भोरंज के बच्चों में रागी के व्यंजनों से दूर होगी कुपोषण की समस्या
408 कुपोषित बच्चों में रागी पाउडर और इससे बने पौष्टिक व्यंजनों से आया बड़ा परिवर्तन
जिला प्रशासन की इस विशेष पहल के कुछ महीनों में ही सामने आए अच्छे परिणाम
भोरंज 07 अक्तूबर। छोटे बच्चों का सही पोषण सुनिश्चित करके उन्हें कुपोषण एवं अन्य गंभीर रोगों से बचाने के लिए बाल विकास परियोजना भोरंज में जिला प्रशासन की विशेष पहल पर आरंभ किए गए रागी के पाउडर के वितरण के काफी उत्साहजनक परिणाम सामने आने लगे हैं।
उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ ने एक पायलट परियोजना के तहत बाल विकास परियोजना भोरंज के विभिन्न आंगनवाड़ी केंद्रों में 408 कुपोषित बच्चों को पौष्टिक गुणों से भरपूर रागी के पाउडर का वितरण आरंभ करवाया है। उपायुक्त ने बताया कि कुछ महीनों में ही इन बच्चों में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिल रहा है। इन बच्चों की लंबाई, वजन और स्वास्थ्य के कई अन्य मानकों में काफी ज्यादा सुधार नजर आ रहा है।
उन्होंने बताया कि कि किसी भी बच्चे के जीवन के पहले 1000 दिन यानि गर्भ से लेकर उसके दूसरे जन्मदिन तक का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसी दौरान उसके मस्तिष्क एवं शरीर का सर्वाधिक विकास होता है। अगर इस दौरान बच्चे का सही पोषण सुनिश्चित किया जाए तो वह भविष्य में स्वस्थ जीवन जी सकता है।
उपायुक्त ने बताया कि हमारे कई पारंपरिक व्यंजन एवं मोटे अनाज आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इन्हें दैनिक आहार में शामिल करके बच्चों को कुपोषण से बचाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि भोरंज ब्लॉक में मई महीने के दौरान लगभग 408 बच्चे कुपोषित पाए गए थे। इन बच्चों का सही पोषण सुनिश्चित करने के लिए पायलट आधार पर न्यूट्रिशनल इंटरवेंशन (पोषण हस्तक्षेप) कार्यक्रम आरंभ किया गया है। इस कार्यक्रम के तहत छोटे बच्चों को पौष्टिक गुणों से भरपूर रागी का पाउडर दिया जा रहा है। यह पाउडर और इससे बनने वाले व्यंजन पौष्टिक गुणों से भरपूर होते हैं। बच्चे भी इन्हें बड़े चाव से खाते हैं।