श्रावण मास में भोलेनाथ की कृपा
सनातन परंपरा में श्रावण मास को भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र महीना माना गया है। मान्यता है कि जब जगत के पालनहार भगवान श्री विष्णु क्षीर सागर में एक माह के लिए योगनिद्रा में विश्राम करते हैं, तब संसार के पालन और भक्तों की रक्षा का दायित्व भगवान भोलेनाथ अपने ऊपर ले लेते हैं। यही पवित्र समय श्रावण मास कहलाता है।
कहा जाता है कि एक बार देवताओं ने भगवान शिव से पूछा—“प्रभु! जब भगवान विष्णु विश्राम करते हैं, तब संसार की व्यवस्था कौन संभालता है?”
भोलेनाथ मुस्कुराए और बोले—“जिस संसार की रक्षा के लिए मैं और नारायण सदैव तत्पर रहते हैं, उसके लिए विश्राम भी सेवा का ही एक रूप है। जब नारायण योगनिद्रा में जाते हैं, तब मैं अपने भक्तों और समस्त जीवों पर अपनी कृपादृष्टि बनाए रखता हूँ।”
भगवान शिव कैलाश से संसार की ओर देखते हैं। कहीं कोई दुखी है, कहीं कोई भूखा है, कहीं कोई अपने परिवार के लिए संघर्ष कर रहा है, तो कहीं कोई भक्त सच्चे मन से उनका नाम ले रहा है। भोलेनाथ सबकी पुकार सुनते हैं।
श्रावण की वर्षा की हर बूंद मानो शिव की करुणा का संदेश बनकर धरती पर उतरती है। भक्त कांवड़ लेकर आते हैं, शिवलिंग पर जल और गंगाजल अर्पित करते हैं, बेलपत्र चढ़ाते हैं और कहते हैं—“हर हर महादेव।”
भगवान शिव को दिखावे की नहीं, सच्चे मन की भक्ति प्रिय है। कोई भक्त महंगे फूल चढ़ाए या केवल एक लोटा जल—यदि उसके मन में श्रद्धा और दूसरों के प्रति करुणा है, तो भोलेनाथ उसकी भावना स्वीकार करते हैं।
कथा का संदेश यही है कि श्रावण केवल पूजा-पाठ का महीना नहीं, बल्कि दया, सेवा, संयम और मानवता का महीना भी है। जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में विश्राम करते हैं, तब भगवान शिव संसार पर अपनी कृपादृष्टि रखते हैं और हमें यह सीख देते हैं कि जीवन में सामर्थ्य मिले तो उसका उपयोग दूसरों के कल्याण के लिए करना चाहिए।
इसलिए इस श्रावण में शिवलिंग पर जल चढ़ाने के साथ किसी प्यासे को पानी पिलाएं, भूखे को भोजन दें, दुखी का सहारा बनें और किसी के चेहरे पर मुस्कान लाने का प्रयास करें।
क्योंकि सच्ची शिवभक्ति केवल मंदिर में सिर झुकाने से नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद के सामने मदद के लिए हाथ बढ़ाने से भी पूरी होती है।
हर हर महादेव!
ॐ नमः शिवाय! #viralreelsfacebook Ranjeet Bahadur Harihar Kumar Srivastava Sharad Srivastava Manoj Kumar Srivastav Nitesh Srivastava Sonam Sonam