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साइबर अपराध से बचाव ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच समनापुर थाना प्रभारी ने नागरिकों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करते हुए ऑनलाइन ठगी, फर्जी लिंक, ओटीपी शेयर करने और डिजिटल फ्रॉड से बचने के महत्वपूर्ण उपाय बताए। आमजन से अपील की गई कि किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या लिंक पर भरोसा न करें और साइबर अपराध होने पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। #Halchal24News #Samnapur #Dindori #CyberSafety #CyberAwareness #CyberFraud #OnlineSafety #MadhyaPradesh #साइबरसुरक्षा #साइबरफ्रॉड #डिंडौरी #समनापुर Part 6

Dindori, Dindori | Jul 2, 2026

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मंडला में ऑक्सीजन खत्म होने से गई युवक की जान? एंबुलेंस सेवा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

परिजनों का आरोप—ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस देर से पहुंची, रास्ते में सिलेंडर हुआ खाली; स्वास्थ्य मंत्री सम्पतिया उइके ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का दिया भरोसा

मध्यप्रदेश के मंडला जिले में एक 21 वर्षीय युवक की मौत के बाद सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि समय पर ऑक्सीजन उपलब्ध न होने और एंबुलेंस सेवा में गंभीर लापरवाही के कारण युवक की जान चली गई। मामले ने जिले की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और ऑक्सीजन प्रबंधन पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

मंडला जिले के सुनहरामाल गांव निवासी अजीत बरया (21) लंबे समय से किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित था और जिला अस्पताल में नियमित डायलिसिस करा रहा था। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कई बार बेहतर इलाज और डायलिसिस का समय बदलने की मांग की थी, लेकिन उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया।

परिजनों के आरोप गंभीर

परिवार का आरोप है कि युवक की तबीयत बिगड़ने पर 108 एंबुलेंस को सूचना दी गई, लेकिन ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस करीब एक घंटे बाद मौके पर पहुंची। उनका कहना है कि एंबुलेंस स्टाफ ने डॉक्टर की अनुमति का हवाला देकर तत्काल ऑक्सीजन नहीं लगाई। बाद में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बम्हनी में चिकित्सक के निर्देश पर ऑक्सीजन शुरू की गई, लेकिन जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही एंबुलेंस का ऑक्सीजन सिलेंडर खाली हो गया। इसके बाद युवक ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

मृतक के पिता का कहना है कि यदि उन्हें पहले ही ऑक्सीजन की कमी की जानकारी दे दी जाती, तो वे स्वयं सिलेंडर की व्यवस्था कर लेते। उनका आरोप है कि सिस्टम की लापरवाही ने उनके बेटे की जान ले ली।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

यदि परिजनों के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो कई गंभीर सवाल सामने आते हैं। क्या ऑक्सीजन सिलेंडर की जांच किए बिना एंबुलेंस रवाना की गई? क्या बैकअप सिलेंडर उपलब्ध नहीं था? क्या गंभीर मरीज को तत्काल प्राथमिक उपचार देने में लापरवाही बरती गई? ये ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

मंत्री ने दिए जांच के निर्देश

यह मामला इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि मंडला प्रदेश की स्वास्थ्य एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सम्पतिया उइके का गृह जिला है। मंत्री ने मामले की पारदर्शी जांच कराने और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

जांच के बाद ही होगी स्थिति स्पष्ट

फिलहाल मृतक के परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग और 108 एंबुलेंस सेवा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की निष्पक्ष जांच जारी है और आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत केवल बीमारी के कारण हुई या स्वास्थ्य सेवाओं में किसी प्रकार की लापरवाही भी जिम्मेदार थी।

#Mandla #BreakingNews #HealthSystem #Ambulance #Oxygen #MPNews #MadhyaPradesh #Healthcare #JusticeForAjit #MedicalNegligence #108Ambulance #HindiNews #ViralNews #LatestNews #JansamparkDigital #halchal24news #breakingnews  #madhyapradesh #mpnews #dindorinews #viralnews #viralvideo #highlights Part 20

मंडला में ऑक्सीजन खत्म होने से गई युवक की जान? एंबुलेंस सेवा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल परिजनों का आरोप—ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस देर से पहुंची, रास्ते में सिलेंडर हुआ खाली; स्वास्थ्य मंत्री सम्पतिया उइके ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का दिया भरोसा मध्यप्रदेश के मंडला जिले में एक 21 वर्षीय युवक की मौत के बाद सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि समय पर ऑक्सीजन उपलब्ध न होने और एंबुलेंस सेवा में गंभीर लापरवाही के कारण युवक की जान चली गई। मामले ने जिले की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और ऑक्सीजन प्रबंधन पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। मंडला जिले के सुनहरामाल गांव निवासी अजीत बरया (21) लंबे समय से किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित था और जिला अस्पताल में नियमित डायलिसिस करा रहा था। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कई बार बेहतर इलाज और डायलिसिस का समय बदलने की मांग की थी, लेकिन उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया। परिजनों के आरोप गंभीर परिवार का आरोप है कि युवक की तबीयत बिगड़ने पर 108 एंबुलेंस को सूचना दी गई, लेकिन ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस करीब एक घंटे बाद मौके पर पहुंची। उनका कहना है कि एंबुलेंस स्टाफ ने डॉक्टर की अनुमति का हवाला देकर तत्काल ऑक्सीजन नहीं लगाई। बाद में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बम्हनी में चिकित्सक के निर्देश पर ऑक्सीजन शुरू की गई, लेकिन जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही एंबुलेंस का ऑक्सीजन सिलेंडर खाली हो गया। इसके बाद युवक ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। मृतक के पिता का कहना है कि यदि उन्हें पहले ही ऑक्सीजन की कमी की जानकारी दे दी जाती, तो वे स्वयं सिलेंडर की व्यवस्था कर लेते। उनका आरोप है कि सिस्टम की लापरवाही ने उनके बेटे की जान ले ली। स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल यदि परिजनों के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो कई गंभीर सवाल सामने आते हैं। क्या ऑक्सीजन सिलेंडर की जांच किए बिना एंबुलेंस रवाना की गई? क्या बैकअप सिलेंडर उपलब्ध नहीं था? क्या गंभीर मरीज को तत्काल प्राथमिक उपचार देने में लापरवाही बरती गई? ये ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। मंत्री ने दिए जांच के निर्देश यह मामला इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि मंडला प्रदेश की स्वास्थ्य एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सम्पतिया उइके का गृह जिला है। मंत्री ने मामले की पारदर्शी जांच कराने और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है। जांच के बाद ही होगी स्थिति स्पष्ट फिलहाल मृतक के परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग और 108 एंबुलेंस सेवा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की निष्पक्ष जांच जारी है और आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत केवल बीमारी के कारण हुई या स्वास्थ्य सेवाओं में किसी प्रकार की लापरवाही भी जिम्मेदार थी। #Mandla #BreakingNews #HealthSystem #Ambulance #Oxygen #MPNews #MadhyaPradesh #Healthcare #JusticeForAjit #MedicalNegligence #108Ambulance #HindiNews #ViralNews #LatestNews #JansamparkDigital #halchal24news #breakingnews #madhyapradesh #mpnews #dindorinews #viralnews #viralvideo #highlights Part 20

Dindori, Dindori | Aug 1, 2026

मंडला में ऑक्सीजन खत्म होने से गई युवक की जान? एंबुलेंस सेवा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

परिजनों का आरोप—ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस देर से पहुंची, रास्ते में सिलेंडर हुआ खाली; स्वास्थ्य मंत्री सम्पतिया उइके ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का दिया भरोसा

मध्यप्रदेश के मंडला जिले में एक 21 वर्षीय युवक की मौत के बाद सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि समय पर ऑक्सीजन उपलब्ध न होने और एंबुलेंस सेवा में गंभीर लापरवाही के कारण युवक की जान चली गई। मामले ने जिले की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और ऑक्सीजन प्रबंधन पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

मंडला जिले के सुनहरामाल गांव निवासी अजीत बरया (21) लंबे समय से किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित था और जिला अस्पताल में नियमित डायलिसिस करा रहा था। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कई बार बेहतर इलाज और डायलिसिस का समय बदलने की मांग की थी, लेकिन उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया।

परिजनों के आरोप गंभीर

परिवार का आरोप है कि युवक की तबीयत बिगड़ने पर 108 एंबुलेंस को सूचना दी गई, लेकिन ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस करीब एक घंटे बाद मौके पर पहुंची। उनका कहना है कि एंबुलेंस स्टाफ ने डॉक्टर की अनुमति का हवाला देकर तत्काल ऑक्सीजन नहीं लगाई। बाद में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बम्हनी में चिकित्सक के निर्देश पर ऑक्सीजन शुरू की गई, लेकिन जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही एंबुलेंस का ऑक्सीजन सिलेंडर खाली हो गया। इसके बाद युवक ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

मृतक के पिता का कहना है कि यदि उन्हें पहले ही ऑक्सीजन की कमी की जानकारी दे दी जाती, तो वे स्वयं सिलेंडर की व्यवस्था कर लेते। उनका आरोप है कि सिस्टम की लापरवाही ने उनके बेटे की जान ले ली।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

यदि परिजनों के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो कई गंभीर सवाल सामने आते हैं। क्या ऑक्सीजन सिलेंडर की जांच किए बिना एंबुलेंस रवाना की गई? क्या बैकअप सिलेंडर उपलब्ध नहीं था? क्या गंभीर मरीज को तत्काल प्राथमिक उपचार देने में लापरवाही बरती गई? ये ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

मंत्री ने दिए जांच के निर्देश

यह मामला इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि मंडला प्रदेश की स्वास्थ्य एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सम्पतिया उइके का गृह जिला है। मंत्री ने मामले की पारदर्शी जांच कराने और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

जांच के बाद ही होगी स्थिति स्पष्ट

फिलहाल मृतक के परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग और 108 एंबुलेंस सेवा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की निष्पक्ष जांच जारी है और आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत केवल बीमारी के कारण हुई या स्वास्थ्य सेवाओं में किसी प्रकार की लापरवाही भी जिम्मेदार थी।

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मंडला में ऑक्सीजन खत्म होने से गई युवक की जान? एंबुलेंस सेवा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल परिजनों का आरोप—ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस देर से पहुंची, रास्ते में सिलेंडर हुआ खाली; स्वास्थ्य मंत्री सम्पतिया उइके ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का दिया भरोसा मध्यप्रदेश के मंडला जिले में एक 21 वर्षीय युवक की मौत के बाद सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि समय पर ऑक्सीजन उपलब्ध न होने और एंबुलेंस सेवा में गंभीर लापरवाही के कारण युवक की जान चली गई। मामले ने जिले की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और ऑक्सीजन प्रबंधन पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। मंडला जिले के सुनहरामाल गांव निवासी अजीत बरया (21) लंबे समय से किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित था और जिला अस्पताल में नियमित डायलिसिस करा रहा था। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कई बार बेहतर इलाज और डायलिसिस का समय बदलने की मांग की थी, लेकिन उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया। परिजनों के आरोप गंभीर परिवार का आरोप है कि युवक की तबीयत बिगड़ने पर 108 एंबुलेंस को सूचना दी गई, लेकिन ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस करीब एक घंटे बाद मौके पर पहुंची। उनका कहना है कि एंबुलेंस स्टाफ ने डॉक्टर की अनुमति का हवाला देकर तत्काल ऑक्सीजन नहीं लगाई। बाद में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बम्हनी में चिकित्सक के निर्देश पर ऑक्सीजन शुरू की गई, लेकिन जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही एंबुलेंस का ऑक्सीजन सिलेंडर खाली हो गया। इसके बाद युवक ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। मृतक के पिता का कहना है कि यदि उन्हें पहले ही ऑक्सीजन की कमी की जानकारी दे दी जाती, तो वे स्वयं सिलेंडर की व्यवस्था कर लेते। उनका आरोप है कि सिस्टम की लापरवाही ने उनके बेटे की जान ले ली। स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल यदि परिजनों के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो कई गंभीर सवाल सामने आते हैं। क्या ऑक्सीजन सिलेंडर की जांच किए बिना एंबुलेंस रवाना की गई? क्या बैकअप सिलेंडर उपलब्ध नहीं था? क्या गंभीर मरीज को तत्काल प्राथमिक उपचार देने में लापरवाही बरती गई? ये ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। मंत्री ने दिए जांच के निर्देश यह मामला इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि मंडला प्रदेश की स्वास्थ्य एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सम्पतिया उइके का गृह जिला है। मंत्री ने मामले की पारदर्शी जांच कराने और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है। जांच के बाद ही होगी स्थिति स्पष्ट फिलहाल मृतक के परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग और 108 एंबुलेंस सेवा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की निष्पक्ष जांच जारी है और आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत केवल बीमारी के कारण हुई या स्वास्थ्य सेवाओं में किसी प्रकार की लापरवाही भी जिम्मेदार थी। #Mandla #BreakingNews #HealthSystem #Ambulance #Oxygen #MPNews #MadhyaPradesh #Healthcare #JusticeForAjit #MedicalNegligence #108Ambulance #HindiNews #ViralNews #LatestNews #JansamparkDigital #halchal24news #breakingnews #madhyapradesh #mpnews #dindorinews #viralnews #viralvideo #highlights Part 19

Dindori, Dindori | Aug 1, 2026

मंडला में ऑक्सीजन खत्म होने से गई युवक की जान? एंबुलेंस सेवा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

परिजनों का आरोप—ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस देर से पहुंची, रास्ते में सिलेंडर हुआ खाली; स्वास्थ्य मंत्री सम्पतिया उइके ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का दिया भरोसा

मध्यप्रदेश के मंडला जिले में एक 21 वर्षीय युवक की मौत के बाद सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि समय पर ऑक्सीजन उपलब्ध न होने और एंबुलेंस सेवा में गंभीर लापरवाही के कारण युवक की जान चली गई। मामले ने जिले की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और ऑक्सीजन प्रबंधन पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

मंडला जिले के सुनहरामाल गांव निवासी अजीत बरया (21) लंबे समय से किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित था और जिला अस्पताल में नियमित डायलिसिस करा रहा था। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कई बार बेहतर इलाज और डायलिसिस का समय बदलने की मांग की थी, लेकिन उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया।

परिजनों के आरोप गंभीर

परिवार का आरोप है कि युवक की तबीयत बिगड़ने पर 108 एंबुलेंस को सूचना दी गई, लेकिन ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस करीब एक घंटे बाद मौके पर पहुंची। उनका कहना है कि एंबुलेंस स्टाफ ने डॉक्टर की अनुमति का हवाला देकर तत्काल ऑक्सीजन नहीं लगाई। बाद में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बम्हनी में चिकित्सक के निर्देश पर ऑक्सीजन शुरू की गई, लेकिन जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही एंबुलेंस का ऑक्सीजन सिलेंडर खाली हो गया। इसके बाद युवक ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

मृतक के पिता का कहना है कि यदि उन्हें पहले ही ऑक्सीजन की कमी की जानकारी दे दी जाती, तो वे स्वयं सिलेंडर की व्यवस्था कर लेते। उनका आरोप है कि सिस्टम की लापरवाही ने उनके बेटे की जान ले ली।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

यदि परिजनों के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो कई गंभीर सवाल सामने आते हैं। क्या ऑक्सीजन सिलेंडर की जांच किए बिना एंबुलेंस रवाना की गई? क्या बैकअप सिलेंडर उपलब्ध नहीं था? क्या गंभीर मरीज को तत्काल प्राथमिक उपचार देने में लापरवाही बरती गई? ये ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

मंत्री ने दिए जांच के निर्देश

यह मामला इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि मंडला प्रदेश की स्वास्थ्य एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सम्पतिया उइके का गृह जिला है। मंत्री ने मामले की पारदर्शी जांच कराने और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

जांच के बाद ही होगी स्थिति स्पष्ट

फिलहाल मृतक के परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग और 108 एंबुलेंस सेवा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की निष्पक्ष जांच जारी है और आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत केवल बीमारी के कारण हुई या स्वास्थ्य सेवाओं में किसी प्रकार की लापरवाही भी जिम्मेदार थी।

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मंडला में ऑक्सीजन खत्म होने से गई युवक की जान? एंबुलेंस सेवा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल परिजनों का आरोप—ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस देर से पहुंची, रास्ते में सिलेंडर हुआ खाली; स्वास्थ्य मंत्री सम्पतिया उइके ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का दिया भरोसा मध्यप्रदेश के मंडला जिले में एक 21 वर्षीय युवक की मौत के बाद सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि समय पर ऑक्सीजन उपलब्ध न होने और एंबुलेंस सेवा में गंभीर लापरवाही के कारण युवक की जान चली गई। मामले ने जिले की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और ऑक्सीजन प्रबंधन पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। मंडला जिले के सुनहरामाल गांव निवासी अजीत बरया (21) लंबे समय से किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित था और जिला अस्पताल में नियमित डायलिसिस करा रहा था। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कई बार बेहतर इलाज और डायलिसिस का समय बदलने की मांग की थी, लेकिन उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया। परिजनों के आरोप गंभीर परिवार का आरोप है कि युवक की तबीयत बिगड़ने पर 108 एंबुलेंस को सूचना दी गई, लेकिन ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस करीब एक घंटे बाद मौके पर पहुंची। उनका कहना है कि एंबुलेंस स्टाफ ने डॉक्टर की अनुमति का हवाला देकर तत्काल ऑक्सीजन नहीं लगाई। बाद में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बम्हनी में चिकित्सक के निर्देश पर ऑक्सीजन शुरू की गई, लेकिन जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही एंबुलेंस का ऑक्सीजन सिलेंडर खाली हो गया। इसके बाद युवक ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। मृतक के पिता का कहना है कि यदि उन्हें पहले ही ऑक्सीजन की कमी की जानकारी दे दी जाती, तो वे स्वयं सिलेंडर की व्यवस्था कर लेते। उनका आरोप है कि सिस्टम की लापरवाही ने उनके बेटे की जान ले ली। स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल यदि परिजनों के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो कई गंभीर सवाल सामने आते हैं। क्या ऑक्सीजन सिलेंडर की जांच किए बिना एंबुलेंस रवाना की गई? क्या बैकअप सिलेंडर उपलब्ध नहीं था? क्या गंभीर मरीज को तत्काल प्राथमिक उपचार देने में लापरवाही बरती गई? ये ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। मंत्री ने दिए जांच के निर्देश यह मामला इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि मंडला प्रदेश की स्वास्थ्य एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सम्पतिया उइके का गृह जिला है। मंत्री ने मामले की पारदर्शी जांच कराने और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है। जांच के बाद ही होगी स्थिति स्पष्ट फिलहाल मृतक के परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग और 108 एंबुलेंस सेवा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की निष्पक्ष जांच जारी है और आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत केवल बीमारी के कारण हुई या स्वास्थ्य सेवाओं में किसी प्रकार की लापरवाही भी जिम्मेदार थी। #Mandla #BreakingNews #HealthSystem #Ambulance #Oxygen #MPNews #MadhyaPradesh #Healthcare #JusticeForAjit #MedicalNegligence #108Ambulance #HindiNews #ViralNews #LatestNews #JansamparkDigital #halchal24news #breakingnews #madhyapradesh #mpnews #dindorinews #viralnews #viralvideo #highlights Part 24

Dindori, Dindori | Aug 1, 2026

मंडला में ऑक्सीजन खत्म होने से गई युवक की जान? एंबुलेंस सेवा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

परिजनों का आरोप—ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस देर से पहुंची, रास्ते में सिलेंडर हुआ खाली; स्वास्थ्य मंत्री सम्पतिया उइके ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का दिया भरोसा

मध्यप्रदेश के मंडला जिले में एक 21 वर्षीय युवक की मौत के बाद सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि समय पर ऑक्सीजन उपलब्ध न होने और एंबुलेंस सेवा में गंभीर लापरवाही के कारण युवक की जान चली गई। मामले ने जिले की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और ऑक्सीजन प्रबंधन पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

मंडला जिले के सुनहरामाल गांव निवासी अजीत बरया (21) लंबे समय से किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित था और जिला अस्पताल में नियमित डायलिसिस करा रहा था। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कई बार बेहतर इलाज और डायलिसिस का समय बदलने की मांग की थी, लेकिन उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया।

परिजनों के आरोप गंभीर

परिवार का आरोप है कि युवक की तबीयत बिगड़ने पर 108 एंबुलेंस को सूचना दी गई, लेकिन ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस करीब एक घंटे बाद मौके पर पहुंची। उनका कहना है कि एंबुलेंस स्टाफ ने डॉक्टर की अनुमति का हवाला देकर तत्काल ऑक्सीजन नहीं लगाई। बाद में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बम्हनी में चिकित्सक के निर्देश पर ऑक्सीजन शुरू की गई, लेकिन जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही एंबुलेंस का ऑक्सीजन सिलेंडर खाली हो गया। इसके बाद युवक ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

मृतक के पिता का कहना है कि यदि उन्हें पहले ही ऑक्सीजन की कमी की जानकारी दे दी जाती, तो वे स्वयं सिलेंडर की व्यवस्था कर लेते। उनका आरोप है कि सिस्टम की लापरवाही ने उनके बेटे की जान ले ली।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

यदि परिजनों के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो कई गंभीर सवाल सामने आते हैं। क्या ऑक्सीजन सिलेंडर की जांच किए बिना एंबुलेंस रवाना की गई? क्या बैकअप सिलेंडर उपलब्ध नहीं था? क्या गंभीर मरीज को तत्काल प्राथमिक उपचार देने में लापरवाही बरती गई? ये ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

मंत्री ने दिए जांच के निर्देश

यह मामला इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि मंडला प्रदेश की स्वास्थ्य एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सम्पतिया उइके का गृह जिला है। मंत्री ने मामले की पारदर्शी जांच कराने और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

जांच के बाद ही होगी स्थिति स्पष्ट

फिलहाल मृतक के परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग और 108 एंबुलेंस सेवा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की निष्पक्ष जांच जारी है और आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत केवल बीमारी के कारण हुई या स्वास्थ्य सेवाओं में किसी प्रकार की लापरवाही भी जिम्मेदार थी।

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मंडला में ऑक्सीजन खत्म होने से गई युवक की जान? एंबुलेंस सेवा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल परिजनों का आरोप—ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस देर से पहुंची, रास्ते में सिलेंडर हुआ खाली; स्वास्थ्य मंत्री सम्पतिया उइके ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का दिया भरोसा मध्यप्रदेश के मंडला जिले में एक 21 वर्षीय युवक की मौत के बाद सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि समय पर ऑक्सीजन उपलब्ध न होने और एंबुलेंस सेवा में गंभीर लापरवाही के कारण युवक की जान चली गई। मामले ने जिले की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और ऑक्सीजन प्रबंधन पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। मंडला जिले के सुनहरामाल गांव निवासी अजीत बरया (21) लंबे समय से किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित था और जिला अस्पताल में नियमित डायलिसिस करा रहा था। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कई बार बेहतर इलाज और डायलिसिस का समय बदलने की मांग की थी, लेकिन उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया। परिजनों के आरोप गंभीर परिवार का आरोप है कि युवक की तबीयत बिगड़ने पर 108 एंबुलेंस को सूचना दी गई, लेकिन ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस करीब एक घंटे बाद मौके पर पहुंची। उनका कहना है कि एंबुलेंस स्टाफ ने डॉक्टर की अनुमति का हवाला देकर तत्काल ऑक्सीजन नहीं लगाई। बाद में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बम्हनी में चिकित्सक के निर्देश पर ऑक्सीजन शुरू की गई, लेकिन जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही एंबुलेंस का ऑक्सीजन सिलेंडर खाली हो गया। इसके बाद युवक ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। मृतक के पिता का कहना है कि यदि उन्हें पहले ही ऑक्सीजन की कमी की जानकारी दे दी जाती, तो वे स्वयं सिलेंडर की व्यवस्था कर लेते। उनका आरोप है कि सिस्टम की लापरवाही ने उनके बेटे की जान ले ली। स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल यदि परिजनों के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो कई गंभीर सवाल सामने आते हैं। क्या ऑक्सीजन सिलेंडर की जांच किए बिना एंबुलेंस रवाना की गई? क्या बैकअप सिलेंडर उपलब्ध नहीं था? क्या गंभीर मरीज को तत्काल प्राथमिक उपचार देने में लापरवाही बरती गई? ये ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। मंत्री ने दिए जांच के निर्देश यह मामला इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि मंडला प्रदेश की स्वास्थ्य एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सम्पतिया उइके का गृह जिला है। मंत्री ने मामले की पारदर्शी जांच कराने और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है। जांच के बाद ही होगी स्थिति स्पष्ट फिलहाल मृतक के परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग और 108 एंबुलेंस सेवा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की निष्पक्ष जांच जारी है और आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत केवल बीमारी के कारण हुई या स्वास्थ्य सेवाओं में किसी प्रकार की लापरवाही भी जिम्मेदार थी। #Mandla #BreakingNews #HealthSystem #Ambulance #Oxygen #MPNews #MadhyaPradesh #Healthcare #JusticeForAjit #MedicalNegligence #108Ambulance #HindiNews #ViralNews #LatestNews #JansamparkDigital #halchal24news #breakingnews #madhyapradesh #mpnews #dindorinews #viralnews #viralvideo #highlights Part 16

Dindori, Dindori | Aug 1, 2026

मंडला में ऑक्सीजन खत्म होने से गई युवक की जान? एंबुलेंस सेवा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

परिजनों का आरोप—ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस देर से पहुंची, रास्ते में सिलेंडर हुआ खाली; स्वास्थ्य मंत्री सम्पतिया उइके ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का दिया भरोसा

मध्यप्रदेश के मंडला जिले में एक 21 वर्षीय युवक की मौत के बाद सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि समय पर ऑक्सीजन उपलब्ध न होने और एंबुलेंस सेवा में गंभीर लापरवाही के कारण युवक की जान चली गई। मामले ने जिले की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और ऑक्सीजन प्रबंधन पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

मंडला जिले के सुनहरामाल गांव निवासी अजीत बरया (21) लंबे समय से किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित था और जिला अस्पताल में नियमित डायलिसिस करा रहा था। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कई बार बेहतर इलाज और डायलिसिस का समय बदलने की मांग की थी, लेकिन उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया।

परिजनों के आरोप गंभीर

परिवार का आरोप है कि युवक की तबीयत बिगड़ने पर 108 एंबुलेंस को सूचना दी गई, लेकिन ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस करीब एक घंटे बाद मौके पर पहुंची। उनका कहना है कि एंबुलेंस स्टाफ ने डॉक्टर की अनुमति का हवाला देकर तत्काल ऑक्सीजन नहीं लगाई। बाद में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बम्हनी में चिकित्सक के निर्देश पर ऑक्सीजन शुरू की गई, लेकिन जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही एंबुलेंस का ऑक्सीजन सिलेंडर खाली हो गया। इसके बाद युवक ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

मृतक के पिता का कहना है कि यदि उन्हें पहले ही ऑक्सीजन की कमी की जानकारी दे दी जाती, तो वे स्वयं सिलेंडर की व्यवस्था कर लेते। उनका आरोप है कि सिस्टम की लापरवाही ने उनके बेटे की जान ले ली।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

यदि परिजनों के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो कई गंभीर सवाल सामने आते हैं। क्या ऑक्सीजन सिलेंडर की जांच किए बिना एंबुलेंस रवाना की गई? क्या बैकअप सिलेंडर उपलब्ध नहीं था? क्या गंभीर मरीज को तत्काल प्राथमिक उपचार देने में लापरवाही बरती गई? ये ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

मंत्री ने दिए जांच के निर्देश

यह मामला इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि मंडला प्रदेश की स्वास्थ्य एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सम्पतिया उइके का गृह जिला है। मंत्री ने मामले की पारदर्शी जांच कराने और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

जांच के बाद ही होगी स्थिति स्पष्ट

फिलहाल मृतक के परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग और 108 एंबुलेंस सेवा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की निष्पक्ष जांच जारी है और आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत केवल बीमारी के कारण हुई या स्वास्थ्य सेवाओं में किसी प्रकार की लापरवाही भी जिम्मेदार थी।

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मंडला में ऑक्सीजन खत्म होने से गई युवक की जान? एंबुलेंस सेवा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल परिजनों का आरोप—ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस देर से पहुंची, रास्ते में सिलेंडर हुआ खाली; स्वास्थ्य मंत्री सम्पतिया उइके ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का दिया भरोसा मध्यप्रदेश के मंडला जिले में एक 21 वर्षीय युवक की मौत के बाद सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि समय पर ऑक्सीजन उपलब्ध न होने और एंबुलेंस सेवा में गंभीर लापरवाही के कारण युवक की जान चली गई। मामले ने जिले की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और ऑक्सीजन प्रबंधन पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। मंडला जिले के सुनहरामाल गांव निवासी अजीत बरया (21) लंबे समय से किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित था और जिला अस्पताल में नियमित डायलिसिस करा रहा था। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कई बार बेहतर इलाज और डायलिसिस का समय बदलने की मांग की थी, लेकिन उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया। परिजनों के आरोप गंभीर परिवार का आरोप है कि युवक की तबीयत बिगड़ने पर 108 एंबुलेंस को सूचना दी गई, लेकिन ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस करीब एक घंटे बाद मौके पर पहुंची। उनका कहना है कि एंबुलेंस स्टाफ ने डॉक्टर की अनुमति का हवाला देकर तत्काल ऑक्सीजन नहीं लगाई। बाद में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बम्हनी में चिकित्सक के निर्देश पर ऑक्सीजन शुरू की गई, लेकिन जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही एंबुलेंस का ऑक्सीजन सिलेंडर खाली हो गया। इसके बाद युवक ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। मृतक के पिता का कहना है कि यदि उन्हें पहले ही ऑक्सीजन की कमी की जानकारी दे दी जाती, तो वे स्वयं सिलेंडर की व्यवस्था कर लेते। उनका आरोप है कि सिस्टम की लापरवाही ने उनके बेटे की जान ले ली। स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल यदि परिजनों के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो कई गंभीर सवाल सामने आते हैं। क्या ऑक्सीजन सिलेंडर की जांच किए बिना एंबुलेंस रवाना की गई? क्या बैकअप सिलेंडर उपलब्ध नहीं था? क्या गंभीर मरीज को तत्काल प्राथमिक उपचार देने में लापरवाही बरती गई? ये ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। मंत्री ने दिए जांच के निर्देश यह मामला इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि मंडला प्रदेश की स्वास्थ्य एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सम्पतिया उइके का गृह जिला है। मंत्री ने मामले की पारदर्शी जांच कराने और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है। जांच के बाद ही होगी स्थिति स्पष्ट फिलहाल मृतक के परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग और 108 एंबुलेंस सेवा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की निष्पक्ष जांच जारी है और आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत केवल बीमारी के कारण हुई या स्वास्थ्य सेवाओं में किसी प्रकार की लापरवाही भी जिम्मेदार थी। #Mandla #BreakingNews #HealthSystem #Ambulance #Oxygen #MPNews #MadhyaPradesh #Healthcare #JusticeForAjit #MedicalNegligence #108Ambulance #HindiNews #ViralNews #LatestNews #JansamparkDigital #halchal24news #breakingnews #madhyapradesh #mpnews #dindorinews #viralnews #viralvideo #highlights Part 17

Dindori, Dindori | Aug 1, 2026

साइबर अपराध से बचाव ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच समनापुर थाना प्रभारी ने नागरिकों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करते हुए ऑनलाइन ठगी, फर्जी लिंक, ओटीपी शेयर करने और डिजिटल फ्रॉड से बचने के महत्वपूर्ण उपाय बताए। आमजन से अपील की गई कि किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या लिंक पर भरोसा न करें और साइबर अपराध होने पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। #Halchal24News #Samnapur #Dindori #CyberSafety #CyberAwareness #CyberFraud #OnlineSafety #MadhyaPradesh #साइबरसुरक्षा #साइबरफ्रॉड #डिंडौरी #समनापुर Part 6 - Dindori News