#बालाघाट
जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत ग्रामीणों को दिया गया पेयजल गुणवत्ता परीक्षण का प्रशिक्षण
एफटीके किट से पानी की जांच का व्यावहारिक प्रदर्शन, जलजनित बीमारियों से बचाव के बताए उपाय
जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने तथा जल स्रोतों की गुणवत्ता के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विकासखंड बालाघाट के ग्राम केशलेवाड़ा स्थित आंगनवाड़ी केंद्र में विशेष जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) बालाघाट के मार्गदर्शन में किया गया, जिसमें ग्रामीणों को पेयजल की गुणवत्ता जांचने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यक्रम में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती सोहद्रा बिसेन ने फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) के माध्यम से पानी की जांच का लाइव प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि इस किट की सहायता से पानी में मौजूद फ्लोराइड, नाइट्रेट, आयरन, क्लोराइड तथा खारेपन जैसी अशुद्धियों की आसानी से पहचान की जा सकती है। उन्होंने ग्रामीणों को पानी के नमूने लेने की सही प्रक्रिया, रासायनिक अभिकर्मकों (रिएजेंट्स) के सुरक्षित उपयोग तथा परीक्षण के परिणामों को समझने की विस्तृत जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि समय-समय पर जल स्रोतों की गुणवत्ता की जांच करने से दूषित पानी की पहचान समय रहते हो जाती है, जिससे आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाकर जलजनित बीमारियों की रोकथाम की जा सकती है। ग्रामीणों को अपने घरों एवं सार्वजनिक पेयजल स्रोतों का नियमित परीक्षण करने के लिए भी प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) के खंड कार्यालय से शीतल मिश्रा एवं ब्लॉक समन्वयक रानी सिंह राजपूत विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल प्रत्येक व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। दूषित पानी के सेवन से डायरिया, टायफाइड, हैजा सहित कई जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए प्रत्येक गांव में पेयजल स्रोतों की नियमित जांच एवं निगरानी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान का उद्देश्य केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को सुरक्षित पेयजल के महत्व के प्रति जागरूक करना और समुदाय को जल गुणवत्ता की निगरानी में सहभागी बनाना भी है। यदि ग्रामीण स्वयं जल परीक्षण की प्रक्रिया सीखेंगे तो अपने गांव में स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं, पुरुष, पंचायत प्रतिनिधि एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उपस्थित रहे। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण की सराहना करते हुए भविष्य में अपने गांव के पेयजल स्रोतों की नियमित जांच करने तथा जल संरक्षण एवं स्वच्छ जल के प्रति जनजागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।
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51 views | Balaghat, Madhya Pradesh | Jun 30, 2026