रौसा में तालाब की जमीन पर कब्जे की शिकायत, जांच शुरू
हरदोई। रौसा गांव में तालाब की भूमि पर कथित अवैध कब्जे और पक्के निर्माण के मामले में जांच शुरू हो गई है। शिकायतकर्ता विमल किशोर पुत्र राजकिशोर ने प्रार्थना-पत्र देकर राजस्व अभिलेखों के आधार पर जांच और कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत में खसरा संख्या 831/0.051 हेक्टेयर, जो तालाब की श्रेणी में दर्ज बताई गई है, पर कब्जे और निर्माण का आरोप लगाया गया है। साथ ही खसरा संख्या 839मि/0.291 हेक्टेयर का भी उल्लेख है।
अब जांच में यह स्पष्ट होगा कि भूमि की वास्तविक स्थिति क्या है और क्या तालाब की जमीन पर नियमों के विरुद्ध कब्जा किया गया है। जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
तालाब की भूमि पर कब्जे और पक्के निर्माण का आरोप, मुख्यमंत्री से शिकायत कर जांच की मांग
हरदोई, उत्तर प्रदेश।
सरकारी अभिलेखों में दर्ज तालाब की जमीन पर कथित कब्जे और निर्माण का मामला सामने आया है। मल्लावां क्षेत्र के एक निवासी ने मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश शासन को प्रार्थना-पत्र भेजकर राजस्व अभिलेखों के आधार पर स्थलीय जांच कराने और संबंधित भूमि को सुरक्षित रखने की मांग की है।
प्रार्थना-पत्र में शिकायतकर्ता विमल किशोर पुत्र राजकिशोर, निवासी मल्लावां क्षेत्र, जनपद हरदोई ने आरोप लगाया है कि गांव के कुछ लोगों द्वारा उनकी भूमि और उससे सटी तालाब की जमीन पर अवैध कब्जा कर पक्का निर्माण कराया जा रहा है।
इन गाटा संख्याओं का किया गया उल्लेख
शिकायत में खसरा संख्या 839मि/0.291 हेक्टेयर तथा तालाब की श्रेणी में दर्ज खसरा संख्या 831/0.051 हेक्टेयर का उल्लेख किया गया है। प्रार्थी का आरोप है कि संबंधित भूमि पर निर्माण के लिए मिट्टी डालकर जमीन को समतल किया जा रहा है तथा मना करने पर विवाद और मारपीट की स्थिति पैदा होती है।
आवेदन में अन्य गाटा संख्याओं का भी जिक्र करते हुए आसपास की भूमि पर कब्जे और निर्माण से संबंधित आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने राजस्व अभिलेखों का मिलान कर भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
12 अक्टूबर की घटना का भी उल्लेख
प्रार्थना-पत्र में 12 अक्टूबर 2026 को कथित तौर पर हुए घटनाक्रम का उल्लेख है। शिकायतकर्ता के अनुसार, संबंधित भूमि पर निर्माण की गतिविधियां जारी हैं। हालांकि, उपलब्ध दस्तावेजों से घटना की स्वतंत्र पुष्टि, निर्माण की वर्तमान स्थिति और संबंधित पक्षों का पक्ष स्पष्ट नहीं हो सका है।
प्रशासनिक जांच से स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि राजस्व विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर भूमि का सीमांकन करें, खसरा-खतौनी और अन्य अभिलेखों का मिलान करें तथा तालाब की भूमि की श्रेणी और कब्जे की स्थिति की जांच करें।
यदि जांच में तालाब की भूमि पर अनधिकृत कब्जे या निर्माण की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल, संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई और आरोपित पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
अब प्रमुख सवाल यह है कि राजस्व अभिलेखों में दर्ज भूमि की मौके पर वास्तविक स्थिति क्या है और शिकायत पर प्रशासन कब तक जांच कर कार्रवाई करेगा?
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Bilgram, Hardoi | Oct 21, 2026