राज्य स्तरीय मेला सिर पर, प्रशासन की तैयारी बेदम! जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी उठे सवाल
एक सप्ताह से कम समय, तैयारियां अब भी अधूरी
बड़े-बड़े नेताओं की मौजूदगी का गवाह रहा मेला, अब आयोजन से पहले कार्यक्रम तक सार्वजनिक नहीं
हिमाचल 84 टीवी ब्यूरो छतराडी
ऐतिहासिक माता शिव शक्ति जातर मेले को राज्य स्तरीय दर्जा मिलने के बाद पहली बार प्रशासन के हाथों में आयोजन की बागडोर है, लेकिन मेले की विधिवत शुरुआत में एक सप्ताह से भी कम समय शेष रहने के बावजूद तैयारियां न के बराबर नजर आने से स्थानीय लोगों और युवाओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर के जनप्रतिनिधियों व नेताओं की कथित चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है।
राधाष्टमी के दूसरे दिन शुरू होने वाला यह पांच दिवसीय मेला 24 सितंबर तक चलेगा, लेकिन अभी तक प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि रात्रि सांस्कृतिक संध्याओं में कौन-कौन से कलाकार प्रस्तुति देंगे और किन प्रमुख हस्तियों को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि राज्य स्तरीय दर्जा मिलने के बाद मेले का स्वरूप और भव्य होना चाहिए था, मगर मौजूदा स्थिति इसके उलट दिखाई दे रही है।
गौरतलब है कि जिला स्तरीय मेला रहते हुए भी स्थानीय युवाओं और लोगों ने आपसी सहयोग से कई बार शानदार आयोजन करवाए हैं। यहां करणैल राणा, कुमार साहिल, इशांत भारद्वाज, कुलदीप शर्मा और सुनील राणा जैसे हिमाचल के नामी पहाड़ी कलाकार अपनी प्रस्तुतियां दे चुके हैं। कभी बड़े-बड़े नेता इस मेले में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचना अपने लिए गौरव की बात मानते थे, लेकिन अब राज्य स्तरीय दर्जा मिलने के बाद कथित प्रशासनिक सुस्ती चर्चा का विषय बनी हुई है।
स्थानीय लोगों की चिंता सिर्फ सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है। मेले की पहचान खप्पर-बुड्ढा नृत्य और डंडारस जैसी पारंपरिक लोक संस्कृति से है। लोगों को आशंका है कि यदि स्थानीय महिला मंडलों, युवा मंडलों और पंचायत को समय रहते आयोजन में शामिल नहीं किया गया तो पारंपरिक संस्कृति की प्रस्तुति भी प्रभावित हो सकती है।
लोगों का कहना है कि जिन पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पहले इस मेले को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई, उनकी सक्रियता भी इस बार अपेक्षित स्तर पर दिखाई नहीं दे रही है। अब सवाल यही है—राज्य स्तरीय दर्जा मिलने के बाद मेला भव्य होगा या प्रशासनिक चुप्पी के बीच इसकी रौनक फीकी पड़ जाएगी?