*#कहानी_बदलाव_की*
*प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजनाः बायोफ्लॉक पॉन्ड तकनीक से बढ़ रही ग्रामीण आय*
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*बड़वानी के युवा उद्यमी अर्पित साहू ने कम लागत में आधुनिक बायोफ्लॉक प्रणाली अपनाकर गढ़ी तरक्की की नई इबारत*
बड़वानी 26 सितंबर 2026/आधुनिक दौर में कृषि और उससे जुड़े सम्बद्ध व्यवसायों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पारंपरिक खेती और पशुपालन के साथ-साथ अब ग्रामीण युवा वैज्ञानिक पद्धतियों और उन्नत तकनीकों का उपयोग कर अपनी आमदनी को कई गुना बढ़ा रहे हैं। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना' इस बदलाव में एक मजबूत उत्प्रेरक साबित हो रही है। इसी योजना के संबल और अपने दृढ़ संकल्प के बल पर मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के राजपुर विकासखंड अंतर्गत जुलवानिया के युवा उद्यमी श्री अर्पित साहू ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में सफलता का एक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
*पारंपरिक सोच से हटकर बायोफ्लॉक तकनीक की ओर कदम*
बड़वानी जैसे कृषि-प्रधान जिले में जहां अधिकांश किसान पारंपरिक फसलों तक सीमित रहते हैं, वहीं अर्पित साहू ने कुछ अलग करने की ठानी। मत्स्य पालन विभाग, बड़वानी के मार्गदर्शन और प्रोत्साहन से उन्होंने जल कृषि ( एक्वाकल्चर) के क्षेत्र में कदम रखा। उन्होंने अपनी संस्था 'शोभा एक्वाकल्चर जुलवानिया' के माध्यम से आधुनिक बायोफ्लॉक पॉन्ड (Biofloc Pond) तकनीक आधारित मछली पालन इकाई की स्थापना की है। यह न केवल उनके व्यक्तिगत विकास की कहानी है, बल्कि क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्त्रोत है जो यह साबित करता है कि लगन और सही शासकीय योजनाओं के तालमेल से ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े उद्यम सफलतापूर्वक चलाए जा सकते हैं।
*बायोफ्लॉक पॉन्ड (Biofloc Pond) तकनीक की खासियत*
श्री साहू ने अपनी इकाई में जिस आधुनिक तकनीक को अपनाया है, उसे बायोफ्लॉक सिस्टम कहा जाता है। यह प्रणाली कम जगह और सीमित पानी में उच्च घनत्व वाले मत्स्य पालन के लिए बेहद उन्नत मानी जाती है। इसमें सूक्ष्म जीवों (फ्लॉक) के जरिए पानी के भीतर जैविक कचरे को प्रोटीनयुक्त आहार में बदला जाता है। इस तकनीक के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:
1.कम भूमि और जल की आवश्यकताः पारंपरिक तालाबों की तुलना में इसमें बहुत कम जगह और पानी की खपत होती है।
2.फीड लागत में कमीः बायोफ्लॉक तकनीक से मछलियों को प्राकृतिक और जैविक पूरक आहार मिलता है, जिससे कृत्रिम दाने का खर्च घट जाता है।
3.बेहतर जल प्रबंधनः नियंत्रित पर्यावरण के कारण मछलियों का विकास तेजी से होता है और बीमारियों का खतरा कम होता है।
**आर्थिक संरचना,वित्तीय सहायता एवं उत्पादन क्षमता*
इस बायोफ्लॉक पॉन्ड प्रोजेक्ट की कुल लागत 14 लाख रुपये है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मत्स्य पालन विभाग के माध्यम से श्री साहू को इस इकाई पर 60 प्रतिशत अनुदान यानी कुल 8,40,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई है।
जिससे उन्होंने 6 बायोफ्लॉक पॉन्ड स्थापित किए। एक बायोफ्लॉक पॉन्ड का आकार 12000 वर्ग फीट का होता है। जिसमें प्रति पॉन्ड (तालाब) लगभग दस हजार मछलियों का उत्पादन होता है। उत्पादित मछलियों की स्थानीय बाजार इसके साथ साथ आसपास के जिलों में उच्च मांग के कारण बिक्री सुगमता से हो जाती है। इसके विक्रय से अर्पित साहू को सालाना लगभग 10 लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है।
बड़वानी जिले में मत्स्य पालन के क्षेत्र में यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि सही दिशा में, आधुनिक बायोफ्लॉक जैसी तकनीकों का उपयोग करते हुए शासकीय योजनाओं का लाभ उठाया जाए, तो युवा नौकरी तलाशने वाले नहीं बल्कि नौकरी देने वाले बन सकते हैं। श्री अर्पित साहू की यह कहानी न केवल अन्य कृषकों और युवाओं को भी नए आयाम छूने के लिए प्रेरित कर रही है बल्कि ग्रामीण भारत की बदलती तस्वीर और आर्थिक स्वावलंबन का एक बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।
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31 views | Barwani, Madhya Pradesh | Sep 26, 2026