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24 Satna News

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सतना के लाल ने किया कमाल

ग्वालियर में आयोजित मास्टर्स पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2026 में अभिषेष बघेल का दबदबा, लगातार तीसरी बार बने बेस्ट लिफ्टर ऑफ मध्यप्रदेश

ग्वालियर में 30-31 मई 2026 को आयोजित मध्यप्रदेश मास्टर्स पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में सतना जिले के ग्राम मरौहा निवासी अभिषेष बघेल ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए लगातार तीसरी बार "बेस्ट लिफ्टर ऑफ मध्यप्रदेश" का खिताब अपने नाम कर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की।

अभिषेष बघेल ने प्रतियोगिता के दौरान दमदार प्रदर्शन करते हुए सभी प्रतिस्पर्धियों को पीछे छोड़ दिया और लगातार तीसरे वर्ष यह प्रतिष्ठित सम्मान हासिल कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल सतना जिले बल्कि पूरे मध्यप्रदेश को गौरवान्वित किया है।

उनके इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर अभिषेष बघेल का चयन महाराष्ट्र में 18 से 23 जुलाई 2026 तक आयोजित होने वाली राष्ट्रीय पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप के लिए किया गया है। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में वे मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगे। उनके चयन से क्षेत्र एवं प्रदेश के खेल प्रेमियों में उत्साह का माहौल है तथा सभी ने उनके सफल प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

अपनी सफलता पर अभिषेष बघेल ने इसका श्रेय अपने पिता योगेंद्र प्रताप सिंह, माता मंगलेश सिंह, पत्नी डॉ. प्रीति सिंह, बहन डॉ. अपर्णा सिंह, तथा आशुतोष मिश्रा एवं अमितेश मिश्रा को दिया। उन्होंने कहा कि परिवार, मित्रों एवं शुभचिंतकों के निरंतर सहयोग, प्रोत्साहन और विश्वास ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अभिषेष की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर परिजनों, मित्रों, खेल प्रेमियों एवं पावरलिफ्टिंग समुदाय ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी। साथ ही आगामी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर मध्यप्रदेश एवं देश का नाम रोशन करने के लिए शुभकामनाएं दीं।

लगातार तीन बार "बेस्ट लिफ्टर ऑफ मध्यप्रदेश" का खिताब जीतकर अभिषेष बघेल ने प्रदेश के मास्टर्स पावरलिफ्टिंग जगत में अपनी विशेष पहचान स्थापित की है और वे राष्ट्रीय स्तर पर भी मध्यप्रदेश से पदक की प्रबल उम्मीद माने जा रहे हैं।
सतना में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का  वेतन वृद्धि की मांग को लेकर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

 जिले की सैकड़ों आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने सोमवार को अपनी लंबित मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट का  वेतन वृद्धि और मानदेय समय पर देने की मांग को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संघ के बैनर तले कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया।
सतना,वन विभाग की टीम पहुंची सगमनिया नैना।
वन विभाग को मिली सूचना के आधार पर वन विभाग की टीम नैना सगमानिया पहुंची । जानकारी के मुताबित वहां रहने वाले रामा धार वंशल के घर में जंगली पशु को मारने की सूचना मिली थी। जब टीम वहां पहुंची घर पर ताला लटका मिली। डॉग स्काड की मदत से जब सर्च किया गया तो खून की लथपथ पालीथीन जिसमें शिकार कर लाया गया था साथ ही बर्तन मिले। घर सर्च की करने के बाद धारदार हथियार पाए गए सूअर के बाल बरामद किया गया। वन विभाग जानकारी जुटा कर कार्यवाही कर रही है।
SDM कार्यालय के बाहर 75 हजार की रिश्वत लेते बाबू रंगे हाथ गिरफ्तार
लोकायुक्त रीवा की टीम ने आज ब्यौहारी एसडीएम कार्यालय के बाहर एक फोटोकॉपी दुकान पर बड़ी कार्रवाई की। यहाँ तहसीलदार कार्यालय के खंड लेखक (बाबू) लल्लू प्रसाद प्रजापति को ₹75,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोचा गया।आरोपी ने आवेदक रमेश रजक से दुकान विवाद के मामले में उनके पक्ष में अदालती आदेश करवाने के एवज में इस मोटी रकम की मांग की थी। शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त पुलिस ने जाल बिछाकर आरोपी को दबोच लिया। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।
धारदार हथियार से युवक की हत्या, सुनसान दुकान के अंदर घायल मिला था युवक, इलाज के दौरान रीवा में मौत
पुलिस एवं एफएसएल की टीम ने किया मौका मुआयना
सतना। जिले के रामपुर बघेलान थाना क्षेत्र के तिउनी निवासी एक युवक की धारदार हथियार से हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। तुर्की स्टेशन के पास बनी दुकानों के अंदर लहूलुहान हालत में परिजनों को सोमवार की रात मिले राजबहोर कोरी की मंगलवार की सुबह रीवा के संजय गांधी अस्पताल में मौत हो गई। घटना के संबंध में मृतक के पिता संतोष कोरी ने बताया कि सोमवार की दोपहर उनका बेटा अपने परिवार के साथ आधार कार्ड बनवाने घर से निकला था लेकिन कुछ कागजात कम पड़ गए थे, जिसके बाद वह परिवार को एक मंदिर के पास बैठाकर घर वापस आ रहा था लेकिन वह घर नहीं पहुंचा। देर शाम जब परिवार अकेले घर पहुंचा तो परिजनों को उसकी चिंता हुई। परिजनों ने राजबहोर की तलाश शुरू की तो वह तुर्की रेलवे स्टेशन के समीप सूनसान दुकानों में से एक दुकान के अंदर घायल अवस्था में मिला।
पिता ने बताया कि उनके बेटे के सर में गंभीर चोट के निशान थे। घायल अवस्था में वह अपने बेटे को उपचार के लिए रीवा अस्पताल ले गए जहां उसकी मौत हो गई। मृतक के पिता का आरोप है कि उनके बेटे की धारदार हथियार से हत्या की गई है। वह वारदात की निष्पक्ष जांच और आरोपियों को पकड़ने की मांग कर रहे हैं।
*मौके पर पड़ा मिला बल्ड*
उधर, घटना की जानकारी होते ही एसडीओपी, टीआई रामपुर बघेलान समेत एफएसएल की टीम घटनास्थल पहुंची और मौका मुआयना किया। फोरेंसिक टीम को दुकान के अंदर ब्लड के निशान मिले है। फिलहाल पुलिस मौके से साक्ष्य इकट्ठा कर घटना की जांच कर रही है। टीआई संदीप चतुर्वेदी ने बताया कि मृतक के शव का पोस्टमार्टम रीवा में ही तीन डाक्टरों की टीम द्वारा करा कर शव परिजनों को सौंप दिया गया है। अंतिम संस्कार के बाद परिजनों के बयान के आधार पर  आगे की जांच की जाएगी।
*सीएम डॉ. मोहन यादव ने दी बड़ी राहत, 48.32 लाख निजी संपत्तियों की रजिस्ट्री कराएगी सरकार*
*मध्यप्रदेश कैबिनेट ने जनकल्याण के लिए कई अहम फैसले किए* 
*प्रदेश के चहुंमुखी विकास के लिए 21 हजार 485 करोड़ रुपये की स्वीकृति*
*स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन-पंजीयन योजना का वित्तीय भार 3800 करोड़ रुपये राज्य शासन करेगा वहन*
भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2 जून को जन-कल्याण के कई निर्णय लिए। उनके नेतृत्व में हुई कैबिनेट बैठक ने प्रदेश के चहुंमुखी विकास, जन-कल्याण और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए 21 हजार 485 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी। कैबिनेट ने स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026 की स्वीकृति दी। कैबिनेट ने निर्णय लिया कि प्रदेश में स्वामित्व योजना में जिन भू-खण्डधारियों के अधिकार अभिलेख निर्मित किए गए हैं उन्हें आसानी से ऋण उपलब्ध कराने के लिए इन निर्मित अधिकार अभिलेखों का पंजीयन कराया जाए। इसके लिए डीड ऑफ कन्वेयेंस का निष्पादन एवं पंजीयन किया जाएगा, ताकि नागरिक आवश्यकतानुसार गृह निर्माण, व्यवसाय एवं कृषि संक्रियाओं आदि के लिए ऋण प्राप्त कर अपनी आजीविका एवं आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर सकें। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए विशेष अभियान के तहत कार्यवाही पूर्ण की जाएगी। अब तक कुल 68.11 लाख अधिकार अभिलेखों का निर्माण किया गया है। इसमें 48.32 लाख निजी संम्पत्तियां शामिल है। अधिकार अभिलेखों के पंजीयन के लिए नागरिकों से स्टाम्प ड्यूटी अथवा पंजीयन शुल्क नहीं लिया जाएगा। संपूर्ण व्यय राशि 3800 करोड़ रुपये का वहन राज्य शासन करेगा। 
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश पहला राज्य होगा जहां ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी के नागरिकों के भू-खण्ड संबंधी अधिकार सुरक्षित कर उनकी आर्थिक उन्नति के मार्ग को प्रशस्त किया जा रहा है। स्वामिव योजना में मध्यप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी में निवासरत नागरिकों को उनका वैधानिक अधिकार प्रदान करने के लिए अधिकार अभिलेखों का निर्माण ड्रोन तकनीक का उपयोग करते हुए किया गया है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने, प्रक्रिया निर्धारण, समय-समय पर समीक्षा के लिए आयुक्त भू-संसाधन प्रबंधन की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जायेगा। इस समिति में महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक, आयुक्त कोष एवं लेखा, आयुक्त-संचालक पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा प्रबंध संचालक एमपीएसईडीसी, सदस्य होंगे एवं आवश्यकतानुसार विषय विशेषज्ञों को संयोजित किया जा सकेगा। योजना के प्रचार-प्रसार, मुद्रण व्यय एवं जन-जागरुकता गतिविधियों के संचालन के लिए राज्य स्तर पर 10 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। योजना का विस्तृत परिपत्र एवं समय-समय पर आवश्यकतानुसार स्पष्टीकरण आदि जारी करने के लिए राजस्व विभाग को अधिकृत किया गया है।
*लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत लगभग 17 हजार 59 करोड़ रुपये की स्वीकृति*
कैबिनेट ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत लगभग 17 हजार 59 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी। कैबिनेट ने मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध चिकित्सालय योजना के 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतर संचालन के लिए 14,363.95 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की। योजना के अंतर्गत प्रदेश के जन सामान्य को निशुल्क गुणवत्ता पूर्ण स्वास्थ्य सुविधायें मुहैया कराये जाने एवं प्रदेश में चिकित्सा के लिए मानव संसाधन विकसित किए जाने के लिए 12 जिला मुख्यालयों पर मेडिकल कॉलेजों एवं संबद्ध अस्पतालों का संचालन राज्य शासन द्वारा किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज में पीजी पाठ्यक्रम के सुदृढ़ीकरण से संबंधित योजना के लिए 657 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके अंतर्गत प्रदेश में संचालित मेडिकल कॉलेजों में भारत सरकार के आर्थिक सहयोग से राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के मापदंडों के अनुरूप अतिरिक्त अधोसंरचना का निर्माण, नवीन मशीनें एवं उपकरणों के प्रतिस्थापन के फलस्वरूप अतिरिक्त स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम सीटों में वृद्धि होगी। इससे राष्ट्रीय और प्रादेशिक स्तर पर चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के साथ-साथ जन सामान्य को सुदूर ग्रामीण अंचल से जिला स्तर तक चिकित्सा सुविधा के लिए चिकित्सीय मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी। कैबिनेट ने नए चिकित्सा महाविद्यालयों के निर्माण से संबंधित योजना के लिए 1200 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की। स्वीकृति अनुसार उज्जैन ,सिवनी, छतरपुर, दमोह और बुदनी में नए मेडिकल कॉलेजों का भवन निर्माण किया जाएगा। एमबीबीएस सीट्स में वृद्धि की योजना के लिए 838 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। योजना में प्रदेश के संचालित चिकित्सा महाविद्यालयों में अधोसंरचना निर्माण, आधुनिक उपकरणों की स्थापना, पठन-पाठन एवं महाविद्यालयीन गतिविधियों के लिए आवश्यक उपकरण दिए जा सकेंगे। इससे राष्ट्रीय मेडिकल काउंसिल से एमबीबीएस सीटों की वृद्धि की स्वीकृति मिल सकेगी।
*बच्चों को यूनिफॉर्म देने का अहम फैसला*
कैबिनेट ने निर्माणाधीन जिला न्यायालय भवन, पिपल्याहाना, इंदौर के पुनरीक्षित निर्माण कार्य की लागत राशि 411 करोड़ 1 लाख रुपये को पुनरीक्षित कर 626 करोड़ 61 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की। कैबिनेट ने 1-8वीं तक के विद्यार्थियों को सत्र 2026-27 से निविदा प्रक्रिया के माध्यम से सिली-सिलाई यूनिफॉर्म देने का निर्णय लिया है। निविदा प्रक्रिया के लिए मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम को अधिकृत किया गया है। शासकीय शालाओं में पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राओं को शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले 2 जोड़ी यूनिफॉर्म दिया जाना लक्षित है। इससे समय सीमा में विद्यार्थियों को गुणवत्तायुक्त गणवेश प्रदाय सुनिश्चित हो सकेगा।
सतना नियमितीकरण समेत अन्य मांगो को ले कर मंगलवार को जिले के 800 से अधिक स्वास्थ्य संविदाकर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए है। अप्रेजल की प्रतियों को जलकर संविदाकर्मियों ने प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का कहना है कि हाल ही में जारी सेवा आधारित मूल्यांकन संबंधी पत्र उनकी वर्षों की नौकरी के साथ सरकार का छलावा है। नई मूल्यांकन प्रक्रिया के माध्यम से कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव बनाया जा रहा है।
एनएचएम अधिकारी कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि कर्मचारियों की मांगो का शीघ्र निराकरण नहीं हुआ तो आंदोलन का स्वरूप और बड़ा हो जाएगा।
कांग्रेस सरकार के समय मध्यप्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम को बंद करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। आज जब गांवों में सड़क, बिजली, पानी की सुविधाएं बेहतर हो चुकी हैं, तो आवागमन के लिए इसे फिर शुरू करना आवश्यक है।

हमारी सरकार चरणबद्ध तरीके से "मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा" की शुरुआत करने की ओर बढ़ रही है। इस बार रक्षाबंधन पर हमारी बहनें परिवहन विभाग की बसों में सफर करें, इस दिशा में हम प्रयासरत हैं।
आखिर सतना के जलभराव का दोषी कौन?

1 जून 2026 को सतना शहर में हुई हल्की वर्षा ने एक बार फिर नगर की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। बारिश अधिक नहीं थी, फिर भी शहर के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति निर्मित हो गई। सड़कों पर पानी भरने से आम नागरिकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। प्रश्न यह है कि आखिर इस स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है?

जलभराव की तस्वीरें और वीडियो सामने आते ही महापौर योगेश ताम्रकार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। महापौर ने दावा किया कि उन्होंने वर्षा ऋतु से पहले ही नगर निगम आयुक्त को आवश्यक तैयारियों के संबंध में पत्र लिखकर आगाह किया था।

महापौर द्वारा 1 जून 2026 को जारी पत्र के अनुसार, वर्षा पूर्व नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए स्वास्थ्य शाखा ने 25 मार्च 2026 को 60 सफाई कर्मचारियों की भर्ती संबंधी प्रस्तावित फाइल प्रस्तुत की थी। आरोप है कि उक्त फाइल पर आज तक कोई स्वीकृति अथवा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। महापौर का कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक निर्णय लिए गए होते तो वर्तमान जलभराव की समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता था।

पत्र में इसे प्रशासनिक निष्क्रियता का उदाहरण बताते हुए महापौर ने नागरिकों में बढ़ते असंतोष पर भी चिंता व्यक्त की है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय का अभाव क्यों दिखाई देता है? शहर के विकास और नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर दोनों पक्षों को मिलकर कार्य करना चाहिए, किंतु अक्सर आरोप-प्रत्यारोप का दौर ही अधिक दिखाई देता है।

यह भी सत्य है कि महापौर एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि होते हैं, जिनसे जनता सीधे जवाब मांगती है क्योंकि उन्हें जनता ने अपने मतों से चुना है। वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक निर्णयों के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी अधिकारियों पर होती है। जनप्रतिनिधि सुझाव दे सकते हैं, निर्देश दे सकते हैं और प्रयास कर सकते हैं, लेकिन कई मामलों में अंतिम प्रशासनिक कार्रवाई अधिकारियों के माध्यम से ही संभव होती है।

वर्तमान परिस्थितियों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि नगर निगम में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच अपेक्षित तालमेल नहीं है। इसका खामियाजा अंततः सतना की जनता को भुगतना पड़ रहा है। जनता को इससे कोई सरोकार नहीं कि गलती किसकी है; वह केवल इतना जानना चाहती है कि हर वर्ष बारिश के साथ जलभराव की समस्या क्यों सामने आती है और उसका स्थायी समाधान कब होगा।

यदि वास्तव में सफाई कर्मचारियों की भर्ती, नालों की सफाई और जल निकासी की तैयारियों में देरी हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। प्रशासनिक पदों पर बैठे अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों दोनों का दायित्व है कि वे राजनीतिक या व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर शहर के हित में कार्य करें।

सतना की जनता अब आरोपों और बहानों से आगे बढ़कर परिणाम देखना चाहती है। क्योंकि अंततः जनता के लिए न तो फाइलों का बहाना मायने रखता है और न ही विभागीय खींचतान; उसके लिए महत्वपूर्ण है एक ऐसा शहर, जहां हल्की बारिश भी संकट का कारण न बने।
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