*चारों भाइयों की निकली भव्य बारात, जनकपुरी में गूंजे श्रीराम के जयकारे*
*श्री बिहारी रामलीला समाज की 130वीं रामलीला में धनुष यज्ञ और चारों भाइयों के विवाह का भावपूर्ण मंचन, रथ में विराजे प्रभु श्रीराम के दर्शन कर श्रद्धालु हुए भावविभोर*
सतना। श्री बिहारी रामलीला समाज सतना द्वारा आयोजित 130वें श्री रामलीला उत्सव के अंतर्गत भगवान श्रीराम के विवाह प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भक्ति और आनंद से सराबोर कर दिया। श्री बिहारी मंदिर से गाजे-बाजे के साथ रथ में विराजे प्रभु श्रीराम सहित चारों भाइयों—श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न की भव्य बारात निकाली गई। बारात में भक्ति गीतों, जयघोष और पारंपरिक उत्सवी उल्लास के बीच पूरा वातावरण राममय हो उठा। जनकपुरी रामना टोला में विधि-विधान और धार्मिक परंपराओं के अनुसार चारों भाइयों का विवाह संपन्न हुआ।
श्री बिहारी मंदिर से जनकपुरी तक निकली भव्य बारात
श्री बिहारी मंदिर से प्रारंभ हुई बारात बिहारी चौक, जय स्तंभ चौक, सिटी कोतवाली और अग्रसेन चौक होते हुए जनकपुरी रामना टोला पहुंची। रथ में विराजे प्रभु *श्रीराम के दिव्य स्वरूप* और चारों भाइयों की बारात के दर्शन के लिए मार्ग में श्रद्धालुओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। गाजे-बाजे, भक्ति संगीत और *श्रीराम के जयकारों के बीच बारात आकर्षण का केंद्र बनी रही। जनकपुरी पहुंचने पर विवाह* की पारंपरिक रस्में पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ संपन्न कराई गईं।
*धनुष यज्ञ में श्रीराम ने तोड़ा शिव धनुष*
रामलीला के प्रसंग में मिथिला के राजा जनक ने प्रतिज्ञा की थी कि जो वीर भगवान शिव के धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर उसे तोड़ेगा, उसी के साथ उनकी पुत्री माता सीता का विवाह होगा। स्वयंवर में उपस्थित अनेक राजा-महाराजा शिव धनुष को हिला तक नहीं सके। महर्षि विश्वामित्र की आज्ञा पाकर प्रभु श्रीराम आगे बढ़े और सहज भाव से शिव धनुष को उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाई। धनुष भंग होते ही जनकपुरी में हर्ष और उल्लास छा गया। माता सीता ने प्रभु श्रीराम के गले में वरमाला डालकर उन्हें अपने पति के रूप में स्वीकार किया।
इसके पश्चात धार्मिक परंपराओं के अनुसार प्रभु *श्रीराम की सीता, लक्ष्मण की उर्मिला, भरत की मांडवी तथा शत्रुघ्न की श्रुतकीर्ति* के साथ विवाह संपन्न हुआ। चारों विवाहों के प्रसंग ने दर्शकों को भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मर्यादा और वैवाहिक परंपराओं की सुंदर झलक दिखाई।
130 वर्षों से निभाई जा रही रामलीला की परंपरा
श्री बिहारी रामलीला समाज द्वारा लगातार 130 वर्षों से रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। सुभाष पार्क मैदान में आयोजित यह उत्सव सतना की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा का प्रतीक बन चुका है। रामायण के प्रसंगों का सजीव मंचन नई पीढ़ी को भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, त्याग, कर्तव्य और पारिवारिक मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
समाज के पदाधिकारी एवं गणमान्य नागरिक रहे उपस्थित
कार्यक्रम में महंत बृजेंद्र कुमार दुबे, सहमहंत शैलेंद्र कुमार दुबे, व्यास श्री अरुण कुमार परौहा, श्री हरि प्रकाश गोस्वामी, अध्यक्ष रविशंकर गौरी, कार्यवाहक अध्यक्ष अशोक अग्रवाल, महामंत्री राजेश चतुर्वेदी ‘पालन’, मणिकांत माहेश्वरी, मनमोहन माहेश्वरी, रमेश शुक्ला, उपाध्यक्ष सुरेश केसरवानी, नरेंद्र चंद्र गुप्ता, रामचरण गुप्ता, कोषाध्यक्ष सुधीर अग्रवाल, अशोक खानेचा, श्याम लाल गुप्ता ‘श्यामू’, लखनलाल केसरवानी, सागर गुप्ता बलराम शुक्ला श्रेय शुक्ला रमेश शुक्ला सहित समाज के पदाधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
स्थानीय कलाकारों ने किया प्रभावशाली अभिनय
रामलीला की प्रस्तुति में आशुतोष दुबे, अंकुर दुबे, मंगलेश्वर जी, नन्हूलाल गर्ग, मधुसूदन गुप्ता, श्रीराम पार्थ शुक्ला, लक्ष्मण शुभांक शुक्ला, सीता शुभ शुक्ला, भरत नमो शुक्ला, शत्रुघ्न सजल दुबे, श्रेय शुक्ला, शिवांश शुक्ला एवं ऋषभ शुक्ला सहित अन्य कलाकारों ने प्रभावशाली अभिनय किया। कलाकारों ने अपने संवाद, भाव-भंगिमाओं और सशक्त अभिनय से रामायण के प्रसंगों को जीवंत बना दिया। वहीं ढोलक मास्टर मुकेश कुमार और राजेश दाहिया ने अपनी सुमधुर ताल एवं संगीत से मंचन को और अधिक आकर्षक बनाया।
नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने का प्रयास
श्री बिहारी रामलीला समाज के प्रचार-प्रसार प्रमुख श्याम लाल गुप्ता ‘श्यामू’ ने बताया कि समाज द्वारा 130 वर्षों से निरंतर रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। इस परंपरा का उद्देश्य भगवान श्रीराम के आदर्शों, भारतीय संस्कृति और धार्मिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाना तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि स्थानीय कलाकारों की सहभागिता और समाज के लोगों का सहयोग इस आयोजन की विशेष पहचान है। रामलीला का यह उत्सव श्रद्धा, संस्कृति और सामाजिक एकता का संदेश दे रहा है।