बापोड़ा में श्रीमद्भागवत कथा महायज्ञ का भव्य आयोजन, सतीश नंबरदार एवं कमल देवी ने सपरिवार किया पूजन
श्रीमद्भागवत कथा सुनने मात्र से मनुष्य के जीवन के सभी कष्ट होते है दूर : पंडित बृजमोहन कौशिक
भिवानी, 13 सितंबर : ग्राम बापोड़ा स्थित माई वाला मंदिर में समस्त ग्रामवासियों एवं सम्पूर्ण जीव जगत की सुख, शांति और समृद्धि के लिए 7 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। 14 सितंबर से 20 सितंबर तक आयोजित होने वाले इस धार्मिक अनुष्ठान से पूर्व रविवार को कलश यात्रा निकाली निकाली गई। जिसमें सतीश नंबरदार एवं कमल देवी ने अपने परिवार के सदस्यों के साथ विधि-विधान से मुख्य यजमान के रूप में देव पूजन किया। यह आयोजन केवल व्यक्तिगत पुण्य के लिए नहीं, बल्कि पूरे गांव तथा प्राणिमात्र के कल्याण के उद्देश्य से किया जा रहा है। कथा के माध्यम से समस्त क्षेत्र में सुख-शांति, भ्रातृत्व और सद्भावना के प्रसार की प्रार्थना की गई है। कथाव्यास पंडित बृजमोहन कौशिक अपने सुमधुर कंठ से श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत की पावन कथा का रस्वादन करा रहे हैं। प्रतिदिन दोपहर 12:15 बजे से शाम 4 बजे तक भक्तिमयी भजनों और ज्ञानवर्धक प्रसंगों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। कथा के सफल और सुचारू संचालन के लिए आयोजक समिति के सदस्यों ने पूरी व्यवस्था संभाल रखी है। समिति के सदस्य राजेंद्र शर्मा, कृष्ण, गोपाल, नवीन, जीतेन्द्र, पवन, सतबीर और धर्मवीर निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। श्रद्धालुओं के बैठने, पीने के पानी और अन्य सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जा रहा है, ताकि किसी भी भक्त को कोई परेशानी न हो। कथा के दौरान महिलाओं और युवाओं की उपस्थिति विशेष रूप से दर्शनीय है। धार्मिक अनुष्ठान में गौरव शर्मा, मोहित शर्मा, योगिता, पुष्पा, बिमला, सरस्वती, निर्मला देवी, किरण, मनीषा, नीरज और अनीता देवी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस मौके पर कथाव्यास पंडित बृजमोहन कौशिक ने श्रीमद्भागवत कथा महायज्ञ का महत्व बताते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने मात्र से मनुष्य के जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और मन को असीम शांति मिलती है। हमारा मुख्य उद्देश्य है कि इस कथा के माध्यम से हमारे गांव में सुख-समृद्धि का वास हो और संपूर्ण जीव जगत के कल्याण का मार्ग प्रशस्त हो। उन्होंने सभी क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा का आनंद लेने और पुण्य लाभ अर्जित करने का आह्वान किया।