धारचूला में कुदरत का कहर या व्यवस्था की नाकामी? महज 7 दिन पहले तैयार हुआ कुलागाड़ का वैली ब्रिज उफनते नाले में एक बार फिर बह गया!
इस पुल के बहने से दारमा, व्यास और चौदास घाटी का संपर्क पूरी तरह कट चुका है, जिससे भारत-चीन सीमा की ओर जाने वाला महत्वपूर्ण मार्ग भी प्रभावित हो गया है। 19 अगस्त को पुल बहने के बाद भारी मशक्कत से 4 सितंबर को इसे शुरू किया गया था, लेकिन शुक्रवार को आए तेज उफान ने फिर सब कुछ तबाह कर दिया। राशन, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए सीमांत के ग्रामीण अब बेबस हैं।
सवाल यह उठता है कि क्या सामरिक दृष्टि से इतने संवेदनशील क्षेत्र में बार-बार अस्थायी इंतजाम ही काफी हैं? देखिए यह ग्राउंड रिपोर्ट और अपनी राय कमेंट्स में जरूर साझा करें।
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