उत्तर प्रदेश के बरेली में एक सफाईकमी ने नगर स्वास्थ्य अधिकारी भानुप्रकाश के सामने चूड़ियाँ फेंकते हुए कहा - "ले, इन्हें पहन ले आउटसोर्स कंपनी ने इन सफाईकर्मियों को 13,000 रुपये प्रतिमाह के वादे पर रखा था लेकिन महीने के अंत में मिले सिर्फ 7,500 रुपये। यानी लगभग आधी तनख्वाह काट ली गई।सवाल यह है कि जब ठेका 13 हजार का था, तो मज़दूर को 7,500 पर क्यों रोका गया? बाकी पैसे कहाँ गए और किसकी जेब में यह कोई अकेला मामला नहीं है। चाहे फैक्ट्री हो या नगर निकाय - संविदा और ठेका मज़दूरों को तय मानकों के अनुसार वेतन न देने का चलन लगातार जारी है। कागज़ पर अनुबंध कुछ और, हाथ में रकम कुछ और – और यह शोषण का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।
Hardoi, Hardoi | Jun 25, 2026