*आज का युवा अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने को भी तैयार: माली*
*राजनीतिक पार्टियों से निगम व निकाय चुनाव में समाज को प्रतिनिधित्व देने की की मांग*
भीलवाड़ा:राजकुमार गोयल, 26 अगस्त माली सैनी समाज शांति प्रिय कौम है। वह हर मुसिबत को सहन करना जानती है। लेकिन माली समाज अपने आत्म सम्मान के लिए मर मिटने के लिए तैयार रहती है। माली समाज वर्षों से खेती बाड़ी करता आ रहा है लेकिन पिछले वर्षों से राजनैतिक दलों ने माली समाज को केवल वोट बैंक समझकर इस्तेमाल किया है। आज हर समाज को अपनी जनसंख्या के अनुपात में राजनीतिक दलों में प्रतिनिधित्व है। लेकिन माली समाज हर क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है। यह विचार राजस्थान प्रदेश माली (सैनी) महासभा के प्रदेश महामंत्री गोपाल लाल माली ने महासभा द्वारा सांगानेर रोड़ स्थित सन्मती वाटिका में आयोजित राजनीतिक जागरूगता अभियान के कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किये। उन्होंने यह भी कहा कि आज का युवा अब जाग गया है वे अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने को तैयार है। उन्होंने राजनीतिक पार्टियों से निगम एवं निकाय चुनाव में समाज के युवाओं को अधिक से अधिक टिकिट देने की भी मांग की।
महासभा के युवा जिलाध्यक्ष उदय लाल माली ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि माली समाज को संगठित करने के लिये बुजर्गाे का मार्ग दर्शन लेकर समाज सेवियों व युवा वर्ग को काम करना होगा। जमीनी धरातल पर काम करने वाले संगठन की आज माली समाज को बहुत आवश्यकता है। उसी उद्देश्य को लेकर माली महासभा कई वर्षाे से समाज के बीच कार्य कर रही है।
महासभा के जिला अध्यक्ष भैरूलाल माली ने बताया कि बैठक में भीलवाड़ा सहित आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों के माली समाज के सक्रिय सदस्यों ने भाग लिया। इस बैठक में समाज की दिशा व दशा तय करने के साथ ही वर्तमान राजनीतिक परिपेक्ष में भी समाज की भूमिका पर भी विशेष चर्चा की गई। बैठक में यह तय किया गया कि अगर राजनीतिक पार्टियां माली समाज की मांग को अनसुना किया गया तो महासभा प्रत्येक वार्ड में 36 कौमों के साथ मिलकर निर्दलीय उम्मीदवार खड़ा करेगी।
इस अवसर पर महासभा के जिला महामंत्री सत्यनारायण माली, मांडल तहसील अध्यक्ष बंसीलाल माली, माली सैनी कर्मचारी संस्था के जिला अध्यक्ष तोताराम सांखला, माली समाज ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष बंसीलाल माली, बबलू माली, लोकेश माली, राकेश माली, देवी लाल माली, कालूराम माली, लालचंद माली, दिनेश माली, कालूराम माली, नारायण माली, रामपाल माली, मनीष बुलीवाल, सतु गढ़वाल, शम्भू बुलीवाल, ओकार माली, हेमराज, संकर माली, गोपाल लाल माली, राधेश्याम, कन्हैयालाल, बालूराम माली, पूरण माली सहित सैकड़ों सक्रिय सदस्य उपस्थित थे।