पड़ौरी गौशाला में मौत का मातम, जिम्मेदारों की संवेदनाएं भी हुईं मृत?
गौशाला में गायें मर रहीं, जिम्मेदार एसी में बैठकर आदेशों की फाइलें पलट रहे हैं!
बेजुबानों की आह जब आसमान तक पहुंची, तब जाकर जिम्मेदारों की गाड़ियां गौशाला तक पहुंचीं...
उरई मुख्यालय से सटीक सटे ग्राम पंचायत पड़ौरी की गौशाला एक बार फिर सवालों के घेरे में है।
यहां दर्जनों गाय बीमार पड़ी हैं और कई गायों के मृत मिलने की खबर ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया।
सूचना आग की तरह फैली तो आनन-फानन में सीवीओ, अपर मुख्य पशु चिकित्सक, सचिव, प्रधान और अन्य जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंच गए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब गायें लगातार बीमार हो रही थीं, तब जिम्मेदार कहां थे?
गौशाला के केयरटेकर का कहना है कि कल तक गायें ठीक थीं, लेकिन अचानक उनकी हालत बिगड़ गई।
वहीं मौके पर जो तस्वीरें दिखाई दीं, उन्होंने सरकारी दावों की पोल खोल दी। सफाई व्यवस्था बदहाल, तीन शेड के नीचे दर्जनों गायों को ठूंसकर रखा गया, हरे चारे का अभाव और भीषण गर्मी में पशुओं के लिए पर्याप्त व्यवस्था तक नहीं मिली।
सवालों के घेरे में प्रधान और सचिव
जिलाधिकारी लगातार बैठकों में गौशालाओं में साफ-सफाई, हरा चारा, स्वच्छ पानी, पंखे और कूलर जैसी व्यवस्थाओं के निर्देश देते हैं।
लेकिन पड़ौरी गौशाला में इन आदेशों की खुली धज्जियां उड़ती नजर आईं।
45 डिग्री तापमान में जहां इंसान एसी और कूलर के बिना नहीं रह पा रहा, वहीं बेजुबान गायें टीन शेड के नीचे तपने को मजबूर हैं।
घंटों एसी की ठंडी हवा खाने वाले जिम्मेदार क्या कभी इन बेजुबानों की पीड़ा समझ पाएंगे?
पूड़ी खाने से बीमार हुईं गायें या कुछ और है राज?
स्थानीय लोगों ने दावा किया कि किसी भंडारे से लाई गई पूड़ियां खाने के कारण गायें बीमार हुई हैं।
लेकिन मौके पर न तो गौशाला के अंदर और न ही बाहर कहीं पूड़ियां दिखाई दीं।
ऐसे में यह तर्क भी सवालों के घेरे में है।
गायों की हालत देखकर साफ लगता है कि उनके शरीर पर मांस कम और हड्डियां ज्यादा नजर आ रही हैं।
आखिर पोषण के नाम पर आने वाला पैसा कहां जा रहा है?
सबसे बड़े सवाल
● जब गायें बीमार थीं तो समय रहते इलाज क्यों नहीं हुआ?
● गौशाला में दर्ज 45 गायों के मुकाबले मौके पर केवल 30-32 गायें ही क्यों मिलीं?
● बाकी गायें कहां गईं?
● हरे चारे और पोषण की व्यवस्था कहां है?
● लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद गायों की हालत कुपोषित क्यों है?
● क्या गौशालाएं सिर्फ कागजों पर संचालित हो रही हैं?
● क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या मामला जांच के नाम पर दब जाएगा?
गायों के नाम पर बजट पूरा, लेकिन गायों के पेट खाली; जिम्मेदारों के कमरे ठंडे, मगर गौशाला में मौत की गर्मी जारी...
जिले की अन्य गौशालाओं में भी लगातार अनियमितताओं की तस्वीरें सामने आती रही हैं।
सवाल यह है कि आखिर कब तक बेजुबान पशु भ्रष्ट व्यवस्था की कीमत चुकाते रहेंगे?
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में केवल फटकार तक सीमित रहता है या वास्तव में जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी होती है।
आपकी क्या राय है?
क्या गौशालाओं की बदहाली के लिए सीधे जिम्मेदार अधिकारियों, प्रधान और सचिव पर कार्रवाई होनी चाहिए?
अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।
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Jalaun, Jalaun | Jun 27, 2026