*प्राकृतिक खेती एवं एकीकृत कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने डिंडौरी में विशेष पहल*
*प्राकृतिक खेती से जुड़े 12,258 नए किसान, 33 नए जैव संसाधन केंद्र स्थापित*
जिले में प्राकृतिक खेती एवं एकीकृत कृषि प्रणाली (Integrated Farming System) को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न संबद्ध विभागों के समन्वय एवं अभिसरण से विशेष पहल की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य रासायनिक कृषि निवेशों पर किसानों की निर्भरता कम करना, मृदा स्वास्थ्य एवं जल संरक्षण को बढ़ावा देना तथा कृषि को अधिक टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल बनाना है।
विगत एक वर्ष में इस पहल के तहत 873 नए परिवारों को प्राकृतिक एवं सतत कृषि पद्धतियों से जोड़ा गया है। वहीं 12,258 नए किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा गया है। प्राकृतिक खेती के लिए आवश्यक संसाधनों एवं तकनीकी सहयोग की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 33 नए जैव संसाधन केंद्र (BRC) स्थापित किए गए हैं।
प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि को प्रोत्साहित करने के साथ 4,650 किसानों का जैविक प्रमाणीकरण भी कराया गया है। इसमें विशेष रूप से रामतिल, मसूर एवं सरसों जैसी कम जल आवश्यकता वाली फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन प्रयासों से जिले में जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य संवर्धन, कम लागत वाली कृषि तथा फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन मिल रहा है।
विभागों के समन्वित प्रयासों से किसानों को पर्यावरण-अनुकूल एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए निरंतर प्रेरित किया जा रहा है। इससे कृषि की दीर्घकालीन स्थिरता के साथ किसानों की आय एवं ग्रामीण आजीविका को भी सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी।
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Dindori, Madhya Pradesh | Oct 12, 2026