मुआवजे में महाघोटाला
एसडीएम कार्याल पर 7वें दिन भी गरजे किसान, फूंक डाली अमेरिकी ट्रेड डील की प्रतियां
कॉरपोरेट के फायदे के लिए किसानों के हकों पर चौतरफा डाका डाल रही है सरकार : जोगेंद्र तालु
भिवानी, 22 जून : हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों के निर्माण के नाम पर किसानों की कीमती और उपजाऊ जमीनों को कौडिय़ों के भाव हड़पने के खिलाफ अन्नदाताओं का गुस्सा अब सातवें आसमान पर पहुंच गया है। सरकार, प्रशासन और पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन के कथित नापाक गठजोड़ और मुआवजे में हुए बड़े हेरफेर के खिलाफ कस्बा तोशाम स्थित एसडीएम कार्यालय के समक्ष चल रहा अनिश्चितकालीन धरना सोमवार को 7वें दिन भी पूरी मजबूती के साथ जारी रहा। इस दौरान किसानों का गुस्सा उस समय और भडक़ गया जब धरना स्थल पर अमेरिका ट्रेड डील की प्रतियां फूंककर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हो रही कॉरपोरेट साठगांठ का पुरजोर विरोध किया गया। सोमवार को धरने की अध्यक्षता ग्राम स्वराज किसान मोर्चा के संगठन महामंत्री राजपाल चाहर व संचालन जिला प्रधान भागू राम तोशाम ने किया।
ग्राम स्वराज किसान मोर्चा और पावरग्रिड बनाम किसान संघर्ष समिति के बैनर तले एकजुट हुए किसानों को संबोधित करते हुए मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जोगेंद्र तालु ने कहा कि यह सब एक सोची-समझी रणनीति के तहत किया जा रहा है ताकि बड़े कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाया जा सके और देश के पेट पालने वाले किसानों के हकों पर सरेआम डाका डाला जा सके। सरकार, प्रशासनिक अधिकारी और पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन मिलकर एक सिंडिकेट की तरह काम कर रहे हैं। इनका एकमात्र क्रूर मकसद किसानों की उपजाऊ और कीमती जमीनों को कौडिय़ों के भाव हड़पना है। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थापित नियमों और किसान हितों को पूरी तरह ताक पर रख दिया है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
धरना स्थल पर उस समय माहौल और गरमा गया जब किसानों को सूचना मिली कि अमेरिका ट्रेड डील को फाइनल करने के लिए अमेरिका से एक प्रतिनिधिमंडल भारत आया हुआ है। स्थानीय स्तर पर जमीन की लूट और वैश्विक स्तर पर कॉरपोरेट-परस्ती के खिलाफ भडक़े किसानों ने धरना स्थल पर ही इस अमेरिकी डील की प्रतियां फूंककर अपना तीव्र आक्रोश दर्ज कराया। किसानों ने साफ कहा कि वे न तो स्थानीय स्तर पर अपनी जमीनों की लूट होने देंगे और न ही विदेशी ताकतों और कॉरपोरेट कंपनियों के आगे घुटने टेकेंगे।
मोर्चा के नेताओं ने मुआवजे के खेल को उजागर करते हुए बताया कि पहली बैठक में जो मुआवजा राशि करोड़ों रुपये तय की गई थी, उसे महज आठ दिनों के भीतर दूसरी बैठक बुलाकर बेहद कम कर दिया गया। यह सीधे तौर पर किसानों के हितों पर कुठाराघात और प्रशासनिक तानाशाही का जीता-जागता सबूत है। उन्होंने मांगा की कि भिवानी जिले के प्रभावित किसानों को भी पड़ोसी जिले हिसार के समान ही मुआवजा दरें दी जाएं। महज आठ दिनों के भीतर मुआवजे की राशि को आधा करने वाले और नियमों को ठेंगे पर रखने वाले दोषी अधिकारियों की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच हो और उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंन चेतावनी दी कि यदि सरकार और पावर ग्रिड प्रबंधन ने अपनी हठधर्मिता नहीं छोड़ी, तो तोशाम से शुरू हुई यह चिंगारी जल्द ही पूरे हरियाणा में एक बड़े और निर्णायक किसान आंदोलन का रूप ले लेगी।
इस अवसर पर राज सिंह धनाना, जंगबीर अलखपुरा, कौर सिंह नंबरदार, रमेश चंद, सत्यवान सिंह, दयानंद फौजी, ईश्वर सिंह, धर्मवीर, कृष्ण कुमार, रामेहर दुहन, रामचंद्र बागनवाला, राजपाल सिंह, अनिल बागनवाला, उमेद बागनवाला, राजबीर दुहन सहित अनेक किसान मौजूद रहे।