लाइसेंस-वाहन ट्रांसफर के नाम कथित वसूली का आरोप, जनसेवा केंद्र संचालक ने मीडिया के सामने खोला ‘राज’
बाबू संदीप यादव, अनुपम दुबे और एक चालक पर गंभीर आरोप; कथित अतिरिक्त वसूली से इनकार के बाद मारपीट का दावा, ऑनलाइन बैंकिंग के स्क्रीनशॉट भी मीडिया को सौंपे
बलरामपुर। सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय के सामने संचालित एक जनसेवा केंद्र से जुड़ा कथित वसूली का मामला सामने आया है। मामले में खास बात यह है कि आरोप लगाने वाला व्यक्ति स्वयं उसी जनसेवा केंद्र का संचालक है। दुर्गा यादव का आरोप है कि परिवहन कार्यालय में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने, वाहन हस्तांतरण कराने तथा अन्य संबंधित कार्यों के लिए पहुंचने वाले आवेदकों को विभागीय बाबू संदीप यादव, अनुपम दुबे और एक चालक द्वारा उसके जनसेवा केंद्र पर भेजा जाता था।
शिकायतकर्ता के अनुसार, आवेदकों से कहा जाता था कि लाइसेंस, वाहन ट्रांसफर समेत अन्य कार्य वहीं से किए जाएंगे। आरोप है कि इसके बाद निर्धारित सरकारी शुल्क के अतिरिक्त कथित रूप से रकम ली जाती थी।
कथित वसूली में सहयोग से इनकार किया तो विवाद
दुर्गा यादव का दावा है कि जनसेवा केंद्र संचालक होने के कारण उसे इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी थी। जब उसने आवेदकों से कथित अतिरिक्त रकम वसूलने में सहयोग करने से इनकार किया तो विवाद बढ़ गया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने कथित वसूली की जानकारी सामने लाने का निर्णय लिया और इसी के बाद मामला मारपीट तक पहुंच गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
दो बाबुओं और एक चालक पर मारपीट का आरोप
दुर्गा यादव ने बाबू संदीप यादव, अनुपम दुबे और एक चालक पर मारपीट का आरोप लगाया है। उसके अनुसार कथित अतिरिक्त वसूली का विरोध करने के बाद महेशभारी चौराहे के पास उसके साथ मारपीट की गई।
शिकायतकर्ता ने घटना की सूचना पुलिस को दिए जाने की बात कही है। अब पुलिस जांच में मारपीट की घटना और उसके कारणों की पुष्टि होना बाकी है।
ऑनलाइन बैंकिंग के लेनदेन का ‘राज’, स्क्रीनशॉट मीडिया को सौंपे
मामले में जनसेवा केंद्र संचालक ने कथित ऑनलाइन बैंकिंग लेनदेन के स्क्रीनशॉट भी मीडिया को उपलब्ध कराए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, स्क्रीनशॉट में अलग-अलग किस्तों में 60 हजार, 30 हजार और 5 हजार रुपये के लेनदेन दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा अन्य मोबाइल नंबरों पर भी रकम भेजे जाने का दावा किया गया है।
हालांकि केवल स्क्रीनशॉट से यह स्वतः साबित नहीं होता कि रकम कथित वसूली के रूप में ही भेजी गई थी। इसकी पुष्टि के लिए बैंक के आधिकारिक रिकॉर्ड, रकम भेजने वालों के बयान और संबंधित परिवहन कार्यों के अभिलेखों का मिलान जरूरी होगा।
रकम न देने वाले आवेदकों को परेशान करने का भी आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जो आवेदक कथित अतिरिक्त रकम देने से इनकार करते थे, उन्हें बार-बार कार्यालय बुलाया जाता था और उनके काम में अड़चनें पैदा की जाती थीं। कुछ मामलों में लाइसेंस निरस्त किए जाने का भय दिखाकर दबाव बनाने का भी दावा किया गया है।
उसका कहना है कि लगातार कार्यालय के चक्कर लगाने से परेशान होकर कुछ आवेदक कथित तौर पर 5 हजार से 20 हजार रुपये तक खर्च करने को मजबूर होते थे। इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
जांच में इन सवालों के जवाब जरूरी
मामले की निष्पक्ष जांच में निम्न बिंदुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी—
- आवेदकों को जनसेवा केंद्र पर कौन भेजता था?
- क्या विभागीय कर्मचारी और चालक वास्तव में आवेदकों को वहां भेजते थे?
- लाइसेंस, वाहन हस्तांतरण और अन्य कार्यों के लिए निर्धारित शुल्क कितना था?
- क्या इसके अतिरिक्त कोई रकम मांगी या ली गई?
- ऑनलाइन बैंकिंग में दिख रही रकम किसके खाते में गई और किस उद्देश्य से भेजी गई?
- बैंक रिकॉर्ड और उपलब्ध स्क्रीनशॉट में क्या समानता है?
- संबंधित आवेदनों और भुगतान रिकॉर्ड में क्या जानकारी मिलती है?
- परिवहन कार्यालय और जनसेवा केंद्र की सीसीटीवी फुटेज में क्या सामने आता है?
- मारपीट की घटना के संबंध में प्रत्यक्षदर्शी और अन्य साक्ष्य क्या कहते हैं?
जांच एजेंसी के लिए बैंक रिकॉर्ड और सीसीटीवी अहम साक्ष्य
मामले में शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए ऑनलाइन बैंकिंग स्क्रीनशॉट के साथ यदि बैंक के मूल रिकॉर्ड, संबंधित आवेदकों के बयान, आवेदन संख्या, भुगतान रसीद और सीसीटीवी फुटेज का मिलान किया जाता है तो कथित लेनदेन की वास्तविक प्रकृति स्पष्ट हो सकती है।
यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका निर्धारित कर नियमानुसार कार्रवाई का आधार बन सकता है।
पुलिस जांच के बाद स्पष्ट होगी आरोपों की सच्चाई
फिलहाल कथित अवैध वसूली, जनसेवा केंद्र के माध्यम से रकम लिए जाने, ऑनलाइन बैंकिंग लेनदेन और मारपीट के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। मारपीट की सूचना पुलिस को दिए जाने की बात शिकायतकर्ता ने कही है और मामले की जांच की जा रही है।
जिन बाबू संदीप यादव, अनुपम दुबे और चालक पर आरोप लगाए गए हैं, उनका पक्ष अभी सामने नहीं आया है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी खबर में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।
अब जांच का मुख्य विषय यह है कि जनसेवा केंद्र संचालक द्वारा मीडिया को उपलब्ध कराए गए ऑनलाइन बैंकिंग स्क्रीनशॉट, बैंक रिकॉर्ड, आवेदकों के बयान, कार्यालय अभिलेख और सीसीटीवी फुटेज कथित वसूली एवं मारपीट के आरोपों की पुष्टि करते हैं या नहीं।