवं रासायनिक पोषक तत्वों के संतुलित व समन्वित इस्तेमाल पर बल दिया।
हाईटेक नर्सरी तकनीक एवं किसानों के व्यावहारिक अनुभव
जिला उद्यान अधिकारी सी.पी. अवस्थी ने किसानों को उन्नत व रोगमुक्त पौध तैयार करने के लिए हाईटेक नर्सरी की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी। वहीं, स्थानीय गांव के किसान सचिन कुमार राजपूत ने अपने खेतों में जैविक खेती के व्यावहारिक और सफल अनुभवों को साथी किसानों के साथ साझा किया।
बाइट 1: सुमित चौहान (जिला कृषि अधिकारी, फिरोजाबाद)
बाइट 2: विष्णु शंकर (अपर जिला कृषि अधिकारी, फिरोजाबाद)
बाइट 3: हरीश कुमार (वाई.पी., ICAR-IARI)
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