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शरद श्रीवास्तव

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जिंदगी के सफर में गुजर जाते है जो मुकाम वो फिर नही आते <nis:link nis:type=tag nis:id=kayasthaworld nis:value=kayasthaworld nis:enabled=true nis:link/> Sharad Srivastava Harihar Kumar Srivastava Ranjeet Bahadur Manoj Kumar Srivastav Shyam Kumar Srivastava Ratnesh Kumar Srivastav Vinay Srivastava Rajiv Srivastava <nis:link nis:type=tag nis:id=viralreelsfacebook nis:value=viralreelsfacebook nis:enabled=true nis:link/> Ashutosh Krishna Srivastava Raja Kasim Sanjay Varma Pankaj <nis:link nis:type=tag nis:id=nonfollowers nis:value=nonfollowers nis:enabled=true nis:link/> Bjp Barabanki <nis:link nis:type=tag nis:id=राम_राम nis:value=राम_राम nis:enabled=true nis:link/>
1985 मैं एक साल का था लेकिन AI का कमाल देखिए 
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रानी मैरिज लॉन बड़ेल के पार्टनर अजय श्रीवास्तव निवासी महर्षि स्कूल लखपेड़ाबाग बाराबंकी के आवास पर <nis:link nis:type=tag nis:id=भगवान_श्रीकृष्ण nis:value=भगवान_श्रीकृष्ण nis:enabled=true nis:link/> की छठी पूजा के पावन अवसर पर हमारी भी उपस्थिति रही 🙏
अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो दर पे सुदामा गरीब आ गया है <nis:link nis:type=tag nis:id=kayasthaworld nis:value=kayasthaworld nis:enabled=true nis:link/> Sharad Srivastava Ranjeet Bahadur Manoj Kumar Srivastav Harihar Kumar Srivastava Shyam Kumar Srivastava Chandan Ramayani Ratnesh Kumar Srivastav Raja Kasim Sonam Sonam Nitesh Srivastava Yash Srivastava Bjp Barabanki <nis:link nis:type=tag nis:id=जय_श्री_कृष्णा nis:value=जय_श्री_कृष्णा nis:enabled=true nis:link/>
बाराबंकी शहर लखपेड़ाबाग मेन रोड पर हुए सड़क हादसे में घायल शिक्षिका Akansha Srivastava को एक सप्ताह से नहीं आया होश 😳 शिक्षिका के पिता रामकुमार श्रीवास्तव ने दर्ज कराई प्राथमिक सूचना रिपोर्ट, पुलिस प्रशासन जुटा कार्यवाही में <nis:link nis:type=tag nis:id=दुःखद_खबर nis:value=दुःखद_खबर nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=kayasthaworld nis:value=kayasthaworld nis:enabled=true nis:link/>
पूरे दिन हुई बारिश भी नहीं रोक पाई आस्था विश्वास और श्रद्धा के प्रतीक भगवान श्री कृष्ण के जन्माष्टमी कार्यक्रम को धूमधाम से धनोखर चक्रतीर्थ पर हुआ भव्य आयोजन 💕
भगवान श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर मेरी सुपुत्री सौम्या श्रीवास्तव तथा पोती श्री श्रीवास्तव का परफोर्मेंस कैसा लगा आपको बताइए 🙏 <nis:link nis:type=tag nis:id=viralreelsfacebook nis:value=viralreelsfacebook nis:enabled=true nis:link/> Sharad Srivastava Ranjeet Bahadur Harihar Kumar Srivastava Shyam Kumar Srivastava Manoj Kumar Srivastav Ratnesh Kumar Srivastav Sonam Sonam Bjp Barabanki Nitesh Srivastava Vijay Srivastava Yash Srivastava <nis:link nis:type=tag nis:id=shrikrishna nis:value=shrikrishna nis:enabled=true nis:link/>
जय श्री कृष्णा राधे राधे Happy Janmashtami 🌹
राधाकृष्ण प्रेम मंदिर धनोखर चक्रतीर्थ बाराबंकी 🙏🙏
बाराबंकी धनोखर चक्रतीर्थ चित्रगुप्तधाम व्यासपीठ राधाकृष्ण प्रेम मंदिर पर जन्माष्टमी के पावन अवसर पर मेरी सुपुत्री सौम्या श्रीवास्तव मातारानी राधा रानी के रूप में स्टेज पर परफॉर्मेंस करती हुई और सोनाली श्रीवास्तव भगवान श्री कृष्ण के रूप में 🙏 जय श्री राधे कृष्णा 🌹
आप सभी सम्मानित बाराबंकी जनपद वासी व शहर वासी समस्त श्रद्धालु जन भगवान श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर बाराबंकी धनोखर चक्रतीर्थ व्यासपीठ राधाकृष्ण प्रेम मंदिर पर सादर आमंत्रित है <nis:link nis:type=tag nis:id=viralreelsfacebook nis:value=viralreelsfacebook nis:enabled=true nis:link/> Ranjeet Bahadur Harihar Kumar Srivastava Sharad Srivastava Chandan Ramayani Shyam Kumar Srivastava Bjp Barabanki Nitesh Srivastava <nis:link nis:type=tag nis:id=kayasthaworld nis:value=kayasthaworld nis:enabled=true nis:link/> Ranjeet Bahadur Srivastava II
03 सितंबर 2026 को श्रीमती जी को उनके जन्मदिन पर शुभकामनाएं बधाई एवं शुभाशीष आप सदा सुहागन रहे और सौभाग्यवती हो ईश्वर आपकी सब मनोकामना पूर्ण करें 🌹
🚩 संकट कटे, मिटे सब पीड़ा… जो सुमिरै हनुमत बलबीरा 🚩
“संकट कटे मिटे सब पीड़ा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।”
सनातन परंपरा में भगवान श्री हनुमान जी केवल शक्ति और पराक्रम के प्रतीक नहीं, बल्कि भक्ति, विश्वास, साहस, सेवा और समर्पण की जीवंत प्रतिमूर्ति माने जाते हैं। उन्हें संकटमोचन कहा जाता है, क्योंकि भक्तों के हृदय में यह अटूट विश्वास है कि सच्चे मन से बजरंगबली का स्मरण करने पर जीवन के कठिन समय में मनुष्य को संबल और मार्गदर्शन प्राप्त होता है।
हनुमान जी का स्मरण निराश मन में आशा जगाता है, भयभीत मन में साहस भरता है और कमजोर पड़ते विश्वास को फिर से मजबूत करता है। उनके चरित्र से हमें यह सीख मिलती है कि जीवन में कितनी भी बड़ी चुनौती क्यों न हो, यदि विश्वास, परिश्रम और प्रभु के प्रति समर्पण बना रहे तो कठिन परिस्थितियों का सामना किया जा सकता है।
🚩 मंगलवार और बजरंगबली का विशेष संबंध
मंगलवार का दिन भगवान हनुमान जी की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन देशभर में श्रद्धालु मंदिरों में जाकर बजरंगबली के दर्शन करते हैं, हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं और प्रभु से अपने तथा समाज के कल्याण की प्रार्थना करते हैं।
पौराणिक कथाओं में बाल हनुमान की अद्भुत शक्ति का वर्णन मिलता है। बाल्यकाल में उन्होंने आकाश में चमकते सूर्य को फल समझकर उसे ग्रहण करने का प्रयास किया। उनके इस अद्भुत पराक्रम से देवताओं ने उनकी असाधारण शक्ति को पहचाना और उन्हें अनेक दिव्य शक्तियों एवं आशीर्वादों से विभूषित किया।
इसीलिए हनुमान जी को असीम शक्ति, अद्भुत साहस और अद्वितीय भक्ति का प्रतीक माना जाता है।
🚩 हनुमान जी की सबसे बड़ी शक्ति क्या है?
हनुमान जी की सबसे बड़ी शक्ति केवल उनका बल नहीं, बल्कि श्रीराम के प्रति उनकी निष्काम भक्ति है।
उन्होंने अपनी सारी शक्तियां प्रभु श्रीराम की सेवा और लोककल्याण में समर्पित कर दीं। समुद्र लांघना हो, माता सीता का पता लगाना हो या विपरीत परिस्थितियों में श्रीराम के कार्य को पूरा करना हो—हनुमान जी ने कभी अपने सामर्थ्य का अहंकार नहीं किया।
यही कारण है कि हनुमान जी का जीवन हमें सिखाता है—
शक्ति हो तो सेवा के लिए,
ज्ञान हो तो सदुपयोग के लिए,
सामर्थ्य हो तो परोपकार के लिए
और जीवन हो तो लोककल्याण के लिए।
🚩 सच्ची श्रद्धा से मिलता है आत्मबल
जब मनुष्य जीवन की परेशानियों से घिर जाता है, तब अक्सर उसे सबसे पहले अपने भीतर का विश्वास खोने का डर सताता है। ऐसे समय में हनुमान जी का स्मरण मन को यह विश्वास देता है कि संकट स्थायी नहीं होता।
बजरंगबली से प्रार्थना केवल अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए नहीं, बल्कि सही मार्ग पर चलने की शक्ति मांगने के लिए भी होनी चाहिए।
क्योंकि प्रभु से सबसे बड़ी प्रार्थना यही है—
“हे संकटमोचन! हमें संकट से लड़ने का साहस दीजिए,
गलत मार्ग से बचाइए,
दूसरों के दुख को समझने की संवेदना दीजिए
और सदैव सत्य, सेवा और धर्म के मार्ग पर चलने की शक्ति दीजिए।”
🚩 लोककल्याण की भावना ही सच्ची भक्ति है
जो भक्त अपने साथ-साथ दूसरों के सुख की भी कामना करता है, उसकी भक्ति में सेवा का भाव जुड़ जाता है। भूखे को भोजन, दुखी को सहारा, निराश व्यक्ति को हौसला और जरूरतमंद की सहायता करना भी प्रभु की आराधना का ही एक रूप है।
हनुमान जी हमें यही प्रेरणा देते हैं कि हमारी भक्ति केवल मंदिर की चौखट तक सीमित न रहे, बल्कि हमारे व्यवहार और कर्मों में भी दिखाई दे।
इस मंगलवार आइए, बजरंगबली के चरणों में अपने मन की चिंता, भय और निराशा अर्पित करें और उनसे मांगें—
अहंकार नहीं, विनम्रता;
भय नहीं, साहस;
निराशा नहीं, विश्वास;
स्वार्थ नहीं, सेवा;
और केवल अपना नहीं, सबका कल्याण।
जय बजरंगबली 🚩
जय श्रीराम 🚩
संकटमोचन हनुमान जी महाराज की जय 🚩 Ranjeet Bahadur Sharad Srivastava Harihar Kumar Srivastava Chandan Ramayani
इस बार राधाकृष्ण प्रेम मंदिर धनोखर चक्रतीर्थ व्यासपीठ बाराबंकी पर तीसरी जन्माष्टमी पर कार्यक्रम में बड़ा परिवर्तन, होंगे इस बार और भी अच्छी तरह से विभिन्न आयोजन, वीडियो में देखिए क्या - क्या होंगे 04 सितम्बर 2026 को जन्माष्टमी पर विशेष कार्यक्रम
भाजपा उत्तर प्रदेश के नवनियुक्त प्रदेश मंत्री Avadhesh Srivastava जी के जन्मदिन पर सोशल मीडिया से लेकर उनके आवास तक कार्यकर्ताओं, समर्थकों व भाजपा नेताओं का उमड़ा जनसैलाब इसी क्रम में वरिष्ठ भाजपा नेता मनोज श्रीवास्तव भी अपनी टीम के साथ उनके आवास पर बधाई देने पहुंचे MYogiAdityanath Narendra Modi 🌹🌹
भगवान को हमारी भेंट नहीं, हमारी भावना चाहिए
जिसने हमें सब कुछ दिया हो, उसी की दी हुई चीजों में से थोड़ा-सा वापस करके यदि हम इस भ्रम में फूलें कि हमने भगवान पर कोई बहुत बड़ा उपकार कर दिया है, तो इससे अधिक बचकानी बात और क्या होगी?
जिस मिट्टी से हमारा शरीर बना, जिस हवा से हमारी सांसें चलती हैं, जिस पानी से हमारी प्यास बुझती है, जिस अन्न से हमारा पेट भरता है और जिस जीवन का एक-एक क्षण हमें मिला है—वह सब आखिर किसका दिया हुआ है? हम तो केवल उस अनंत कृपा के उपभोक्ता हैं, मालिक नहीं।
भगवान को महंगे फूल, बड़े-बड़े प्रसाद और दिखावे की पूजा से अधिक हमारे कर्मों की सुगंध प्रिय होती है। मंदिर में सिर झुकाना अच्छी बात है, लेकिन किसी दुखी इंसान के सामने अपना अहंकार झुका देना उससे कहीं बड़ी बात है। भगवान के चरणों में फूल चढ़ाना अच्छी बात है, लेकिन किसी के जीवन में मुस्कान का फूल खिला देना उससे भी सुंदर पूजा है।
हम घंटों पूजा करते हैं, मंत्र पढ़ते हैं, व्रत रखते हैं और तीर्थों पर जाते हैं—लेकिन यदि हमारे व्यवहार से किसी का दिल दुखता है, हमारी वजह से किसी की आंखों में आंसू आते हैं और हमारे पास किसी जरूरतमंद की मदद करने का अवसर होने के बावजूद हम मुंह मोड़ लेते हैं, तो हमें अपनी भक्ति पर भी विचार करना चाहिए।
भगवान शायद यह नहीं पूछेंगे कि तुमने कितने मंदिरों में माथा टेका, बल्कि यह जरूर पूछ सकते हैं कि तुम्हारे कारण कितने लोगों ने अपना सिर उठाकर जीना सीखा।
अपना पेट भर लेना कोई बहुत बड़ी उपलब्धि नहीं है। यह तो प्रकृति ने हर जीव को सिखाया है। पशु-पक्षी भी अपने भोजन की व्यवस्था कर लेते हैं। इंसान होने का वास्तविक अर्थ तब सामने आता है, जब हम अपनी जरूरतों से आगे बढ़कर किसी दूसरे की जरूरत को समझते हैं।
कभी खुद थोड़ा कम खाकर किसी भूखे को भोजन करा देना,
कभी अपनी परेशानी भूलकर किसी परेशान व्यक्ति को हंसा देना,
कभी किसी निराश इंसान को उम्मीद दे देना,
कभी किसी गिरे हुए व्यक्ति को उठने का हौसला दे देना—
यही तो इंसानियत की असली पूजा है।
जिसके पास देने के लिए बहुत कुछ नहीं है, वह भी किसी को अपना समय दे सकता है, अच्छे शब्द दे सकता है, सम्मान दे सकता है और हौसला दे सकता है। कई बार किसी इंसान को धन की नहीं, केवल इस विश्वास की जरूरत होती है कि "कोई मेरे साथ खड़ा है।"
याद रखिए, भगवान को हमारी थाली का आकार नहीं, हमारे हृदय का आकार दिखाई देता है। मंदिर में चढ़ाया गया प्रसाद कुछ समय बाद समाप्त हो जाता है, लेकिन किसी भूखे के पेट में पहुंचा भोजन उसकी दुआ बनकर लंबे समय तक हमारे साथ रहता है।
इसलिए पूजा जरूर कीजिए, मंदिर जरूर जाइए, भगवान का स्मरण जरूर कीजिए—लेकिन साथ ही किसी के चेहरे की मुस्कान का कारण भी बनिए।
क्योंकि भक्ति केवल हाथ जोड़ने का नाम नहीं, हाथ बढ़ाने का नाम भी है।
पूजा केवल दीप जलाने का नाम नहीं, किसी के अंधेरे जीवन में उम्मीद का दीप जलाने का नाम भी है।
और धर्म केवल भगवान को पाने का रास्ता नहीं, इंसान को इंसान समझने की सीख भी है।
अंततः जीवन का हिसाब धन-दौलत से नहीं, दुआओं से होता है।
यदि इस जीवन में हमारे कारण किसी भूखे को भोजन मिला, किसी रोते हुए चेहरे पर मुस्कान आई, किसी निराश व्यक्ति को उम्मीद मिली और किसी टूटे हुए इंसान ने फिर से जीने का साहस पाया—तो समझिए हमारी जिंदगी केवल बीती नहीं, सार्थक हुई है।
भगवान को देने के लिए हमारे पास अपना कुछ भी नहीं है, लेकिन भगवान की बनाई दुनिया में किसी के काम आने का अवसर हमारे पास जरूर है। शायद यही सबसे सुंदर भेंट है, जो हम उन्हें दे सकते हैं।
इगो नहीं आदत है मेरी अहमियत न मिलने पर पसंदीदा चीज भी ठुकरा देता हूं मैं <nis:link nis:type=tag nis:id=barabanki_star nis:value=barabanki_star nis:enabled=true nis:link/> Sharad Srivastava Ranjeet Bahadur Manoj Kumar Srivastav Harihar Kumar Srivastava Raja Kasim Sonam Sonam Ashutosh Krishna Srivastava Shyam Kumar Srivastava Chandan Ramayani
मेरे बड़े भैया श्री Vijay Srivastava जी मेरी पहचान है 🙏
रक्षाबंधन पर्व के पावन अवसर पर अपनी बड़ी बहन श्रीमती मीरा श्रीवास्तव ममता दीदी के आवास पर अपनो के संग 🙏
मेरे प्यारे बच्चे रक्षाबंधन पर राखी बांधते बंधवाते हुए 🌹
रक्षाबंधन पर्व पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई <nis:link nis:type=tag nis:id=viralreelsfacebook nis:value=viralreelsfacebook nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=kayasthaworld nis:value=kayasthaworld nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=barabanki_star nis:value=Barabanki_Star nis:enabled=true nis:link/> Sharad Srivastava Ranjeet Bahadur Harihar Kumar Srivastava Manoj Kumar Srivastav Shyam Kumar Srivastava Bjp Barabanki Sonam Sonam Ratnesh Kumar Srivastav @highlight
आज <nis:link nis:type=tag nis:id=बाराबंकी_पटेल_चौराहे nis:value=बाराबंकी_पटेल_चौराहे nis:enabled=true nis:link/> पर भ्रमण करते समय <nis:link nis:type=tag nis:id=बाराबंकी_रियल_सुपरस्टार nis:value=बाराबंकी_रियल_सुपरस्टार nis:enabled=true nis:link/> प्रिय भाई Raja Dubey DK और प्रिय भाई <nis:link nis:type=tag nis:id=दीपू_अवस्थी_योगी_बाबा nis:value=दीपू_अवस्थी_योगी_बाबा nis:enabled=true nis:link/> से भेंट हुई एक सेल्फी तो बनती थी। कैसी लगी ये फोटो पिक आपको ⁉️
प्रिय अनुजश्री Rohit Singh जी को जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई शुभाशीष के साथ आप निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर रहे Happy Birthday Dear Brother 🌹
भाजपा नेता राजा कासिम ने धूमधाम से मनाया रोशनी का त्यौहार लोगो को कराया सूक्ष्म जलपान और दी सभी को बारावफात की मुबारकबाद 🌹
कुएँ के मेढ़क से आकाश के पक्षी व मानव सहित—दुनिया की असली पहचान
“एक कुएँ के मेढ़क को लगता है कि दुनिया उतनी ही बड़ी है, जितना उसका कुआँ।”
यही बात उस चूहे के बिल में कब्जा करके रहने वाले साँप पर भी लागू होती है, जिसे लगता है कि उसका बिल ही उसकी पूरी दुनिया है। नाली और घर के आसपास घूमने वाला छछूंदर, गली-गली उछलने वाला बंदर, जंगल का राजा कहलाने वाला शेर और आकाश में दूर-दूर तक उड़ान भरने वाला पक्षी—हर किसी की अपनी एक सीमा है और उसी सीमा के आधार पर वह दुनिया को समझता है।
लेकिन दुनिया वास्तव में कितनी बड़ी है, समाज का दस्तूर क्या है, अच्छाई क्या है और बुराई क्या है—इसे वही समझ सकता है जिसने दुनिया को केवल देखा ही नहीं, बल्कि उसे करीब से जाना और समझा भी हो।
किसी छोटे से दायरे में रहकर पूरी दुनिया के बारे में फैसला कर लेना सबसे बड़ी भूल है। कई बार इंसान अपने थोड़े से ज्ञान, थोड़ी सी सफलता, थोड़े से अनुभव और अपने आसपास के लोगों को देखकर स्वयं को दुनिया का सबसे समझदार व्यक्ति मान बैठता है। जबकि वास्तविकता यह है कि दुनिया उसके अनुमान से कहीं अधिक बड़ी, जटिल और विरोधाभासों से भरी हुई है।
यह संसार अच्छाई और बुराई, सत्य और असत्य, त्याग और स्वार्थ, प्रेम और घृणा—इन सबका संगम है। यहां हर मुस्कुराता चेहरा अपना नहीं होता और हर कठोर दिखने वाला व्यक्ति बुरा नहीं होता। कुछ लोग अच्छाई का मुखौटा पहनकर भीतर से स्वार्थी होते हैं और कुछ लोग कठोर दिखाई देकर भी दूसरों के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देते हैं।
कहा जाता है कि कलयुग की सबसे बड़ी पहचान यही है कि कभी-कभी दानव राम का किरदार निभाते दिखाई देते हैं और देवता असुरों के रूप में दिखाई पड़ते हैं। अर्थात केवल चेहरे, वेशभूषा, शब्दों और दिखावे से किसी व्यक्ति के चरित्र का निर्णय नहीं किया जा सकता।
आज आवश्यकता इस बात की है कि हम लोगों को उनके शब्दों से नहीं, उनके कर्मों से पहचानें। कौन कितना धार्मिक दिखाई देता है, कौन कितनी बड़ी-बड़ी बातें करता है, कौन कितना प्रभावशाली है—यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना यह कि उसके व्यवहार से समाज को क्या मिला और उसके कर्मों से किसी दूसरे के जीवन में क्या परिवर्तन आया।
जिसने दुनिया को केवल अपने आंगन तक देखा, उसकी दुनिया छोटी ही रहेगी। जिसने समाज को करीब से देखा, लोगों के सुख-दुख को समझा, रिश्तों के बदलते रंग देखे और समय के साथ इंसानों के वास्तविक चेहरों को पहचाना—वही जीवन की सच्चाई को समझ पाएगा।
इसलिए दुनिया को समझने के लिए आंखें ही नहीं, अनुभव भी चाहिए; लोगों को पहचानने के लिए चेहरा नहीं, चरित्र देखना चाहिए; और सत्य को समझने के लिए भीड़ नहीं, विवेक का साथ चाहिए।
क्योंकि यह कलयुग है—यहां हर चमकती चीज सोना नहीं और हर अंधेरा बुरा नहीं।
जो इस अंतर को पहचान गया, उसने जीवन को समझ लिया।
और जो केवल दिखावे को सच मानता रहा, वह सारी उम्र अपनी ही बनाई हुई छोटी-सी दुनिया में जीता रहा। <nis:link nis:type=tag nis:id=viralreelsfacebook nis:value=viralreelsfacebook nis:enabled=true nis:link/> Ranjeet Bahadur Manoj Kumar Srivastav Harihar Kumar Srivastava Sharad Srivastava Shyam Kumar Srivastava Chandan Ramayani Ratnesh Kumar Srivastav Raja Kasim Sonam Sonam Bjp Barabanki Ashutosh Krishna Srivastava
श्रावण मास में भोलेनाथ की कृपा
सनातन परंपरा में श्रावण मास को भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र महीना माना गया है। मान्यता है कि जब जगत के पालनहार भगवान श्री विष्णु क्षीर सागर में एक माह के लिए योगनिद्रा में विश्राम करते हैं, तब संसार के पालन और भक्तों की रक्षा का दायित्व भगवान भोलेनाथ अपने ऊपर ले लेते हैं। यही पवित्र समय श्रावण मास कहलाता है।
कहा जाता है कि एक बार देवताओं ने भगवान शिव से पूछा—“प्रभु! जब भगवान विष्णु विश्राम करते हैं, तब संसार की व्यवस्था कौन संभालता है?”
भोलेनाथ मुस्कुराए और बोले—“जिस संसार की रक्षा के लिए मैं और नारायण सदैव तत्पर रहते हैं, उसके लिए विश्राम भी सेवा का ही एक रूप है। जब नारायण योगनिद्रा में जाते हैं, तब मैं अपने भक्तों और समस्त जीवों पर अपनी कृपादृष्टि बनाए रखता हूँ।”
भगवान शिव कैलाश से संसार की ओर देखते हैं। कहीं कोई दुखी है, कहीं कोई भूखा है, कहीं कोई अपने परिवार के लिए संघर्ष कर रहा है, तो कहीं कोई भक्त सच्चे मन से उनका नाम ले रहा है। भोलेनाथ सबकी पुकार सुनते हैं।
श्रावण की वर्षा की हर बूंद मानो शिव की करुणा का संदेश बनकर धरती पर उतरती है। भक्त कांवड़ लेकर आते हैं, शिवलिंग पर जल और गंगाजल अर्पित करते हैं, बेलपत्र चढ़ाते हैं और कहते हैं—“हर हर महादेव।”
भगवान शिव को दिखावे की नहीं, सच्चे मन की भक्ति प्रिय है। कोई भक्त महंगे फूल चढ़ाए या केवल एक लोटा जल—यदि उसके मन में श्रद्धा और दूसरों के प्रति करुणा है, तो भोलेनाथ उसकी भावना स्वीकार करते हैं।
कथा का संदेश यही है कि श्रावण केवल पूजा-पाठ का महीना नहीं, बल्कि दया, सेवा, संयम और मानवता का महीना भी है। जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में विश्राम करते हैं, तब भगवान शिव संसार पर अपनी कृपादृष्टि रखते हैं और हमें यह सीख देते हैं कि जीवन में सामर्थ्य मिले तो उसका उपयोग दूसरों के कल्याण के लिए करना चाहिए।
इसलिए इस श्रावण में शिवलिंग पर जल चढ़ाने के साथ किसी प्यासे को पानी पिलाएं, भूखे को भोजन दें, दुखी का सहारा बनें और किसी के चेहरे पर मुस्कान लाने का प्रयास करें।
क्योंकि सच्ची शिवभक्ति केवल मंदिर में सिर झुकाने से नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद के सामने मदद के लिए हाथ बढ़ाने से भी पूरी होती है।
हर हर महादेव!
ॐ नमः शिवाय! <nis:link nis:type=tag nis:id=viralreelsfacebook nis:value=viralreelsfacebook nis:enabled=true nis:link/> Ranjeet Bahadur Harihar Kumar Srivastava Sharad Srivastava Manoj Kumar Srivastav Nitesh Srivastava Sonam Sonam