गोल्डन ऑवर में जीवन बचाने की नई उम्मीद: किशनगंज सदर अस्पताल में शुरू हुई गहन चिकित्सा सेवा
10 बेड वाले आईसीयू का जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने किया उद्घाटन, फिलहाल दो वेंटिलेटर युक्त बेड से होगी शुरुआत
अब गंभीर मरीजों को उपचार के लिए बाहर रेफर करने की मजबूरी होगी कम
सुरक्षित मातृत्व, ट्रॉमा केयर और आपातकालीन चिकित्सा को मिली नई मजबूती
किसी भी गंभीर मरीज के लिए जीवन और मृत्यु के बीच की दूरी कई बार किलोमीटर में नहीं, बल्कि कुछ मिनटों में तय होती है। सड़क दुर्घटना, हृदयाघात, मस्तिष्काघात, अत्यधिक रक्तस्राव, गंभीर संक्रमण, श्वसन विफलता या प्रसव के दौरान अचानक उत्पन्न जटिलताओं में उपचार का पहला घंटा जिसे चिकित्सा विज्ञान 'गोल्डन ऑवर' कह जाता है सबसे निर्णायक होता है। यदि इस अवधि में मरीज को वेंटिलेटर सहायता, प्रशिक्षित चिकित्सकीय टीम और गहन निगरानी उपलब्ध हो जाए तो उसके बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। लेकिन लंबे समय तक किशनगंज में आईसीयू सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण गंभीर मरीजों को उच्च चिकित्सा संस्थानों के लिए रेफर करना पड़ता था। रेफरल की प्रक्रिया में उपचार का सबसे महत्वपूर्ण समय बीत जाता था और कई परिवारों को आर्थिक, मानसिक तथा चिकित्सकीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।इसी चुनौती को कम करने की दिशा में सदर अस्पताल, किशनगंज में स्थापित 10 बेड वाले आधुनिक गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) का उद्घाटन सदर विधायक कमरुल होदा एवं जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने संयुक्त रूप से किया। प्रथम चरण में दो वेंटिलेटर युक्त बेड से सेवाएं प्रारंभ की जा रही हैं। आवश्यक उपकरणों और मानव संसाधनों की उपलब्धता के साथ शेष बेड चरणबद्ध तरीके से संचालित किए जाएंगे। आईसीयू के प्रभावी संचालन के लिए प्रशिक्षित पैरामेडिकल कर्मियों का चौबीसों घंटे रोस्टर तैयार किया गया है। जिले में उपलब्ध जनरल सर्जन तथा एनेस्थेटिस्ट भी गंभीर मरीजों के उपचार में निरंतर अपनी सेवाएं देंगे।
अब रेफरल नहीं, समय पर उपचार बनेगा प्राथमिकता
अब तक सड़क दुर्घटनाओं, गंभीर संक्रमण, श्वसन संबंधी जटिलताओं, विषाक्तता और अन्य आपात स्थितियों में मरीजों को बेहतर उपचार के लिए बाहर भेजना पड़ता था। रेफरल के दौरान उपचार में देरी कई बार मरीज की स्थिति को और गंभीर बना देती थी। नई आईसीयू व्यवस्था के बाद प्राथमिक स्थिरीकरण, वेंटिलेटर सहायता और गहन निगरानी जैसी जीवनरक्षक सेवाएं जिले में ही उपलब्ध होंगी। इससे गोल्डन ऑवर के भीतर उपचार शुरू करना संभव होगा, जो गंभीर मरीजों के जीवन बचाने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
मातृ स्वास्थ्य को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ
आईसीयू की उपलब्धता का सबसे बड़ा लाभ जटिल प्रसूति सेवाओं में दिखाई देगा। पहले दूसरे सिजेरियन प्रसव अथवा उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को आईसीयू सुविधा के अभाव में उच्च संस्थानों के लिए रेफर करना पड़ता था। अब जनरल सर्जन, एनेस्थेटिस्ट और आईसीयू सुविधा उपलब्ध होने से जटिल सिजेरियन प्रसव तथा प्रसवोत्तर गंभीर स्थितियों का उपचार सदर अस्पताल में ही संभव होगा। इससे सुरक्षित मातृत्व को मजबूती मिलेगी और मातृ एवं नवजात मृत्यु दर कम करने के प्रयासों को नई गति मिलेगी।
स्वास्थ्य व्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव
आईसीयू केवल एक वार्ड नहीं, बल्कि जीवनरक्षक चिकित्सा व्यवस्था का केंद्र होता है, जहाँ प्रशिक्षित चिकित्सक, पैरामेडिकल कर्मी, आधुनिक उपकरण और निरंतर निगरानी एक साथ कार्य करते हैं। अस्पताल प्रशासन ने इसके लिए 24×7 ड्यूटी व्यवस्था सुनिश्चित की है ताकि किसी भी समय आने वाले गंभीर मरीज को तत्काल उपचार मिल सके। यह व्यवस्था जिले की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देगी।
समय पर उपचार ही सबसे बड़ी जीवनरक्षक व्यवस्था
उद्घाटन के अवसर पर जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि प्रत्येक नागरिक को उसके अपने जिले में गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि आईसीयू की शुरुआत से गंभीर मरीजों को गोल्डन ऑवर के भीतर आवश्यक उपचार मिलेगा, जिससे अनावश्यक रेफरल कम होंगे और लोगों का समय, धन तथा जीवन—तीनों की रक्षा होगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल दो वेंटिलेटर युक्त बेड से सेवाएं प्रारंभ की जा रही हैं और शीघ्र ही सभी दस बेड पूर्ण क्षमता के साथ संचालित किए जाएंगे।सिविल सर्जन ने कहा कि प्रशिक्षित पैरामेडिकल कर्मियों का चौबीसों घंटे रोस्टर तैयार किया गया है तथा जनरल सर्जन और एनेस्थेटिस्ट की उपलब्धता से गंभीर मरीजों को समन्वित उपचार मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह सुविधा न केवल ट्रॉमा एवं क्रिटिकल केयर को मजबूत करेगी, बल्कि सुरक्षित मातृत्व और जटिल सर्जरी सेवाओं को भी नई मजबूती प्रदान करेगी। सदर अस्पताल में आईसीयू की शुरुआत केवल एक नई इकाई का उद्घाटन नहीं, बल्कि जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था में उस परिवर्तन का संकेत है जहाँ गंभीर मरीजों का जीवन बचाने की दौड़ अब रेफरल से नहीं, बल्कि तत्काल उपचार से शुरू होगी। यह पहल सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक जवाबदेह, सुलभ और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है तथा इस विश्वास को मजबूत करती है कि संकट की घड़ी में गुणवत्तापूर्ण उपचार अब जिले के लोगों को अपने ही सदर अस्पताल में उपलब्ध होगा।