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शरद श्रीवास्तव

@sharadsrivastava
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ॐ नमः शिवाय 🌹 हर हर महादेव 🙏 प्रभु की कृपा बनी रहे
ववाह क्या बात कही शेख साहब ने मजा आ गया <nis:link nis:type=tag nis:id=viralreelsfacebook nis:value=viralreelsfacebook nis:enabled=true nis:link/> Sharad Srivastava Ranjeet Bahadur Manoj Kumar Srivastav Harihar Kumar Srivastava Shyam Kumar Srivastava Raja Kasim Ratnesh Kumar Srivastav
जितने दुश्मन जान के निकले आधे मेरे घर के ही निकले <nis:link nis:type=tag nis:id=viralreelsfacebook nis:value=viralreelsfacebook nis:enabled=true nis:link/> Sharad Srivastava Raja Kasim Ranjeet Bahadur Harihar Kumar Srivastava Manoj Kumar Srivastav Manzar Hasan Ranjeet Gupta Bjp Barabanki Fazal Hussain Ratnesh Kumar Srivastav Shyam Kumar Srivastava Chandan Ramayani
बाराबंकी ग्राम मंझलेपुर में भाजपा नेता राजा कासिम ने पहुंचकर कपरिया समाज के मेले का उद्घाटन किया <nis:link nis:type=tag nis:id=जयमातादी nis:value=जयमातादी nis:enabled=true nis:link/> Sharad Srivastava Raja Kasim Fazal Hussain Bjp Barabanki <nis:link nis:type=tag nis:id=exclusivenews nis:value=exclusivenews nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=bbk nis:value=BBK nis:enabled=true nis:link/>
जहाँ सत्य और धर्म का वास, वहीं ईश्वर का निवास
सनातन परंपरा में यह माना गया है कि ईश्वर किसी भव्य भवन, ऊँचे महलों या बाहरी आडंबर से अधिक उस हृदय और उस स्थान में निवास करते हैं जहाँ सत्य, धर्म, करुणा, न्याय और सदाचार का सम्मान होता है। पूजा-पाठ, यज्ञ और अनुष्ठान निश्चित रूप से आस्था के महत्वपूर्ण माध्यम हैं, किंतु यदि मन में छल, कपट, लालच और अन्याय भरा हो तो केवल बाहरी कर्मकांड से ईश्वर की वास्तविक कृपा प्राप्त नहीं होती।
जहाँ सत्य का साथ दिया जाता है, जहाँ अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन होता है, जहाँ परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियों का सम्मान किया जाता है, वहीं सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण बनता है। ऐसे स्थान पर विश्वास, प्रेम और अपनापन विकसित होता है और वही वातावरण ईश्वर की उपस्थिति का अनुभव कराता है।
इसके विपरीत जहाँ लालच, वासना, शोषण, अत्याचार, छल, भ्रष्टाचार और अहंकार का बोलबाला हो, वहाँ मनुष्य भी असुरक्षित और असहज महसूस करता है। यदि कोई स्थान भय, अन्याय और स्वार्थ का केंद्र बन जाए तो वहाँ शांति और पवित्रता का वातावरण नहीं रह जाता। इसलिए यह कहना उचित है कि ईश्वर का वास्तविक वास केवल भवनों में नहीं, बल्कि पवित्र विचारों और श्रेष्ठ आचरण में होता है।
धर्म का अर्थ केवल किसी विशेष पूजा-पद्धति तक सीमित नहीं है। धर्म का वास्तविक स्वरूप सत्य का पालन करना, न्याय करना, कमजोर की सहायता करना, अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करना और दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना है। जब व्यक्ति अपने जीवन में इन मूल्यों को अपनाता है, तभी उसका जीवन वास्तव में धार्मिक बनता है।
आज समाज को आवश्यकता है कि हम केवल धार्मिक प्रतीकों का प्रदर्शन न करें, बल्कि अपने व्यवहार में भी धर्म के मूल सिद्धांतों को उतारें। यदि हमारे शब्दों में सत्य, हमारे कर्मों में ईमानदारी, हमारे हृदय में करुणा और हमारे आचरण में मर्यादा होगी, तो हमारा घर, परिवार और समाज स्वयं एक पवित्र तीर्थ के समान बन जाएगा।
आइए, हम ऐसा जीवन जीने का संकल्प लें जिसमें सत्य हमारी शक्ति हो, धर्म हमारा मार्ग हो, करुणा हमारी पहचान हो और न्याय हमारा स्वभाव हो। क्योंकि जहाँ सत्य और धर्म का प्रकाश होता है, वहीं ईश्वर की कृपा, शांति और मंगल का वास्तविक निवास होता है।
सबसे अनमोल रिश्ता कोई होता है तो वो पति पत्नी का है 🙏
श्रावण मास के प्रथम दिवस पर आपको हार्दिक शुभकामनाएं
ज्ञान जहां से प्राप्त हो उसे ग्रहण करना ही विशेषता होती है
भूखे को भोजन प्यासे को पानी यही है भारत की श्रेष्ठ कहानी
गऊ माता की सुरक्षा को लेकर गौ भक्तों ने निकाली सुरक्षा सम्मान यात्रा और जिला अधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया
<nis:link nis:type=tag nis:id=वरिष्ठ_पत्रकार_अरशद_जमाल_हुए_हादसे_के_शिकार nis:value=वरिष्ठ_पत्रकार_अरशद_जमाल_हुए_हादसे_के_शिकार nis:enabled=true nis:link/> प्रिय मित्र वरिष्ठ पत्रकार भाई Arshad Jamal जो अपनी कार से अर्सेनी मोड़ के पास कही अपनी चार पहिया गाड़ी से उतर रहे थे तेज रफ्तार से आ रही स्कूटी पर सवार महिला ने मारी उन्हें जोरदार टक्कर जिससे उनके पैर में तीन जगह हुआ फ्रैक्चर महिला को भी लगी चोट, अरशद भाई से हुई बाराबंकी ट्रामा सेंटर के वार्ड में भेंट उन्होंने बताया डॉक्टर ने ऑपरेशन कर राड डालने की बात कही है, वो घर में अकेले संरक्षक की भूमिका में है ईश्वर उनको शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करें।
जय परमपिता परमेश्वर हर हर महादेव जी की <nis:link nis:type=tag nis:id=viralreelsfacebook nis:value=viralreelsfacebook nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=barabanki nis:value=barabanki nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=barabankiupdates nis:value=barabankiupdates nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=nonfollowers nis:value=nonfollowers nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=जय_श्रीराम nis:value=जय_श्रीराम nis:enabled=true nis:link/> Sharad Srivastava <nis:link nis:type=tag nis:id=हमारे_मालिक_भोलेनाथ nis:value=हमारे_मालिक_भोलेनाथ nis:enabled=true nis:link/>
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बाराबंकी लखपेड़ाबाग में ब्राह्मण उत्थान महासभा के तत्वाधान में हाईस्कूल इंटरमीडिएट परीक्षा में सर्वाधिक अंक लाने वाले ब्राह्मण समाज के छात्र छात्राओं को किया गया सम्मानित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय अवस्थी सहित राष्ट्रीय टीम, प्रादेशिक टीम व जनपद के तमाम पदाधिकारी रहे उपस्थित
Narendra Modi सिर्फ नाम नहीं भारत माता की "मान मर्यादा और अभिमान" है भाई साहब "जय हिंद जय भारत" <nis:link nis:type=tag nis:id=viralreelsfacebook nis:value=viralreelsfacebook nis:enabled=true nis:link/> MYogiAdityanath Ranjeet Bahadur Manoj Kumar Srivastav Shyam Kumar Srivastava Sharad Srivastava Bjp Barabanki
ॐ श्री धर्मराजाय चित्रगुप्ताय नमो नमः 🌹🙏🌹
बाराबंकी रामनगर विधानसभा में लोधेश्वर महादेवा में भोलेनाथ के दर्शन व विधि विधान से पूजन करते उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी महाराज जी 🙏
मनुष्य की बढ़ती महत्वाकांक्षा और नैतिक संतुलन की आवश्यकता

आज विज्ञान, प्रौद्योगिकी और सत्ता के विस्तार के इस युग में मनुष्य अपनी उपलब्धियों पर स्वाभाविक रूप से गर्व महसूस कर रहा है। यह गर्व तब तक उचित है, जब तक उसमें विनम्रता, उत्तरदायित्व और नैतिकता का संतुलन बना रहे। किंतु जब मनुष्य स्वयं को सर्वशक्तिमान मानने लगता है और यह समझ बैठता है कि उसके ऊपर किसी नैतिक या आध्यात्मिक अनुशासन का प्रभाव नहीं है, तभी पतन की प्रक्रिया आरंभ हो जाती है।

वर्तमान समाज में यह प्रवृत्ति भी देखने को मिलती है कि एक राज्य, एक संपत्ति और एक विश्वास के नाम पर लोग अपने ही सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता कर लेते हैं। सत्ता की आकांक्षा में वादे बदल जाते हैं, संपत्ति के लिए संबंधों में दरार आ जाती है और स्वार्थ के कारण विश्वासघात सामान्य होता जा रहा है। यह केवल राजनीतिक समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक और नैतिक संकट भी है।

राजनीति का मूल उद्देश्य जनसेवा, न्याय और विकास होना चाहिए। परंतु जब राजनीति केवल सत्ता प्राप्ति का साधन बन जाती है, तब जनता का विश्वास कमजोर होने लगता है। लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति जनता का भरोसा है, और यदि यही भरोसा डगमगा जाए, तो किसी भी व्यवस्था की नींव कमजोर हो जाती है।

सामाजिक स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक है। परिवारों में स्वार्थ बढ़ रहा है, संबंधों में विश्वास घट रहा है और नैतिक मूल्यों का स्थान व्यक्तिगत लाभ लेता जा रहा है। धन और पद की प्रतिस्पर्धा में अनेक लोग यह भूल जाते हैं कि जीवन की सबसे बड़ी पूंजी विश्वास, ईमानदारी और चरित्र है। एक बार विश्वास टूट जाए, तो उसे पुनः स्थापित करना अत्यंत कठिन हो जाता है।

भारतीय संस्कृति सदैव यह सिखाती रही है कि मनुष्य कर्म कर सकता है, परंतु अंतिम निर्णय समय, प्रकृति और ईश्वर के अधीन होता है। इतिहास इस तथ्य का साक्षी है कि अहंकार चाहे कितना भी प्रबल क्यों न हो, उसका अंत प्रायः विनाश में ही होता है। रावण, कंस और दुर्योधन जैसे पात्र इसी सत्य की स्मृति कराते हैं कि जब शक्ति मर्यादा से बाहर चली जाती है, तो उसका परिणाम निश्चित रूप से पतन होता है।

अतः आवश्यकता इस बात की है कि व्यक्ति, समाज और राजनीति—तीनों अपने मूल्यों की ओर लौटें। सत्ता सेवा का माध्यम बने, संपत्ति का उपयोग समाजहित में हो और विश्वास को सर्वोच्च मूल्य माना जाए। यही किसी भी राष्ट्र की स्थायी प्रगति का आधार है।

अंततः, मनुष्य भगवान नहीं बन सकता। वह अपनी बुद्धि और परिश्रम से असाधारण उपलब्धियाँ प्राप्त कर सकता है, किंतु प्रकृति, समय और कर्म के शाश्वत नियमों से ऊपर नहीं उठ सकता। इसलिए अहंकार के स्थान पर विनम्रता, विश्वासघात के स्थान पर विश्वास और स्वार्थ के स्थान पर लोककल्याण ही एक सशक्त समाज और राष्ट्र की पहचान है।
भाजपा नेता राजा कासिम ने कहा कि वो 2027 विधानसभा चुनाव में बाराबंकी से सभी मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों से भाजपा को जिताएंगे और छहों विधानसभा में कमल खिलाएंगे
"मुंह में राम, कमर पर छूरी" — आडंबर नहीं, आचरण ही सच्ची भक्ति है
आज के समय में एक कहावत बार-बार याद आती है—"मुंह में राम, कमर पर छूरी।" इसका अर्थ है कि व्यक्ति बाहर से धर्म, सत्य और ईश्वर का नाम लेता है, लेकिन उसके कर्म छल, कपट, अन्याय और स्वार्थ से भरे होते हैं।
ईश्वर का नाम स्मरण करना भारतीय संस्कृति की महान परंपरा है। लेकिन जब कोई व्यक्ति केवल अपनी सामाजिक छवि बचाने, लोगों को भ्रमित करने या अपने गलत कार्यों पर पर्दा डालने के लिए भगवान का नाम लेता है, तब वह भक्ति नहीं, बल्कि धर्म का दिखावा होता है।
धर्म का वास्तविक स्वरूप मंदिर जाने, पूजा-पाठ करने या केवल भगवान का नाम लेने तक सीमित नहीं है। धर्म का सार है—सत्य बोलना, न्याय करना, दया रखना, ईमानदारी से जीवन जीना और किसी के साथ अन्याय न करना। यदि किसी के कर्म अधर्म से भरे हों और वाणी में केवल भगवान का नाम हो, तो यह आत्मा और समाज दोनों के साथ छल है।
शास्त्रों में भी स्पष्ट कहा गया है कि मनुष्य का मूल्य उसके कर्मों से होता है, केवल शब्दों से नहीं। भगवान भाव और आचरण को देखते हैं, बाहरी प्रदर्शन को नहीं। जो व्यक्ति दूसरों का अहित करता है, झूठ बोलता है, भ्रष्टाचार करता है या स्वार्थ के लिए लोगों को कष्ट देता है, वह चाहे कितनी भी बार भगवान का नाम ले, उसके कर्मों का फल उसे अवश्य प्राप्त होता है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि हम धर्म को केवल दिखावे का साधन न बनाएं, बल्कि अपने जीवन में उतारें। यदि हमारे विचार पवित्र हों, व्यवहार विनम्र हो और कर्म न्यायपूर्ण हों, तभी भगवान का नाम सार्थक होगा।
याद रखिए— भगवान को शब्दों से नहीं, कर्मों से प्रसन्न किया जा सकता है। मुंह से "राम" कहना आसान है, लेकिन जीवन में "राम" के आदर्शों को अपनाना ही सच्ची भक्ति और सच्चा धर्म है।
कर्म, भाग्य और संतान: क्या पिता के कर्मों का प्रभाव संतानों पर पड़ता है?
सनातन परंपरा में कर्म को जीवन का सबसे बड़ा सत्य माना गया है। यह मान्यता है कि मनुष्य जैसा कर्म करता है, वैसा ही फल उसे समय आने पर अवश्य प्राप्त होता है। इसलिए कहा गया है कि "विधाता के घर देर है, अंधेर नहीं।"
लोकजीवन में एक प्रसिद्ध कहावत भी प्रचलित है—
"एक लख पूत, सवा लख नाती, जाके घर में दिया न बाती।"
इस कहावत का भाव यह है कि धन, वैभव, संतान और सामर्थ्य होने पर भी यदि मनुष्य के कर्म अधर्मपूर्ण हों, तो अंततः उसका अभिमान और वैभव टिक नहीं पाता। कर्म का न्याय कभी न कभी अवश्य होता है।
भारतीय धर्मग्रंथों में अनेक प्रसंग ऐसे मिलते हैं जो यह संदेश देते हैं कि कर्मों का प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका असर परिवार और आने वाली पीढ़ियों तक भी पहुँच सकता है।
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के पिता राजा दशरथ का जीवन इसका एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। परंपरा के अनुसार युवावस्था में अनजाने में श्रवण कुमार की मृत्यु का कारण बनने के बाद उन्हें उनके माता-पिता का शाप मिला कि वे भी पुत्र-वियोग का असहनीय दुःख सहेंगे। समय आने पर जब श्रीराम को वनवास हुआ, तो राजा दशरथ पुत्र-वियोग सहन नहीं कर सके और उनका देहांत हो गया। यह कथा कर्म के परिणाम का संदेश देती है।
इसी प्रकार लंकापति रावण अत्यंत विद्वान, तपस्वी और शक्तिशाली राजा था। परंतु अहंकार, अधर्म और माता सीता के हरण जैसे कर्मों ने उसके समस्त वैभव को नष्ट कर दिया। उसका विशाल साम्राज्य समाप्त हो गया और उसका कुल भी विनाश के मार्ग पर चला गया। यह प्रसंग बताता है कि ज्ञान और शक्ति तभी तक कल्याणकारी हैं, जब तक वे धर्म और मर्यादा के साथ जुड़े रहें।
इन कथाओं का मूल संदेश यह नहीं कि हर संतान अपने माता-पिता के कर्मों का निश्चित रूप से वही फल भोगती है, बल्कि यह है कि माता-पिता के कर्म, संस्कार और निर्णय परिवार के भविष्य पर गहरा प्रभाव डालते हैं। दूसरी ओर, सनातन दर्शन यह भी सिखाता है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्वयं के कर्मों से अपने जीवन की दिशा बदल सकता है। अच्छे कर्म, सत्य, सेवा और धर्म का मार्ग अपनाकर मनुष्य अपने जीवन को श्रेष्ठ बना सकता है।
इसलिए प्रत्येक माता-पिता का कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों को केवल धन-संपत्ति ही नहीं, बल्कि अच्छे संस्कार, सत्य, ईमानदारी, करुणा और धर्म का मार्ग भी दें। यही सबसे बड़ी विरासत है। धन समाप्त हो सकता है, लेकिन संस्कार पीढ़ियों तक परिवार का सम्मान बनाए रखते हैं।
अंततः यही कहा जा सकता है कि भाग्य और कर्म एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। कर्म ही भाग्य का निर्माण करते हैं। यदि कर्म श्रेष्ठ होंगे तो भविष्य भी उज्ज्वल होगा, और यदि कर्म अधर्मपूर्ण होंगे तो उनका परिणाम कभी न कभी अवश्य सामने आएगा।
"जैसा बोओगे, वैसा काटोगे।
कर्म ही मनुष्य का वास्तविक परिचय हैं, और वही उसके भाग्य की सबसे मजबूत नींव बनते हैं।"
बाराबंकी लखपेड़ाबाग मोड़ के पास आज सुबह में माँ दुर्गा ऑटोमोबाइल दुकान में आग लगने के बाद अग्निशमन सुरक्षा कर्मचारियों अधिकारियों की काफी मशक्कत से बुझी आग <nis:link nis:type=tag nis:id=viralreelsfacebook nis:value=viralreelsfacebook nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=facts nis:value=facts nis:enabled=true nis:link/> Riport Surendra Maurya Photojournalist दुखद Manoj Kumar Srivastav Ranjeet Bahadur Sharad Srivastava Shyam Kumar Srivastava 

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