डीएम की जीरो टॉलरेंस नीति के बीच एसडीएम (न्यायिक) रिंकू सिंह राही के फैसलों का विरोध, बार अध्यक्ष ऋषि कुमार पटेल व महासचिव डॉ. साधना त्रिपाठी को घेरने की चर्चा तेज
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उरई (जालौन)। जालौन में इन दिनों प्रशासनिक सख्ती, न्यायिक पारदर्शिता और अधिवक्ता राजनीति एक साथ चर्चा के केंद्र में हैं। एक ओर जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय जनशिकायतों के समयबद्ध निस्तारण और विभागीय जवाबदेही को लेकर लगातार कड़े निर्णय ले रहे हैं। हाल ही में जनशिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण में लापरवाही पाए जाने पर 24 अधिकारियों के वेतन पर रोक तथा विद्युत विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई ने स्पष्ट संकेत दिया है कि जिले में अब जीरो टॉलरेंस की नीति लागू की जा रही है।
इसी क्रम में उपजिलाधिकारी (न्यायिक) रिंकू सिंह राही द्वारा न्यायिक कार्यों को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और उच्च न्यायालय व सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित करने की पहल भी चर्चा का विषय बनी हुई है। उनके द्वारा जिला बार एसोसिएशन को भेजे गए पत्र में न्यायिक कार्यों के बहिष्कार पर आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा गया कि यदि किसी अधिवक्ता को कोई शिकायत है तो उसका समाधान कानून और निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से कराया जाए, न कि न्यायिक कार्य बाधित कर आमजन के हितों को प्रभावित किया जाए।
पत्र में यह भी उल्लेख है कि न्यायिक कार्यों के बहिष्कार और न्यायालय के कार्य में व्यवधान उत्पन्न करने वाले कुछ अधिवक्ताओं के संबंध में विधिसम्मत कार्रवाई की संस्तुति की गई है। इसके बाद अधिवक्ता जगत में इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है।
इसी बीच जिला बार एसोसिएशन के लोकप्रिय अध्यक्ष ऋषि कुमार पटेल और महासचिव डॉ. साधना त्रिपाठी, जिन्होंने न्यायिक व्यवस्था और संस्थागत मर्यादा के समर्थन की बात कही, उनके विरुद्ध आमसभा बुलाए जाने की सूचना ने अधिवक्ताओं के बीच नई चर्चा छेड़ दी है। कई अधिवक्ताओं का मानना है कि निर्वाचित नेतृत्व को इस प्रकार घेरने का प्रयास बार की लोकतांत्रिक परंपराओं पर प्रश्न खड़े करता है। अध्यक्ष के निर्देशो की अवेहलना करने की घटना से सभी न्यायिक कार्य कर रहे लोगो मे कलेक्ट्रेड प्रभारी के प्रति गहरी नाराजगी है लोकप्रिय अध्यक्ष ने सबसे ज्यादा मतो से जितने का रिकार्ड कायम किया।
सूत्रों के अनुसार 5 अगस्त को कलेक्ट्रेट प्रभारी ओम नारायण निरंजन एक राजस्व अधिवक्ता के साथ जजी परिसर पहुंचे, जहां एक युवा पदाधिकारी के माध्यम से आमसभा संबंधी पत्र वितरित किए जाने की चर्चा रही। इस घटनाक्रम के बाद अधिवक्ता समुदाय में विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। हालांकि, इन चर्चाओं की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की ओर से विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है। एक और चर्चा है जिसकी कोई अधिकारी पुष्टि नही यह भी आरोप है कि मंत्री जी के इसारे पर वकीलों गुमराह करने काम कार्य रहे है।
अधिवक्ता वर्ग के एक हिस्से का कहना है कि जब जिला प्रशासन जनहित और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लगातार कार्रवाई कर रहा है, तब न्यायिक कार्यों को सुचारु रखने के प्रयासों का संस्थागत स्तर पर समर्थन होना चाहिए। वहीं कुछ अन्य अधिवक्ता इस पूरे घटनाक्रम को बार की आंतरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा मानते हैं।
बार परिसर में यह चर्चा भी है कि अध्यक्ष ऋषि कुमार पटेल को अधिवक्ताओं का व्यापक जनसमर्थन प्राप्त है और उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से नेतृत्व हासिल किया है। ऐसे में उनके तथा महासचिव डॉ. साधना त्रिपाठी के विरुद्ध आमसभा बुलाने की पहल को लेकर अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं। और विवाद की जगह बात-चीत से मसला हल होना चाहिए रिकोर्डिंग पूरे वक्त लाईव रहनी चाहिए जिससे अधिवक्ताओ आचरण भी खुल कर लोगो के सामने आ सकेगा।
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Orai, Jalaun | Aug 7, 2026