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केन नदी बांदा में आज दिनांक 15/07/2026 का जल स्तर देखें कोई खतरे की बात नहीं है। बहुत ही सुन्दर दृश्य। #UP90Creator #kenriver

Banda, Banda | Jul 15, 2026

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बाँदा रोटी बैंक सोसाइटी की मासिक बैठक सम्पन्न, उत्कृष्ट कार्य करने वाले सदस्य हुए सम्मानित 🌿
बाँदा। बाँदा रोटी बैंक सोसाइटी की मासिक बैठक शनिवार, 8 अगस्त 2026 को पीली कोठी स्थित होटल कम्फर्ट इन में आयोजित हुई। बैठक में संगठन के सामाजिक एवं जनसेवा के कार्यों की समीक्षा करते हुए जरूरतमंदों तक सेवा को और अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एसडीएफओ बाँदा अनुभव सिंह ने वृक्षारोपण अभियान में सक्रिय योगदान देने वाले सदस्यों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। वहीं संगठन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सदस्यों को उपहार एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
🌱 बैठक में नए सदस्यों का स्वागत किया गया तथा बेहतर कार्य करने वाले सदस्यों को उनकी जिम्मेदारियों में पदोन्नति दी गई। संगठन के लिए विशेष सहयोग करने वाले अभिषेक निषाद एवं मुसर्रत अली को भी सम्मानित किया गया।
संगठन मंत्री सुनील सक्सेना ने सभी सदस्यों से एकजुट होकर सेवा कार्यों को आगे बढ़ाने की अपील की। सह संरक्षक चंद्रमौली भारद्वाज ने संगठन को हरसंभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया।
अंत में अध्यक्ष रिजवान अली ने सभी अतिथियों, पदाधिकारियों एवं सदस्यों का आभार व्यक्त किया।
 बाँदा रोटी बैंक सोसाइटी — सेवा, सहयोग और इंसानियत की राह पर निरंतर प्रयास।
#BandaRotiBank #BandaNews #SamajSeva #BandaUttarPradesh #RotiBankSociety

बाँदा रोटी बैंक सोसाइटी की मासिक बैठक सम्पन्न, उत्कृष्ट कार्य करने वाले सदस्य हुए सम्मानित 🌿 बाँदा। बाँदा रोटी बैंक सोसाइटी की मासिक बैठक शनिवार, 8 अगस्त 2026 को पीली कोठी स्थित होटल कम्फर्ट इन में आयोजित हुई। बैठक में संगठन के सामाजिक एवं जनसेवा के कार्यों की समीक्षा करते हुए जरूरतमंदों तक सेवा को और अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एसडीएफओ बाँदा अनुभव सिंह ने वृक्षारोपण अभियान में सक्रिय योगदान देने वाले सदस्यों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। वहीं संगठन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सदस्यों को उपहार एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। 🌱 बैठक में नए सदस्यों का स्वागत किया गया तथा बेहतर कार्य करने वाले सदस्यों को उनकी जिम्मेदारियों में पदोन्नति दी गई। संगठन के लिए विशेष सहयोग करने वाले अभिषेक निषाद एवं मुसर्रत अली को भी सम्मानित किया गया। संगठन मंत्री सुनील सक्सेना ने सभी सदस्यों से एकजुट होकर सेवा कार्यों को आगे बढ़ाने की अपील की। सह संरक्षक चंद्रमौली भारद्वाज ने संगठन को हरसंभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया। अंत में अध्यक्ष रिजवान अली ने सभी अतिथियों, पदाधिकारियों एवं सदस्यों का आभार व्यक्त किया। बाँदा रोटी बैंक सोसाइटी — सेवा, सहयोग और इंसानियत की राह पर निरंतर प्रयास। #BandaRotiBank #BandaNews #SamajSeva #BandaUttarPradesh #RotiBankSociety

Banda, Banda | Aug 8, 2026

देशी बीजों का विलुप्त होना बड़ा संकट, संरक्षण के लिए किसानों ने किया आह्वान
बांदा। देशी बीजों का लगातार विलुप्त होना किसानों, कृषि परंपराओं और आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। गांवों में कभी आसानी से उपलब्ध रहने वाले पारंपरिक और देशी बीज अब धीरे-धीरे किसानों के खेतों और घरों से गायब होते जा रहे हैं। बांदा के प्रगतिशील एवं जैविक किसानों ने देशी बीजों के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए किसान भाइयों से इन्हें बचाने और आपस में आदान-प्रदान करने की अपील की है।
किसानों का कहना है कि देशी बीज हमारी कृषि विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन बीजों को किसान पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुरक्षित रखते और अगली फसल के लिए इस्तेमाल करते आए हैं। लेकिन आधुनिक कृषि व्यवस्था में हाइब्रिड बीजों के बढ़ते चलन के कारण पारंपरिक देशी बीजों का इस्तेमाल लगातार कम हुआ है।
प्रगतिशील किसानों के मुताबिक, यदि देशी बीज एक बार पूरी तरह समाप्त हो गए तो उन्हें दोबारा उसी मूल स्वरूप में प्राप्त करना बेहद कठिन हो सकता है। इसलिए जिन किसानों के पास अभी भी पुराने और पारंपरिक देशी बीज सुरक्षित हैं, उनकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
किसानों ने कहा कि हाइब्रिड बीजों के कारण किसान हर सीजन में बाजार से नए बीज खरीदने के लिए अधिक निर्भर होते जा रहे हैं। इससे खेती की लागत बढ़ने और किसानों की आर्थिक स्थिति पर दबाव पड़ने की चिंता भी जताई गई है। हालांकि किसानों ने यह भी माना कि हाइब्रिड बीजों के अपने कृषि उपयोग और फायदे हैं, लेकिन पारंपरिक देशी बीजों का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है।
आपस में बीजों का करें आदान-प्रदान
बांदा के जैविक और प्रगतिशील किसानों ने किसान भाइयों से आह्वान किया कि जिनके पास देशी धान, गेहूं, दाल, तिलहन, सब्जियों या अन्य फसलों के पारंपरिक बीज उपलब्ध हैं, वे उन्हें सुरक्षित रखें और दूसरे किसानों के साथ उनका आदान-प्रदान करें।
किसानों का मानना है कि गांव स्तर पर देशी बीज बैंक तैयार किए जाएं तो पारंपरिक बीजों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे किसानों की बाजार पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ स्थानीय कृषि ज्ञान और जैव विविधता को भी बचाया जा सकेगा।
आने वाली पीढ़ी के लिए बचाना होगा कृषि का यह खजाना
प्रगतिशील किसानों ने कहा कि देशी बीज केवल खेती की सामग्री नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही किसानों की परंपरा, अनुभव और कृषि ज्ञान की विरासत हैं। इन्हें बचाना सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने किसान भाइयों से संकल्प लेने की अपील की कि जिस किसान के पास देशी बीज हैं, वह उन्हें नष्ट होने से बचाएगा, सुरक्षित रखेगा और जरूरतमंद किसानों के साथ साझा करेगा।
किसानों का संदेश है कि आज यदि देशी बीजों को संरक्षित करने के लिए प्रयास नहीं किए गए तो आने वाली पीढ़ियों को पारंपरिक कृषि विरासत से वंचित होना पड़ सकता है। इसलिए देशी बीज बचाना, जैव विविधता बचाना और किसान की आत्मनिर्भरता को मजबूत करना—आज की बड़ी जरूरत है।
प्रमुख मुद्दे:
#देसी_बीज_संकट #हाइब्रिड_बीज #किसानों_पर_संकट #शुद्ध_आहार_का_संकट #किसानों_की_लागत_बढ़ाना #किसान_की_आर्थिक_स्थिति #बाजार_पर_निर्भरता #जैविक_खेती #बांदा #बुंदेलखंड

देशी बीजों का विलुप्त होना बड़ा संकट, संरक्षण के लिए किसानों ने किया आह्वान बांदा। देशी बीजों का लगातार विलुप्त होना किसानों, कृषि परंपराओं और आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। गांवों में कभी आसानी से उपलब्ध रहने वाले पारंपरिक और देशी बीज अब धीरे-धीरे किसानों के खेतों और घरों से गायब होते जा रहे हैं। बांदा के प्रगतिशील एवं जैविक किसानों ने देशी बीजों के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए किसान भाइयों से इन्हें बचाने और आपस में आदान-प्रदान करने की अपील की है। किसानों का कहना है कि देशी बीज हमारी कृषि विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन बीजों को किसान पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुरक्षित रखते और अगली फसल के लिए इस्तेमाल करते आए हैं। लेकिन आधुनिक कृषि व्यवस्था में हाइब्रिड बीजों के बढ़ते चलन के कारण पारंपरिक देशी बीजों का इस्तेमाल लगातार कम हुआ है। प्रगतिशील किसानों के मुताबिक, यदि देशी बीज एक बार पूरी तरह समाप्त हो गए तो उन्हें दोबारा उसी मूल स्वरूप में प्राप्त करना बेहद कठिन हो सकता है। इसलिए जिन किसानों के पास अभी भी पुराने और पारंपरिक देशी बीज सुरक्षित हैं, उनकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। किसानों ने कहा कि हाइब्रिड बीजों के कारण किसान हर सीजन में बाजार से नए बीज खरीदने के लिए अधिक निर्भर होते जा रहे हैं। इससे खेती की लागत बढ़ने और किसानों की आर्थिक स्थिति पर दबाव पड़ने की चिंता भी जताई गई है। हालांकि किसानों ने यह भी माना कि हाइब्रिड बीजों के अपने कृषि उपयोग और फायदे हैं, लेकिन पारंपरिक देशी बीजों का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है। आपस में बीजों का करें आदान-प्रदान बांदा के जैविक और प्रगतिशील किसानों ने किसान भाइयों से आह्वान किया कि जिनके पास देशी धान, गेहूं, दाल, तिलहन, सब्जियों या अन्य फसलों के पारंपरिक बीज उपलब्ध हैं, वे उन्हें सुरक्षित रखें और दूसरे किसानों के साथ उनका आदान-प्रदान करें। किसानों का मानना है कि गांव स्तर पर देशी बीज बैंक तैयार किए जाएं तो पारंपरिक बीजों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे किसानों की बाजार पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ स्थानीय कृषि ज्ञान और जैव विविधता को भी बचाया जा सकेगा। आने वाली पीढ़ी के लिए बचाना होगा कृषि का यह खजाना प्रगतिशील किसानों ने कहा कि देशी बीज केवल खेती की सामग्री नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही किसानों की परंपरा, अनुभव और कृषि ज्ञान की विरासत हैं। इन्हें बचाना सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने किसान भाइयों से संकल्प लेने की अपील की कि जिस किसान के पास देशी बीज हैं, वह उन्हें नष्ट होने से बचाएगा, सुरक्षित रखेगा और जरूरतमंद किसानों के साथ साझा करेगा। किसानों का संदेश है कि आज यदि देशी बीजों को संरक्षित करने के लिए प्रयास नहीं किए गए तो आने वाली पीढ़ियों को पारंपरिक कृषि विरासत से वंचित होना पड़ सकता है। इसलिए देशी बीज बचाना, जैव विविधता बचाना और किसान की आत्मनिर्भरता को मजबूत करना—आज की बड़ी जरूरत है। प्रमुख मुद्दे: #देसी_बीज_संकट #हाइब्रिड_बीज #किसानों_पर_संकट #शुद्ध_आहार_का_संकट #किसानों_की_लागत_बढ़ाना #किसान_की_आर्थिक_स्थिति #बाजार_पर_निर्भरता #जैविक_खेती #बांदा #बुंदेलखंड

Banda, Banda | Aug 8, 2026

खजाने की तलाश में जेसीबी से खेत की खुदाई का आरोप, पुलिस से कार्रवाई की मांग
बांदा। थाना गिरवां क्षेत्र के स्योंढा गांव निवासी अशरफ खान पुत्र रशीद अहमद खान ने चौकी इंचार्ज विन्ध्वासिनी देवी को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि उनके खेत में अज्ञात लोगों द्वारा जेसीबी मशीन से अवैध खुदाई की गई है।
प्रार्थना पत्र के अनुसार अशरफ खान की लगभग दो बीघा कृषि भूमि गाटा संख्या 198, अकबरपुर स्योंढा, जनपद बांदा में स्थित है। उनके बटाईदार ने उन्हें सूचना दी कि खेत में लगा एक बबूल का पेड़ गिरा दिया गया है तथा पुराने पत्थरों से बना चबूतरा भी ध्वस्त कर दिया गया है। इसके अलावा खेत में जेसीबी मशीन से बड़ा गड्ढा खोदा गया है।
अशरफ खान का कहना है कि घटनास्थल की स्थिति देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि किसी व्यक्ति या समूह ने खजाने की तलाश के उद्देश्य से खेत की खुदाई की है। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में पहले भी खजाने की लालच में जमीन की खुदाई की घटनाएं सामने आती रही हैं और खजाना मिलने की चर्चाएं भी होती रही हैं।
पीड़ित के भाई सईद अहमद खान ने बताया कि स्योंढा क्षेत्र ऐतिहासिक महत्व का रहा है। यह इलाका पूर्व में एक रियासत का हिस्सा माना जाता है, जहां आज भी कई पुराने किले और ऐतिहासिक संरचनाएं मौजूद हैं। इसी कारण समय-समय पर खजाने की अफवाहों के चलते अवैध खुदाई की घटनाएं होने की बातें सामने आती रहती हैं।
पीड़ित ने चौकी इंचार्ज विन्ध्वासिनी देवी, थाना गिरवां से मामले की निष्पक्ष जांच कर अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करते हुए आवश्यक कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की है। पुलिस ने प्रार्थना पत्र प्राप्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
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खजाने की तलाश में जेसीबी से खेत की खुदाई का आरोप, पुलिस से कार्रवाई की मांग बांदा। थाना गिरवां क्षेत्र के स्योंढा गांव निवासी अशरफ खान पुत्र रशीद अहमद खान ने चौकी इंचार्ज विन्ध्वासिनी देवी को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि उनके खेत में अज्ञात लोगों द्वारा जेसीबी मशीन से अवैध खुदाई की गई है। प्रार्थना पत्र के अनुसार अशरफ खान की लगभग दो बीघा कृषि भूमि गाटा संख्या 198, अकबरपुर स्योंढा, जनपद बांदा में स्थित है। उनके बटाईदार ने उन्हें सूचना दी कि खेत में लगा एक बबूल का पेड़ गिरा दिया गया है तथा पुराने पत्थरों से बना चबूतरा भी ध्वस्त कर दिया गया है। इसके अलावा खेत में जेसीबी मशीन से बड़ा गड्ढा खोदा गया है। अशरफ खान का कहना है कि घटनास्थल की स्थिति देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि किसी व्यक्ति या समूह ने खजाने की तलाश के उद्देश्य से खेत की खुदाई की है। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में पहले भी खजाने की लालच में जमीन की खुदाई की घटनाएं सामने आती रही हैं और खजाना मिलने की चर्चाएं भी होती रही हैं। पीड़ित के भाई सईद अहमद खान ने बताया कि स्योंढा क्षेत्र ऐतिहासिक महत्व का रहा है। यह इलाका पूर्व में एक रियासत का हिस्सा माना जाता है, जहां आज भी कई पुराने किले और ऐतिहासिक संरचनाएं मौजूद हैं। इसी कारण समय-समय पर खजाने की अफवाहों के चलते अवैध खुदाई की घटनाएं होने की बातें सामने आती रहती हैं। पीड़ित ने चौकी इंचार्ज विन्ध्वासिनी देवी, थाना गिरवां से मामले की निष्पक्ष जांच कर अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करते हुए आवश्यक कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की है। पुलिस ने प्रार्थना पत्र प्राप्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है। #BandaNews #GirwanPolice #SyondhaVillage #IllegalExcavation #UPNews

Banda, Banda | Aug 8, 2026