बागपत अग्निकांड, ताला खुल जाता तो मां-बेटी बच जातीं:दिल्ली में जिंदगी की जंग लड़ रहा पिता; 13 साल के मासूम ने मां-बहन को मुखग्नि दी
दिल्ली में जिंदगी की जंग लड़ रहा पिता; 13 साल के मासूम ने मां-बहन को मुखग्नि दी|
बागपत में 8 अक्टूबर (गुरुवार) की सुबह किराना कारोबारी अंकुर जैन (40) के 2 मंजिला मकान में शॉर्ट-सर्किट से आग लग गई। हादसे में उसकी पत्नी स्वाति (37) और बेटी अनन्या (7) की मौत हो गई। बचाने में अंकुर खुद भी गंभीर रूप से झुलस गए, जिनका इलाज दिल्ली में चल रहा है। हादसे के समय हुए सिलेंडर ब्लास्ट के दौरान गली से निकल रहे युवक पर दुकान शटर गिर गया था। जिससे वो घायल हो गया था। शुक्रवार की सुबह उसने भी दम तोड़ दिया।
जिला मुख्यालय से 17 किमी दूर खेकड़ा कस्बे में मुबारिकपुर रोड पर यह घटना हुई है। हादसे के बाद हमारी टीम मौके पर पहुंची। प्रत्यक्षदर्शियों से बातचीत और घटनास्थल को देखने के बाद क्या-क्या जानकारियां सामने आईं, पढ़िए इस रिपोर्ट में…
मकान में आग लगी तो लोगों की भीड़ लग गई। आग इतनी भयंकर थी कि कोई अंदर जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका। -
मकान में आग लगी तो लोगों की भीड़ लग गई। आग इतनी भयंकर थी कि कोई अंदर जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका।
...काश, ताला नहीं लगाया होता प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के मुताबिक, जब ग्राउंड फ्लोर पर बनी परचून की दुकान में आग लगी और दो गैस सिलेंडरों में धमाका हुआ, तो भीषण धुआं तेजी से पहली और दूसरी मंजिल की तरफ फैल गया। जान बचाने के लिए स्वाति अपनी 7 साल की बच्ची अनन्या का हाथ थामकर तीसरी मंजिल की छत की ओर भागीं। छत के गेट पर बड़ा ताला लटका था। इससे वह बाहर नहीं निकल पाईं।
अंधेरे और आंखों को झुलसाते जहरीले धुएं के बीच स्वाति बदहवास होकर ताले की चाबी तलाशती रहीं। लेकिन सफलता नहीं मिली। गेट का ताला नहीं खुला। नीचे से उठती लपटें और ऊपर धुएं का दमघोंटू घेरा, उसी बंद दरवाजे के पीछे मां-बेटी तड़पती रहीं और आखिरकार दोनों की सांसें थम गईं। बाद में समाजसेवी सुभाष चंद कश्यप और स्थानीय युवाओं ने कड़ी मशक्कत के बाद गेट तोड़कर दोनों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
ये अंकुर का बेटा श्रेय जैन है। 13 साल के बेटे ने मां और बहन की चिता को मुखाग्नि दी है।
झुलसते हुए आग में कूद पड़ा पिता जब दुकान से धुएं का गुबार उठा, तो कारोबारी अंकुर जैन नीचे भागे, लेकिन सामने सिर्फ लपटें थीं। पत्नी स्वाति और प्यारी बेटी अनन्या को बचाने के लिए वे जान की परवाह किए बिना लपटों और धुएं के बीच ऊपर की ओर दौड़े।
अंकुर ने दोनों को बचाने का हर संभव प्रयास किया, जिसमें वे खुद बुरी तरह झुलस गए। दुकान में काम करने वाला कर्मचारी जाहिद भी उन्हें बचाने में झुलस गया। बुरी तरह झुलसे अंकुर को जब एंबुलेंस से ले जाया जा रहा था, तब भी वे बेहोशी की हालत में बस अपनों को पुकार रहे थे। फिलहाल वे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में जिंदगी के लिए जंग लड़ रहे हैं।
अंकुर के पिता विनय जैन और उनकी मां पुष्पा जैन घटना के समय घर पर नहीं थे। जानकारी पर पहुंचे तब तक सब खत्म हो चुका था। - Dainik Bhaskar
अंकुर के पिता विनय जैन और उनकी मां पुष्पा जैन घटना के समय घर पर नहीं थे। जानकारी पर पहुंचे तब तक सब खत्म हो चुका था।
बुजुर्ग माता-पिता और बेटा बच गए हादसे के समय अंकुर के पिता विनय जैन (65), उनकी मां पुष्पा जैन, बेटा श्रेय जैन (13) घर में नहीं थे, इसलिए बच गए। पिता पड़ोस में टहलने और मां मंदिर गई थी। बेटा श्रेय स्कूल गया था। इस हादसे में पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। चंद मिनटों में हंसते-खेलते परिवार की खुशियां कुछ इस तरह छिन जाएंगी, किसी ने सोचा तक नहीं था।
फायर ब्रिगेड कर्मचारियों ने सीढ़ी से चढ़कर मकान में फंसे लोगों को बाहर निकाला।
स्कूल से लौटा 13 साल का श्रेय, घर नहीं... मां-बहन की अर्थियां मिलीं हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि जब आग लगी, उस समय अंकुर का बेटा श्रेय जैन इंद्रप्रस्थ स्कूल गया हुआ था। उसके दादा विनय जैन (65) और दादी पुष्पा जैन (60) रोज की तरह मंदिर गए हुए थे। घटना के बाद श्रेय को स्कूल से लाया गया। घर पहुंचते ही उसके कदमों तले जमीन खिसक गई। जिस घर में सुबह मां का दुलार और बहन की हंसी गूंज रही थी, वहां अब राख का ढेर था।
फायर ब्रिगेड कर्मचारियों ने 40 मिनट में आग पर काबू पा लिया।
लोग नीचे से शोर मचा रहे थे
एक प्रत्यक्षदर्शी सुभाष चंद कश्यप ने बताया कि सुबह करीब 8 बजे अचानक आग लग गई। मैं भी किसी काम से बाजार आया हुआ था। भागकर मैं वहां पहुंच गया। वहां पहुंचकर मैंने देखा कि आग की लपटें तेज थीं। किसी ने चिल्लाकर बताया कि ऊपर परिवार फंसा हुआ है। नीचे से ऊपर जाने का कोई रास्ता नहीं बचा था, इसलिए ऊपर जाने का एकमात्र जरिया छत ही थी।
मैं तुरंत आसपास की छतों के रास्ते किसी तरह उस घर की छत तक पहुंचा। वहां आसपास के लोगों से जो भी मिला- कुदाल, गैंती, बेलचा, हथौड़ा उसकी मदद से दरवाजा तोड़ा गया। हम लोग अंदर पहुंचे तो वहां मां और बेटी... बस, इससे आगे मैं कुछ देख नहीं सका।
सुभाष चंद कश्यप ने बताया कि हम लोग छतों के रास्ते ऊपर पहुंचे। दरवाजा तोड़ तब तक मां-बेटी की जान जा चुकी थी।
सिलेंडर फटने से कई और लोग भी घायल
दो लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि दर्जनों लोग इस हादसे में मामूली रूप से चोटिल हुए हैं। दरसल आग की वजह से सिलेंडर में धमाका हुआ, तो दुकान का शटर उड़कर सामने की दीवार से जा टकराया। धमाके से दीवार पर लगा बिजली का मीटर भी टूट गया और शटर छिटकने से आसपास खड़े कई लोगों को चोटें आईं। चोट लगने के बाद वे लोग प्राथमिक इलाज के लिए अपने-अपने घर या निजी स्तर पर चले गए, लेकिन गंभीर रूप से झुलसे दो ही लोग बताए जा रहे हैं।
खेकड़ा कोतवाली प्रभारी आशीष पुंडीर ने बताया
शॉर्ट-सर्किट के चलते मकान में आग लगी थी। पोस्टमॉर्टम के बाद मां-बेटी के शवों का अंतिम संस्कार हो गया है। व्यापारी और कर्मचारी का दिल्ली में इलाज चल रहा है। मामले की जांच की जा रही है, जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।