प्रसव पीड़ा में भी पैदल सफर... बारिश के बीच अस्पताल पहुंचने की जद्दोजहद!!
सड़क नहीं होने से गर्भवती महिला को उठानी पड़ी जोखिम भरी राह, पहाड़ में विकास के दावों पर फिर उठे सवाल!!
पहाड़ में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं के सरकारी दावों के बीच एक तस्वीर व्यवस्था की हकीकत बयां कर रही है। प्रसव पीड़ा से कराहती एक गर्भवती महिला को बारिश के बीच पैदल रास्ते से अस्पताल की ओर ले जाना पड़ा। बदहाल रास्तों और सड़क सुविधा के अभाव के चलते परिजन महिला को लेकर बारिश में पैदल चलने को मजबूर दिखाई दिए।
प्रसव पीड़ा के बीच महिला का इस तरह पैदल चलना न केवल उसकी जान को जोखिम में डालता है, बल्कि जच्चा और बच्चा दोनों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। पहाड़ी क्षेत्रों में बरसात के दौरान सड़कें बाधित होने और गांवों तक सड़क सुविधा नहीं पहुंचने से आपात स्थिति में ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।
वीडियो में दिखाई दे रही यह तस्वीर व्यवस्था से सीधा सवाल पूछती नजर आती है—आखिर पहाड़ की गर्भवती महिलाओं को प्रसव के समय अस्पताल पहुंचने के लिए कब तक पैदल रास्तों का सहारा लेना पड़ेगा? सड़क निर्माण और स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों के बावजूद यदि प्रसव पीड़ा में महिला को बारिश के बीच पैदल चलना पड़े तो दुर्गम क्षेत्रों में विकास की जमीनी हकीकत पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार को ऐसे दुर्गम क्षेत्रों में सड़क, स्वास्थ्य और आपातकालीन परिवहन की सुविधा को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि किसी गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा के दौरान इस तरह की परेशानी और जोखिम न उठाना पड़े।
अब सवाल यही है कि पहाड़ के उन गांवों तक सड़क कब पहुंचेगी, जहां आज भी मरीजों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचने के लिए पैदल पगडंडियों का सहारा लेना पड़ता है?