"क्ले और टेराकोटा सिखाते हैं रेजिस्टेंस छोड़ खुद को आकार देना: श्रद्धा मुर्डिया
टखमण-WZCC की 10 दिवसीय कार्यशाला संपन्न
उदयपुर।
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (WZCC) और टखमण 28 के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 10 दिवसीय राष्ट्रीय क्ले, पॉटरी एवं टेराकोटा कार्यशाला का विधिवत समापन हुआ। समापन समारोह में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक अश्विन एम. दलवी और कश्ती फाउंडेशन की संस्थापक श्रद्धा मुर्डिया बतौर अतिथि उपस्थित रहे।
समारोह को संबोधित करते हुए कश्ती फाउंडेशन की श्रद्धा मुर्डिया ने मिट्टी के मूल स्वभाव और कला के गहरे अर्थ को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि क्ले, पॉटरी और टेराकोटा की सबसे बड़ी खूबी यह है कि मिट्टी बेहद विनम्र (हम्बल) माध्यम है। यह हमें सिखाती है कि कैसे अपने भावों और अभिव्यक्तियों से खुद को आकार (शेप) दिया जाए। उन्होंने कहा कि मिट्टी का लचीलापन और सहजता हमें यह जीवन संदेश देती है कि कभी-कभी अनावश्यक विरोध या प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) न रखना ही सबसे खूबसूरत बात होती है। हर कला रूप के पीछे एक गहरा दार्शनिक अर्थ छिपा होता है और मिट्टी हमें सहज समर्पण व सृजन का मार्ग दिखाती है।
श्रद्धा मुर्डिया ने आगे कहा कि टखमण 28 उदयपुर की उन दुर्लभ जगहों में से एक है, जो देश-दुनिया के कलाकारों को एक छत के नीचे लाकर दृश्य कलाओं (विजुअल आर्ट्स) को एक साझा मंच प्रदान करता है। इस कार्यशाला की सबसे खास बात यह रही कि इसमें युवा, मध्यम आयु वर्ग और वरिष्ठ कलाकारों ने मिलकर काम किया और अपनी कलात्मक ऊर्जा का आदान-प्रदान किया।
कार्यक्रम में WZCC के निदेशक अश्विन एम. दलवी और तखमण के पदाधिकारियों सहित अनेक वरिष्ठ कलाकारों की मौजूदगी रही। अतिथियों ने 10 दिनों तक चले इस कला महाकुंभ में निर्मित उत्कृष्ट टेराकोटा और पॉटरी कृतियों की सराहना करते हुए सभी प्रतिभागी कलाकारों को बधाई दी। टखमण और WZCC के इस संयुक्त प्रयास को कला जगत के लिए एक महत्वपूर्ण व सराहनीय पहल बताया गया। #Udaipur #terakota #clayart #trendingudaipur