पत्रकार प्रतीक कौशल की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट की रोक, जालौन पुलिस की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल
राज्यपाल सचिवालय तक पहुंची संयुक्त मजिस्ट्रेट की सुरक्षा की शिकायत, तत्कालीन कोतवाल आनंद कुमार सिंह की भूमिका पर भी सवाल; सूत्रों का दावा—एफआईआर के समय जिले की पुलिस कमान संभाल रहे अधिकारी की कार्यप्रणाली को लेकर शासन स्तर पर शिकायतें, जातिगत पक्षपात के आरोपों की भी चर्चा ?
जालौन। पत्रकार प्रतीक कौशल के खिलाफ दर्ज एफआईआर में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा गिरफ्तारी पर रोक लगाए जाने के बाद जालौन में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल और तीखे हो गए हैं। अदालत ने न केवल मामले को विचारणीय माना, बल्कि राज्य सरकार से जवाब तलब करते हुए अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। इस घटनाक्रम ने एफआईआर दर्ज कराने की परिस्थितियों और पुलिस कार्रवाई की निष्पक्षता को लेकर बहस तेज कर दी है।
उरई जालौन टाइम्स से जुड़े पत्रकार प्रतीक कौशल ने हाईकोर्ट में पक्ष रखते हुए कहा था उनके विद्धान वकील शिवबहादुर यादव ने कहा कि उन्होंने पत्रकारिता के पेशेवर दायित्व का निर्वहन करते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट प्रकाशित की थी और उनकी निष्पक्ष आलोचना को दबाने के उद्देश्य से एफआईआर दर्ज कराई गई। अदालत ने इस दलील को प्रथम दृष्टया विचारणीय माना और पुलिस को गिरफ्तारी से रोक दिया।
मामले में सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय का भी हवाला दिया गया, जिसमें अदालत ने प्रतिशोध अथवा दुर्भावना से प्रेरित एफआईआर की स्थिति में केवल प्राथमिकी के आरोपों तक सीमित न रहने, बल्कि पूरे मामले की परिस्थितियों और जांच सामग्री को देखने की आवश्यकता बताई थी।
इधर मामला केवल पत्रकार के खिलाफ दर्ज एफआईआर तक सीमित दिखाई नहीं दे रहा है। राज्यपाल सचिवालय, उत्तर प्रदेश से पुलिस महानिदेशक को भेजे गए पत्र ने जालौन पुलिस की कार्यप्रणाली से जुड़े एक और गंभीर प्रकरण को सामने ला दिया है। पत्र में जालौन के तत्कालीन संयुक्त मजिस्ट्रेट रिन्कू सिंह राही, आईएएस की ओर से अपनी सुरक्षा को लेकर जताई गई चिंता तथा थाना कोतवाली उरई में दी गई तहरीर कथित रूप से स्वीकार न किए जाने का उल्लेख है। और इससे पहले यही कोतवाल यह जवाब दिए थे कि कोतवाली उरई पुलिस सुरक्षा उपलब्ध नही कराती खैर यह आपको बतादे कि अग्निकाण्ड़ बर्ष 2020 माह मई केश डायरी 18 जनबरी सन 2021 के अग्रिम विवेचना
Orai, Jalaun | Oct 9, 2026