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आजीवन कारावास पाए पांचों दोषियों को हाईकोर्ट से जमानत

झांसी। सीपरी बाजार थाना क्षेत्र के अपराध संख्या 51/2023 से जुड़े हत्याकांड में अपर सत्र न्यायालय संख्या-2, झांसी से आजीवन कारावास की सजा पाए रामस्वरूप, मयंक श्रीवास, शरद कुमार, अवधेश कुमार एवं दीपक को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने की जानकारी सामने आई है।

केस संख्या 51/2023 | थाना सीपरी बाजार, झांसी | ट्रायल कोर्ट—अपर सत्र न्यायालय संख्या-2, झांसी | अपील संख्या 5715/2026 | हाईकोर्ट डबल बेंच—माननीय न्यायमूर्ति सिद्धार्थ एवं माननीय न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी

ट्रायल कोर्ट ने पांचों अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दाखिल की गई थी।

मामले में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता योगेश दत्ता मिश्रा एवं अधिवक्ता शिवांगी चतुर्वेदी ने पैरवी की। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद आवश्यक जमानती औपचारिकताएं पूरी होने पर पांचों की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
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**"आपकी सेवा, हमारा संकल्प"** — यह नारा सुनने में जितना बुलंद है, ज़मीनी हक़ीक़त उतनी ही कड़वी नज़र आती है।

सात साल... दो-दो जाँच... दोनों न्यायालय की कसौटी पर धराशायी... और आख़िरकार परिवाद दर्ज।

वाह! अगर यही "उत्कृष्ट विवेचना" है, तो नाकामी किसे कहेंगे?

इल्ज़ाम लगाना आसान है, मगर सबूत के साथ अदालत में टिकाना ही असली पुलिसिंग है। वरना बेगुनाह को मुल्ज़िम बना देना और फिर अदालत से फटकार खाना, क़ानून की नहीं बल्कि विवेचना की नाकामी कहलाती है।

**शांति, सुरक्षा और न्याय** नारों से नहीं, निष्पक्ष जाँच और जवाबदेही से स्थापित होते हैं।

क्योकि यह विश्व की। सर्वश्रेष्ठ यूपी पुलिस  की  शाखा जालौन पुलिस 

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<nis:link nis:type=tag nis:id=जालौन nis:value=जालौन nis:enabled=true nis:link/> इओरबिन्द्र कुमार
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जिस थाना प्रभारी की नाक नीचे मिश्रित गुटखा स्कूल सामने 10 मीटर दूरी बिक रहा हो 

वह निजी स्वार्थ संरक्षण दिए हो तो न्याय. ? 

प्राथमिक विद्यालय तुलसीनगर कम्पोजिट (पूर्व पांच विद्यालय थे जिसे गधा सकूल नाम से जाना जाता )

कई अबैध कार्यो का  ठेका लिए पुलिस ?
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पोस्ट तो बहाना असली खेल यह 

18 जनबरी 2021 पुन: अग्रिम विवेचना 
इसके बाद 4 अगस्त 2022 विवेचना किता की  सन्तोष दरोगा जी
29 जुलाई 2022 मे ट्रांसफर गोहन हुआ  3 को चार्ज ग्रहण कर लिया । 
अगले दिन एफआर लगा दी 
पूरी केश डायरी मे कटिंग है केश डायरी विभिन्न पेज ऐसे जिनमे कम्यूटर दिनांक सन 2022 की  विवेचक सिगनेचर 2021 के तथा इस्पेक्टर साहाब सिग्नेचर 2020 के जब आदेश ही नही हुआ था केश डायरी 3-4 सीडी अंतिम सादे कागज मे काटी गई और 2021 के बाद 2026 मे इन्ही साहाब के नेतृत्व न्यायालय मे दाखिल हुई ।  पूर्ण हुई विवेचना 11 दिन बाद नवन्तुक उपनिरीक्षक को‌मिली ।  अब न्यायालय किता करनर दो टियां दी 4 अगस्त 2022 तथा दूसरी 13-15 जनबरी 2023 तो उसमे पैरवी न करे इस वजह कुच्रक रचा गया लेकिन अब लिपिक महोदय पांच साल दबाये रहे और अभियोजन राय लेना मुनासिब नही समझा वह जवाब देना पड़ेगा ।

इसके अतिरिक्त अग्निकाण्ड़ घटना के पूर्व दो माह पहले पुलिस आग लगाने की  सूचना 2020 दी थी उसके दो माह बाद आग लगा दी गई ठीक उसी दिन जिस दुकान खुली ।
और आपत्ति‌जनक चीजे जो मिली थी वह दरोगा जी पहले सबूत नष्ट कर दिये।  अगर समय रहते कार्यवाही‌हो जाती तो शायद कुछ बेहतर होता लेकिन दाम करे सब काम‌ 

इस लिए किसी को सुरक्षा थ्रेट है तो भाई अपनी बात रख दी इसमे कोन सी धार्मिक भावनाएं आहत हुई
जो मेडीकल के आगे विवेकानन्द कलौनी मे हुआ था यही इस्पेक्टर साहाब मुकदमा न लिखे । 

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असली दिक्कत यह आदेश और सवाल करना कि पुन: अग्रिम विवेचना आदेश दिनांक 18.01.2021 से 5 बर्षो से कहां रखे रहे और अब सवाल आरटीआई लगाई तो खुन्नस मान गये लाखो रूपये नुकसान हुआ । अभी विवेचको सहित किसी शिकायत भी नही की  थी। मुकदमा न लिखवाते तो कम से कम राजस्व से छति पूर्ति मिल जाती ।

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राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर पांच प्री-ट्रायल बैठकें तय
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उरई। आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत 12 सितंबर 2026 की सफलता के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन के निर्देश पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जालौन स्थान उरई न्यायालय द्वारा पांच प्री-ट्रायल बैठकें आयोजित किए जाने का आदेश जारी किया गया है।

न्यायालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक मामलों के निस्तारण तथा पक्षकारों की सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संबंधित मामलों के पक्षकारों को निर्धारित तिथियों पर न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने के लिए निर्देशित किया गया है।

निर्धारित कार्यक्रम के तहत 12 अगस्त, 17 अगस्त, 25 अगस्त, 31 अगस्त तथा 5 सितंबर 2026 को प्री-ट्रायल बैठकें आयोजित होंगी। आदेश में कहा गया है कि संबंधित मामलों के पक्षकार दोपहर 2 बजे से 2:30 बजे के मध्य न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर प्री-ट्रायल बैठक में सहभागिता कर सकते हैं।

न्यायालय ने शमनीय अपराधों से संबंधित मामलों में पक्षकारों की उपस्थिति और आपसी सुलह-समझौते की संभावनाओं को बढ़ावा देने के लिए यह पहल की है। राष्ट्रीय लोक अदालत में मामलों के त्वरित एवं सुलहपूर्ण निस्तारण के लिए प्री-ट्रायल बैठकों को महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।

आदेश की प्रतिलिपि जनपद न्यायाधीश, जालौन स्थान उरई, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तथा बार संघ जालौन स्थान उरई को आवश्यक सूचना एवं अनुपालन के लिए भेजी गई है।
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