नगरासू प्रकरण पर युवा नेता मोहित डिमरी की अपील!!
पिछले कुछ दिनों से नगरासू क्षेत्र में जो तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई थी, वह अब शांति, संवाद और प्रशासनिक प्रयासों के माध्यम से सामान्य होने की ओर अग्रसर है। यह हम सभी के लिए राहत और संतोष का विषय है।
मैं पहाड़ के लोगों तथा सिख समाज, दोनों से हाथ जोड़कर विनम्र अपील करना चाहता हूँ कि किसी भी परिस्थिति में हम अपने बीच प्रेम, विश्वास और भाईचारे की उस मजबूत डोर को कमजोर न होने दें, जिसने वर्षों से हमें एक-दूसरे से जोड़े रखा है।
उत्तराखंड और सिख समाज का संबंध केवल आस्था का नहीं, बल्कि सेवा, सम्मान और अपनत्व का भी है। जब-जब देश और समाज को आवश्यकता पड़ी है, सिख समाज ने सेवा, समर्पण और त्याग की अद्वितीय मिसालें प्रस्तुत की हैं। वहीं उत्तराखंड के लोगों ने भी सदैव खुले दिल से सिख भाइयों-बहनों का स्वागत किया है और उन्हें अपने परिवार का हिस्सा माना है।
कुछ घटनाएं, कुछ गलतफहमियां अथवा कुछ व्यक्तियों की प्रतिक्रियाएं कभी भी दो समुदायों के रिश्तों की पहचान नहीं हो सकतीं। किसी एक व्यक्ति की गलती को पूरे समाज से जोड़ना न तो न्यायसंगत है और न ही हमारी संस्कृति और परंपराओं के अनुरूप।
मैं सोशल मीडिया पर सक्रिय सभी साथियों से भी निवेदन करता हूँ कि ऐसी कोई पोस्ट, वीडियो या टिप्पणी साझा न करें, जिससे किसी धर्म, समुदाय या व्यक्ति की भावनाएं आहत हों। नफरत फैलाने वाले शब्द भले ही एक पल में लिख दिए जाएं, लेकिन उनसे पैदा हुई दूरियों को मिटाने में वर्षों लग जाते हैं।
हमें यह याद रखना होगा कि हमारी आस्थाएं अलग हो सकती हैं, लेकिन हमारी मानवता एक है। हमारी पूजा-पद्धतियां भिन्न हो सकती हैं, लेकिन हमारा देश, हमारी संस्कृति और हमारी साझा विरासत एक है। यदि किसी से कोई गलती हुई है, तो उसका निर्णय कानून और न्याय व्यवस्था करेगी। हमें न्याय व्यवस्था पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए और इस विषय को समुदायों के बीच संघर्ष का रूप नहीं देने देना चाहिए।
आज आवश्यकता किसी की जीत या हार की नहीं, बल्कि आपसी विश्वास और सौहार्द को मजबूत करने की है। आवश्यकता आरोप-प्रत्यारोप की नहीं, बल्कि संवाद और समझदारी की है। आवश्यकता नफरत की नहीं, बल्कि प्रेम, सद्भाव और भाईचारे की है।
आइए, हम सभी मिलकर यह संकल्प लें कि उत्तराखंड की पावन धरती पर प्रेम, शांति, सौहार्द और आपसी सम्मान की परंपरा को कभी कमजोर नहीं होने देंगे।
शांति हमारी शक्ति है, भाईचारा हमारी पहचान है और इंसानियत हमारा सबसे बड़ा धर्म है।
मेरी ओर से सिख समाज के सभी भाइयों और बहनों को सम्मानपूर्वक सत श्री अकाल तथा समस्त उत्तराखंडवासियों को स्नेहपूर्ण प्रणाम।