#नालंदा - हरनौत नगर पंचायत में मुढ़ारी गांव को शामिल करने के विरोध में ग्रामीणों का धरना, परिसीमन से बाहर रखने की मांग
हरनौत प्रखंड कार्यालय परिसर में सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक चला प्रदर्शन, किसानों ने टैक्स और कृषि कार्यों में परेशानी की जताई आशंका
नालंदा से संवाददाता राकेश कुमार
हरनौत नगर पंचायत के परिसीमन में मुढ़ारी गांव को शामिल किए जाने के विरोध में गुरुवार को सैकड़ों महिला-पुरुष ग्रामीणों ने हरनौत प्रखंड कार्यालय परिसर में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने मुढ़ारी गांव को नगर पंचायत के दायरे से बाहर रखने की मांग करते हुए प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का कहना था कि उनका गांव पूरी तरह ग्रामीण परिवेश वाला है और यहां की अधिकांश आबादी कृषि कार्यों पर निर्भर है। ऐसे में गांव को नगर पंचायत में शामिल किए जाने से किसानों और आम ग्रामीणों की परेशानियां बढ़ सकती हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि इन दिनों प्रखंड क्षेत्र में परिसीमन का कार्य चल रहा है। इसी प्रक्रिया के तहत कुछ गांवों को नगर पंचायत में शामिल करने की पहल की जा रही है। मुढ़ारी गांव के लोगों को आशंका है कि नगर पंचायत में शामिल होने के बाद उन्हें विभिन्न प्रकार के शहरी कर और शुल्क का भुगतान करना पड़ेगा। इससे खेती-किसानी के सहारे परिवार चलाने वाले लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। इसी आशंका को लेकर ग्रामीण गांव को नगर पंचायत से अलग रखने की मांग कर रहे हैं।
कृषि पर निर्भर है गांव की अधिकांश आबादी
धरना-प्रदर्शन में शामिल स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि रौशन कुमार सहित ग्रामीण पप्पू कुमार, रामजी महतो, विराट शर्मा, राजेश, गणेश, मनीष, अखिलेश, धनंजय, निभा देवी, राम सखी देवी, सुखिया देवी समेत दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि मुढ़ारी पंचायत क्षेत्रफल और आबादी के लिहाज से काफी छोटा पंचायत है। यहां के अधिकांश लोग खेती-किसानी और उससे जुड़े कार्यों के माध्यम से अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं।
ग्रामीणों का कहना था कि गांव को नगर पंचायत में शामिल करने से पहले यहां के लोगों की आर्थिक स्थिति, कृषि पर निर्भरता और स्थानीय जरूरतों का आकलन किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि नगर पंचायत के नियम लागू होने के बाद विभिन्न प्रकार के कर और शुल्क जमा करने की बाध्यता बढ़ सकती है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी।
ग्रामीणों ने कहा कि वे गांव के विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर ऐसी व्यवस्था लागू नहीं की जानी चाहिए, जिससे खेती-किसानी करने वाले परिवारों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव पड़े। उनकी मांग है कि मुढ़ारी गांव की ग्रामीण पहचान और कृषि आधारित जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए इसे नगर पंचायत के परिसीमन से बाहर रखा जाए।
दो वर्षों से जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं बनने की भी उठाई समस्या
धरना-प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र जारी नहीं होने की समस्या को भी प्रमुखता से उठाया। उनका आरोप है कि पिछले करीब दो वर्षों से पंचायत क्षेत्र के लोगों को जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने में परेशानी हो रही है। प्रमाणपत्र नहीं बनने के कारण ग्रामीणों को विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए वे कई बार प्रखंड कार्यालय से लेकर जिला प्रशासन तक लिखित आवेदन दे चुके हैं। इसके बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। इससे लोगों में नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना था कि एक ओर प्रमाणपत्र जैसी बुनियादी प्रशासनिक सुविधा के लिए उन्हें परेशान होना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर गांव को नगर पंचायत में शामिल करने की प्रक्रिया से उनकी चिंताएं और बढ़ गई हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि परिसीमन से संबंधित उनकी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार किया जाए और जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र की समस्या का भी जल्द समाधान कराया जाए।
बीडीओ की अनुपस्थिति में सीओ को सौंपा आवेदन
मुढ़ारी गांव के ग्रामीणों का धरना गुरुवार सुबह करीब 10 बजे शुरू हुआ, जो दोपहर 3 बजे तक चला। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने एकजुट होकर अपनी मांगों को प्रशासन के सामने रखा। प्रखंड विकास पदाधिकारी डॉ. पंकज कुमार के कार्यालय में मौजूद नहीं रहने के कारण ग्रामीणों ने अंचलाधिकारी रीता कुमारी को अपना आवेदन सौंपा।
अंचलाधिकारी रीता कुमारी स्वयं अपने चैंबर से बाहर निकलकर प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों के पास पहुंचीं और उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान ग्रामीणों ने उन्हें परिसीमन में मुढ़ारी गांव को नगर पंचायत से बाहर रखने समेत अपनी विभिन्न मांगों से संबंधित आवेदन सौंपा।
अंचलाधिकारी ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों और समस्याओं से संबंधित बातों को उच्च अधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा। इसके बाद ग्रामीणों ने अपनी मांगों पर प्रशासन से सकारात्मक पहल की उम्मीद जताई।
विकास के साथ किसानों के हितों की रक्षा जरूरी : मुन्ना
धरना-प्रदर्शन के दौरान मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता चंद्र उदय कुमार उर्फ मुन्ना ने कहा कि नगर पंचायत में शामिल होने से गांव में शहरी सुविधाओं के विस्तार की संभावना जरूर बनती है, लेकिन इसके साथ किसानों की चिंताओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि मुढ़ारी गांव की बड़ी आबादी खेती-किसानी पर निर्भर है। ऐसे में गांव को नगर पंचायत में शामिल करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि इससे किसानों की आजीविका और आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। ग्रामीणों की आशंकाओं को दूर किए बिना परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ने से लोगों में असंतोष बढ़ सकता है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि ग्रामीणों की समस्याओं और आपत्तियों पर गंभीरता से विचार करते हुए उचित निर्णय लिया जाए, ताकि गांव के लोगों को भविष्य में किसी तरह की अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
मांगों पर कार्रवाई की उम्मीद में ग्रामीण
धरना-प्रदर्शन के माध्यम से ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे मुढ़ारी गांव को नगर पंचायत में शामिल किए जाने के पक्ष में नहीं हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि गांव को परिसीमन से बाहर रखा जाए, किसानों पर संभावित अतिरिक्त आर्थिक बोझ की आशंका को दूर किया जाए और जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने से जुड़ी समस्या का जल्द समाधान कराया जाए।
अब देखना होगा कि ग्रामीणों की मांगों और आपत्तियों पर जिला प्रशासन एवं संबंधित अधिकारी क्या निर्णय लेते हैं। फिलहाल ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखते हुए समस्या के समाधान की उम्मीद जताई है।
Rahui, Nalanda | Oct 29, 2026