किसानों को दी जा रही आधुनिक रोपण पद्धति एवं जलभराव प्रबंधन की जानकारी
कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा गांवों में प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित
जिले में उद्यानिकी फसलों के रकबे में निरंतर वृद्धि हो रही है। टमाटर, शिमला मिर्च, प्याज, लहसुन एवं कद्दू जैसी फसलों के साथ अब किसानों का रुझान शकरकंद की खेती की ओर भी तेजी से बढ़ रहा है। वर्तमान में जिले में शकरकंद का रकबा लगभग 360 हेक्टेयर है। किसानों को बेहतर उत्पादन एवं फसल सुरक्षा के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा वैज्ञानिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रमुख डॉ. पुनीत कुमार ने बताया कि पिछले वर्षों में अधिक वर्षा के कारण शकरकंद की फसल में कंद सड़न एवं फफूंदजनित रोगों की समस्या सामने आई थी। इसी को ध्यान में रखते हुए इस खरीफ मौसम में किसानों को विभिन्न वैज्ञानिक रोपण पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे जलभराव की स्थिति में भी फसल सुरक्षित रह सके।
केन्द्र के उद्यानिकी वैज्ञानिक डॉ. प्रशांत कुमार गुप्ता द्वारा किसानों के बीच पहुंचकर समूह प्रशिक्षण आयोजित किए जा रहे हैं। साथ ही किसानों के प्रक्षेत्रों पर आधुनिक रोपण पद्धतियों का व्यावहारिक प्रदर्शन भी कराया जा रहा है। इसी क्रम में हाल ही में कोलारस विकासखंड के किलावनी एवं चंदौरिया ग्रामों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इस अभियान में उद्यानिकी विभाग एवं सृजन संस्था का भी सहयोग प्राप्त हो रहा है। कृषि विज्ञान केन्द्र का उद्देश्य वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देकर किसानों को प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुकूल तकनीक उपलब्ध कराना तथा उद्यानिकी फसलों का उत्पादन एवं गुणवत्ता बढ़ाना है।
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32 views | Shivpuri, Madhya Pradesh | Jul 3, 2026