दबाव और समझौते के दौर में IFWJ का बड़ा फैसला: राजस्थान में श्रमजीवी पत्रकार शुरू करेंगे खुद का स्वतंत्र डिजिटल चैनल
जयपुर में जुटे प्रदेशभर के पत्रकार; साख संकट, सुरक्षा और जमीनी मुद्दों पर हुआ गंभीर मंथन, 28 अक्टूबर को मनेगा स्थापना दिवस
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जयपुर/राजस्थान :- लालबहादुर भाखर:- पत्रकारिता आज संक्रमण और संत्रास के एक बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रही है, जहां सत्ता का दबाव, कॉरपोरेट नियंत्रण और साथी पत्रकारों की चुप्पी एक बड़ा संकट बन चुकी है। इस दौर में पत्रकारिता की गिरती साख को बचाने और जमीनी संवाददाताओं को निर्भीक मंच देने के लिए इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) राजस्थान ने बड़ा कदम उठाया है। सी-स्कीम स्थित एसबीआई भवन के ऑडिटोरियम में आयोजित संगठन के प्रांतीय सम्मेलन में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि राजस्थान में श्रमजीवी पत्रकारों द्वारा संचालित एक स्वतंत्र और स्वायत्त डिजिटल चैनल शुरू किया जाएगा।
सम्मेलन में स्पष्ट संदेश दिया गया कि पत्रकारिता की साख किसी संस्थान या सत्ता से नहीं, बल्कि पत्रकार की निर्भीक कलम और जनसरोकार से तय होती है।
पत्रकार ही पत्रकार के साथ खड़ा नहीं: उपेन्द्र सिंह राठौड़
सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए IFWJ राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष उपेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा कि वर्तमान समय पत्रकारों के लिए भारी संत्रास का काल है। सत्ता और व्यवस्था के दबाव के बीच कब, किसे निशाना बना दिया जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। सबसे दुखद पहलू यह है कि संकट के समय पत्रकार अपने ही साथी के साथ खड़ा होने से कतराता है। इसी डर और दबाव को समाप्त करने तथा जमीनी सच को बेबाकी से जनता तक पहुंचाने के लिए संगठन ने स्वतंत्र डिजिटल चैनल शुरू करने का संकल्प लिया है।
'चर्चा, खर्चा और पर्चा' से खड़ा होगा आंदोलन: आचार्य संजय तिवारी
सम्मेलन के मुख्य अतिथि, उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार आचार्य संजय तिवारी ने चेलापति राव और के. विक्रम राव के संघर्षों को याद करते हुए कहा कि जब तक पत्रकार खुद आगे आकर शुरुआत नहीं करेंगे, तब तक बदलाव संभव नहीं है। उन्होंने समाजवादी नेता मुलायम सिंह के सूत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन को प्रभावी बनाए रखने के लिए ‘चर्चा, खर्चा और पर्चा’ तीनों को साधकर चलना होगा। तहसील और जिला स्तर का पत्रकार जब संगठित होकर लड़ेगा, तभी लोकतंत्र मजबूत होगा।
साख बचाना पहली जिम्मेदारी: पुरुषोत्तम पचौली व पशुपति शर्मा
चार दशक का अनुभव साझा करते हुए कोटा के वरिष्ठ पत्रकार पुरुषोत्तम पचौली ने चेताया कि यदि कलमकारों ने समझौतावादी रवैया नहीं छोड़ा तो इतिहास उन्हें कभी माफ नहीं करेगा। वहीं, प्रदेश उपाध्यक्ष पशुपति शर्मा ने कहा कि पत्रकार छोटा या बड़ा नहीं होता, उसकी रीढ़ और निष्पक्षता ही पहचान है। सहमति और समझौते की पत्रकारिता ने मीडिया को जनभावनाओं से दूर कर दिया है, जिसे केवल सच के रास्ते पर लौटकर ही सुधारा जा सकता है।
डिजिटल चैनल को मिला वरिष्ठों का संबल
लायन एक्सप्रेस (बीकानेर) से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार बृजमोहन रामावत ने डिजिटल पत्रकारिता के अपने अनुभव साझा करते हुए प्रस्तावित चैनल को तकनीकी व रणनीतिक मार्गदर्शन का भरोसा दिलाया। प्रदेश कार्यालय प्रभारी गणेश प्रजापति ने सभी जिला इकाइयों के बीच मजबूत समन्वय और सहकारिता स्थापित करने का विश्वास जताया।
प्रदेशभर के प्रतिनिधियों ने उठाई जमीनी पत्रकारों की मांगें
सम्मेलन में संगठन के वरिष्ठ सदस्यों और विभिन्न जिलों से आए प्रभारियों व अध्यक्षों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याएं रखीं। इनमें मुख्य रूप से शामिल रहे:
* वरिष्ठ सदस्य व संभाग प्रभारी: शंकर नागर, विष्णु दत्त शर्मा, कोटा संभाग प्रभारी शुभम जैन, जयपुर संभाग प्रभारी शालिनी श्रीवास्तव, सच बेधड़क के बीकानेर संभाग प्रभारी रवि विश्नोई, बीकानेर आज तक ब्यूरो कुलदीप चारण।
* जिलाध्यक्ष व प्रतिनिधि: शैलेश पांडेय (कोटा), राजेश शर्मा (सवाईमाधोपुर), प्रेम रघुवंशी (टोंक), लक्ष्मीचंद नागर (बारां), जुगल किशोर स्वामी (हनुमानगढ़), परमवीर सिंह दुलावत (उदयपुर), सुरेशचंद्र भाट (राजसमंद), करनाराम मांजू (बालोतरा), डीडी सारस्वत (करौली), महेन्द्र सिंह मुनाबाव (बाड़मेर), संदीप हुड्डा (सीकर), विकास पुनिया (झुंझुनूं)।
* प्रदेश समिति सदस्य: कुलदीप गुप्ता, निर्मला राव, अमृता मौर्य एवं नारायण मेघवाल।
जनसरोकार को समर्पित रहेगा डिजिटल चैनल
सम्मेलन के दूसरे सत्र में तय हुआ कि नया डिजिटल चैनल पूरी तरह श्रमजीवी पत्रकारों के हाथों में होगा। इसमें ग्रामीण समस्याएं, प्रशासनिक लापरवाहियां, सामाजिक कुरीतियां और हाशिए पर मौजूद तबकों की आवाज को प्रमुखता दी जाएगी। इसके साथ ही जिला व तहसील स्तर पर सक्रिय पत्रकारों के अधिकृत परिचय-पत्र, कानूनी सुरक्षा और आर्थिक स्थायित्व के लिए नीति बनाई जाएगी। संगठन का आगामी स्थापना दिवस 28 अक्टूबर को प्रदेश स्तर पर भव्य रूप में मनाया जाएगा।