"नारी मन की संवेदना" विषय पर महिला साहित्यकार संस्था का सफल आभासी साहित्यिक आयोजन
सुरेंद्र ठाकुर / Pangi Live News
चम्बा, 28 जून।
महिला साहित्यकार संस्था, हिमाचल प्रदेश द्वारा "नारी मन की संवेदना" विषय पर एक गरिमामय आभासी साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से साहित्यकारों, शिक्षाविदों एवं साहित्य प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) सरू, चम्बा की छात्रा कु. अंजलि द्वारा प्रस्तुत माँ सरस्वती वंदना से हुआ, जिसने पूरे आयोजन को आध्यात्मिक एवं साहित्यिक गरिमा प्रदान की।
कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन महिला साहित्यकार संस्था, जिला चम्बा की जिलाध्यक्ष डॉ. कविता बिजलवान ने किया। उन्होंने विषय की भूमिका प्रस्तुत करते हुए कहा कि नारी संवेदनाओं की धुरी है और उसकी अनुभूतियाँ समाज को मानवीय मूल्यों से जोड़ती हैं।
मुख्य अतिथि डॉ. मृदुला, केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला ने अपने संबोधन में कहा कि नारी की संवेदनशीलता परिवार, समाज और राष्ट्र को सशक्त बनाने की आधारशिला है। उन्होंने साहित्य को सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बताया।
इस अवसर पर महिला साहित्यकार संस्था की सम्मानित सदस्य एवं कुल्लू निवासी श्रीमती राजबाला भारतीय के दो दिन पूर्व हुए निधन पर सभी प्रतिभागियों ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
विशिष्ट वक्ता श्रीमती जिंदी देवी, सेवानिवृत्त खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी, जिला बिलासपुर ने नारी शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक उत्तरदायित्व पर अपने विचार रखे। वहीं श्रीमती रीमा शर्मा (जिला कुल्लू) ने नारी के मनोभावों, संघर्षों तथा साहित्य में उनकी सशक्त अभिव्यक्ति पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्था की संस्थापक एवं प्रांत अध्यक्ष डॉ. रीता सिंह ने कहा कि साहित्य समाज की संवेदनाओं का दर्पण है तथा महिला साहित्यकारों की सृजनशीलता समाज में नई चेतना, सकारात्मक सोच और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने महिलाओं की साहित्यिक प्रतिभा को निरंतर प्रोत्साहित करने के संस्था के संकल्प को दोहराया।
कार्यक्रम में डॉ. इंदू परासर, स्वपना जसवाल, सोमलता ठाकुर, सुषमा खजुरिया, किरण बाला, संतोष कालरा, शबनम शर्मा, प्रोमिल भारद्वाज, शक्ति चड्ढा सहित अनेक साहित्यकारों ने सहभागिता की। अंत में सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया। आयोजन साहित्य, संवेदना और सामाजिक सरोकारों के सुंदर समन्वय का प्रेरणादायी उदाहरण रहा।
Chamba, Chamba | Jun 28, 2026