#उमगा की पावन धरती से शुरू हुई ‘#जय माँ उमंगेश्वरी’ की सिनेमाई यात्रा
सूर्य मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुआ मुहूर्त; उमगा की प्रकृति, #लोकआस्था, संस्कृति और #पर्यटन की संभावनाओं को बड़े पर्दे पर साकार करेगी फिल्म
बिहार की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने के उद्देश्य से निर्मित की जा रही फीचर फिल्म ‘जय माँ उमंगेश्वरी’ का आज औरंगाबाद जिले के ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल उमगा में विधिवत मुहूर्त सम्पन्न हुआ। उमगा स्थित सूर्य मंदिर में पूजा-अर्चना तथा #भगवान गणेश के स्मरण के साथ फिल्म के निर्माण एवं #फिल्मांकन की शुभ शुरुआत की गई।
डमरू फिल्म्स एवं एम/एस राम शर्मा फिल्म प्रोडक्शन के संयुक्त बैनर तले निर्मित हो रही इस फिल्म के निर्माता विकास कुमार सुमन हैं। फिल्म का निर्देशन अभिषेक दुबे कर रहे हैं, जबकि विवेक छायांकन निर्देशक के रूप में फिल्म की दृश्यात्मक प्रस्तुति को आकार दे रहे हैं।
मुहूर्त के पश्चात उमगा पर्वत पर फिल्म के प्रारंभिक दृश्यों का फिल्मांकन शुरू किया गया। फिल्मांकन के दौरान उमगा की पर्वतीय प्राकृतिक सुंदरता, हरित परिवेश, विस्तृत दृश्यावली, मंदिरों की आस्था, धार्मिक अनुष्ठानों तथा स्थानीय जनजीवन को कैमरे में उतारा गया। निर्माण दल का विशेष प्रयास है कि उमगा केवल फिल्म की पृष्ठभूमि बनकर न रहे, बल्कि उसकी प्रकृति, आस्था, संस्कृति और लोकजीवन स्वयं कथा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभरे।
फिल्म के मुख्य कलाकार #सौरभ_सम्राट एवं भोजपुरी फिल्मों की चर्चित अभिनेत्री #चांदनी_सिंह ने मुहूर्त के अवसर पर पूजा-अर्चना में भाग लिया और इसके बाद फिल्मांकन में हिस्सा लिया। उनके साथ #मंटू_सिंह सहित अन्य सह #कलाकार एवं सह #अभिनेत्री भी उपस्थित रहे।
“उमगा केवल स्थान नहीं, अपनी संस्कृति और आस्था की जीवंत अभिव्यक्ति है” — अभिषेक दुबे
फिल्म के #निर्देशक #अभिषेक दुबे ने कहा कि उमगा को #फिल्म की शुरुआत के लिए चुनने के पीछे केवल इसकी प्राकृतिक सुंदरता ही कारण नहीं है, बल्कि यहां की गहरी लोकआस्था, धार्मिक परंपराएं और सांस्कृतिक विरासत भी महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा, “हमारी कोशिश है कि कैमरा केवल कलाकारों और कहानी को ही नहीं, बल्कि उस मिट्टी की आत्मा को भी अपने भीतर समेटे। उमगा की पहाड़ियां, मंदिर, धार्मिक अनुष्ठान, लोकविश्वास और यहां का सहज ग्रामीण जीवन अपने आप में एक जीवंत कथा हैं। हम इन्हें पूरी गरिमा के साथ पर्दे पर प्रस्तुत करना चाहते हैं, ताकि बिहार की इस समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से देश के अन्य हिस्सों के दर्शक भी परिचित हो सकें। हमारा प्रयास यह भी है कि फिल्म के माध्यम से उमगा और #औरंगाबाद की पर्यटन संभावनाओं को नई पहचान मिले।”
“प्रकृति और #आस्था का ऐसा संगम विरल है” — छायांकन निर्देशक विवेक
फिल्म के छायांकन निर्देशक विवेक ने कहा, “उमगा का प्राकृतिक परिवेश दृश्यांकन की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। यहां #पर्वत, #आकाश, हरियाली, #मंदिर, धार्मिक अनुष्ठान और स्थानीय जीवन एक साथ दिखाई देते हैं। हमारी कोशिश है कि इन दृश्यों को केवल सुंदर चित्रों की तरह प्रस्तुत न किया जाए, बल्कि उनमें यहां की आस्था और संस्कृति की अनुभूति भी दिखाई दे। दर्शक जब इन दृश्यों को देखें तो उन्हें उमगा की प्रकृति के साथ-साथ उसकी सांस्कृतिक आत्मा का भी अनुभव हो। यही अनुभव आगे चलकर इस क्षेत्र की पर्यटन संभावनाओं को लोगों तक पहुंचाने में सहायक बनेगा।”
“माँ उमंगेश्वरी के प्रति मेरी आस्था ने फिल्म की कल्पना को दिशा दी” — #निर्माता विकास कुमार सुमन
फिल्म के निर्माता विकास कुमार सुमन ने कहा कि ‘जय माँ उमंगेश्वरी’ उनके लिए केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी, संस्कृति और आस्था से जुड़ा हुआ संकल्प है।
उन्होंने कहा, “मैं स्वयं माँ उमंगेश्वरी का भक्त हूं और माँ के प्रति मेरी गहरी आस्था है। जब इस फिल्म की कल्पना मेरे मन में आकार ले रही थी, तब मेरे सामने सबसे पहले यही विचार था कि बिहार की धरती पर मौजूद संस्कृति, आस्था, लोकपरंपराओं, प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक विरासत को बड़े पर्दे पर सम्मानपूर्वक प्रस्तुत किया जाए। फिल्म निर्माण की दिशा में यह हमारा अपना पहला महत्वपूर्ण प्रयास है और हमने इसकी शुरुआत भी माँ के आशीर्वाद से करने का संकल्प लिया था। आज सूर्य मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद उमगा पर्वत से फिल्मांकन शुरू होना हमारे लिए अत्यंत भावुक और गौरवपूर्ण क्षण है।”
उन्होंने आगे कहा, “हम चाहते हैं कि ‘जय माँ उमंगेश्वरी’ बिहार को केवल कहानी की भूमि के रूप में प्रस्तुत न करे, बल्कि यहां की संस्कृति और लोकआस्था को देश-दुनिया के दर्शकों तक पहुंचाने का माध्यम बने। बिहार में प्रकृति, अध्यात्म, इतिहास और लोकजीवन का जो अद्भुत संगम है, उसे सही दृष्टि से प्रस्तुत किया जाए तो यह प्रदेश पर्यटन की दृष्टि से भी नई संभावनाएं पैदा कर सकता है। हमारी कल्पना इसी व्यापक उद्देश्य के साथ इस फिल्म से जुड़ी है।”
उमगा से #बिहार की संस्कृति को पर्दे पर उतारने का संकल्प
फिल्म की शुरुआत #उमगा की पावन धरती से करते हुए निर्माण दल आने वाले दिनों में औरंगाबाद जिले के विभिन्न प्राकृतिक, धार्मिक, ग्रामीण एवं सांस्कृतिक स्थलों पर भी फिल्मांकन करेगा। फिल्म की आवश्यकता के अनुसार उमगा, देव, पवई, रिसियप, मंगुराही, अम्बा तथा औरंगाबाद के विभिन्न क्षेत्रों को कहानी का हिस्सा बनाया जाएगा।
फिल्म के माध्यम से स्थानीय लोकजीवन, ग्रामीण परिवेश, धार्मिक परंपराओं, लोकआस्था, प्राकृतिक सौंदर्य तथा बिहार की सांस्कृतिक विरासत को यथासंभव स्वाभाविक और गरिमापूर्ण रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है।
निर्माण दल का मानना है कि सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि किसी प्रदेश की संस्कृति, परंपरा, इतिहास और पहचान को व्यापक समाज तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी है। इसी भावना के साथ ‘जय माँ #उमंगेश्वरी’ की यात्रा आज उमगा के सूर्य मंदिर से आरंभ हुई है।
माँ उमंगेश्वरी के आशीर्वाद के साथ शुरू हुई यह यात्रा अब उमगा की पहाड़ियों, मंदिरों, गांवों, लोकजीवन और बिहार की #सांस्कृतिक धरती को अपने दृश्यों में समेटते हुए आगे बढ़ेगी।
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