श्मशान नहीं मिला तो सड़क किनारे जली चिता, बारिश के पानी में खड़े होकर निभानी पड़ी अंतिम रस्में
कोंच। किसी इंसान की जिंदगी का आखिरी पड़ाव भी अगर सम्मानजनक न हो, तो यह सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल है। कोंच तहसील के नदीगांव ब्लॉक के गिदवासा गांव में शुक्रवार को ऐसा ही मंजर सामने आया, जिसने ग्रामीण व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी।
गांव की 63 वर्षीय रामश्री के निधन के बाद परिजनों के सामने अंतिम संस्कार के लिए जगह तक नहीं थी। गांव में श्मशान की व्यवस्था न होने के कारण मजबूर होकर परिजनों और ग्रामीणों को कोंच-रावतपुरा मार्ग के किनारे पानी से भरे स्थान पर ही अंतिम संस्कार करना पड़ा।
बारिश के बीच ग्रामीण पानी में खड़े होकर अंतिम संस्कार की रस्में निभाते रहे। एक ओर अपनों को खोने का गम था, तो दूसरी ओर व्यवस्था की बेरुखी का दर्द। जिस वक्त परिवार को सहारे और संवेदना की जरूरत थी, उस वक्त उन्हें श्मशान की जगह सड़क का किनारा तलाशना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हालांकि उरई दर्शन इस वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में श्मशान की व्यवस्था को लेकर अधिकारियों से कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। श्मसान के न होने का मुख्य कारण क्षेत्र में चकबंदी न होना बताया जा रहा है। जिस कारण कुछ गांव श्मसान, खेल मैदान जैसी सुविधाओं से वंचित हैं।
आज एक वृद्धा की अंतिम यात्रा सड़क किनारे पूरी हुई है। कल फिर किसी परिवार को इसी पीड़ा से गुजरना पड़े, उससे पहले प्रशासन को जागना होगा। क्या किसी गांव को अपने मृतकों को अंतिम सम्मान देने के लिए भी सड़क किनारे जगह तलाशनी पड़ेगी?
गिदवासा की यह तस्वीर सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि उन दावों पर भी सवाल है जिनमें गांवों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही जाती है। अब जरूरत है कि प्रशासन मामले का संज्ञान लेकर स्थायी श्मशान स्थल की व्यवस्था करे, ताकि किसी परिवार को दोबारा ऐसी बेबसी न झेलनी पड़े।
#orai #jalaun #konch #kalpi #madhaugadh
Orai, Jalaun | Aug 8, 2026