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BANDA NEWS

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बाँदा का ऐतिहासिक मोहर्रम : 9वीं तारीख़ पर बाबू बख्श और रामा के इमामबाड़ों में खेला गया अलाव, रात भर चलता रहा पारंपरिक ढालों का मिलाप
बाँदा शहर में मोहर्रम की दस दिवसीय धार्मिक एवं पारंपरिक श्रृंखला के अंतर्गत 9वीं मोहर्रम पर सदियों पुरानी परंपराओं का भव्य और भावपूर्ण आयोजन हुआ। बाबू बख्श के इमामबाड़े और रामा के इमामबाड़े में अकीदतमंदों ने पूरी श्रद्धा के साथ अलाव खेलकर शहीदाने कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश की।
9वीं मोहर्रम की रात बाँदा में ढालों के मिलाप की ऐतिहासिक परंपरा का विशेष महत्व होता है। लगभग सभी इमामबाड़ों में आसपास के मोहल्लों और क्षेत्रों से निकली ढालें पहुँचती हैं, जहाँ उनका पारंपरिक मिलाप कराया जाता है। यह सिलसिला पूरी रात चलता रहता है और अज़ादार एक इमामबाड़े से दूसरे इमामबाड़े तक पहुँचकर इस ऐतिहासिक रस्म में शामिल होते हैं।
विशेष रूप से रामा के इमामबाड़े में विभिन्न मोहल्लों और इमामबाड़ों से निकली पारंपरिक ढालों का भव्य मिलाप होता है, जिसे देखने के लिए हजारों लोग पूरी रात मौजूद रहते हैं। यह दृश्य बाँदा की मोहर्रम परंपरा की सबसे अनूठी और ऐतिहासिक पहचान माना जाता है।
इसके साथ ही बाबू बख्श के इमामबाड़े और रामा के इमामबाड़े में अलाव की रस्म अदा की गई। नौहाख्वानी, मातम और "या हुसैन (अ.स.)" की सदाओं से पूरा वातावरण गम, अकीदत और इमाम हुसैन (अ.स.) की याद में सराबोर रहा।
बाँदा का मोहर्रम केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गंगा-जमुनी तहज़ीब, आपसी भाईचारे, सामाजिक सौहार्द और साझा संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। यहाँ सभी समुदायों के लोग बढ़-चढ़कर इन परंपराओं में सहभागी बनते हैं, जो शहर की ऐतिहासिक विरासत को और भी मजबूत बनाती हैं।
इमाम हुसैन (अ.स.) की कुर्बानी हमें सत्य, न्याय, इंसानियत और अत्याचार के विरुद्ध डटकर खड़े होने का संदेश देती है। यही संदेश आज भी बाँदा की ऐतिहासिक मोहर्रम परंपराओं के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ रहा है।
या हुसैन (अ.स.)
बाँदा की ऐतिहासिक मोहर्रम परंपरा हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। 
UP 90 Creator
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बाँदा का ऐतिहासिक मोहर्रम : 9वीं तारीख पर बाबू बख्श और रामा के इमामबाड़ों में खेला गया अलाव, निकलीं पारंपरिक ढालें
बाँदा शहर में मोहर्रम की दस दिवसीय धार्मिक एवं पारंपरिक श्रृंखला के अंतर्गत बुधवार को 9वीं मोहर्रम पर बाबू बख्श के इमामबाड़े और रामा के इमामबाड़े में वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार अलाव खेला गया। इस दौरान शहर के विभिन्न मोहल्लों से पारंपरिक ढालें भी निकाली गईं, जिनमें बड़ी संख्या में अज़ादारों और श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
अलाव की रस्म देखने के लिए दोनों इमामबाड़ों पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी। अज़ादारों ने पूरी अकीदत के साथ अलाव की परंपरा निभाई और इमाम हुसैन (अ.स.) तथा शहीदाने कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश की। नौहाख्वानी, मातम और "या हुसैन" की सदाओं से पूरा वातावरण गम और श्रद्धा से सराबोर रहा।
बाँदा का मोहर्रम अपनी ऐतिहासिक और अनूठी परंपराओं के लिए पूरे बुंदेलखंड में विशेष पहचान रखता है। विशेष रूप से बाबू बख्श का इमामबाड़ा और रामा का इमामबाड़ा 9वीं मोहर्रम के अलाव की परंपरा के लिए प्रसिद्ध हैं। यहाँ आयोजित धार्मिक रस्में गंगा-जमुनी तहज़ीब, आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की मिसाल पेश करती हैं।
मोहर्रम के ये आयोजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि इमाम हुसैन (अ.स.) की कुर्बानी, सत्य, न्याय, इंसानियत और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष के संदेश को भी जन-जन तक पहुँचाते हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी सभी समुदायों के लोगों की सहभागिता ने बाँदा की साझा संस्कृति को और मजबूत किया।
या हुसैन (अ.स.)
बाँदा की ऐतिहासिक मोहर्रम परंपरा हमारी सांस्कृतिक विरासत है, जिसे संजोकर रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
UP 90 Creator 
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सेवा ही सबसे बड़ी इबादत — बाँदा रोटी बैंक की एक और प्रेरणादायक पहल
गरीबों, बेसहारा और ज़रूरतमंद लोगों की सेवा के अपने संकल्प को आगे बढ़ाते हुए बाँदा रोटी बैंक सोसाइटी की जिम्मेदार कोषाध्यक्ष श्रीमती रेणुका गुप्ता जी ने दिनांक 24 जून 2026 को अपने निर्धारित दिन और समय पर अपने घर से 10 पैकेट ताज़ा भोजन तैयार कर संस्था को उपलब्ध कराया।
इसके अतिरिक्त निषाद फर्नीचर की ओर से 2 पैकेट भोजन तथा आसिफ़ भाई की ओर से 4 पैकेट भोजन प्राप्त हुए। इस प्रकार कुल 16 पैकेट भोजन तैयार कर ज़रूरतमंदों तक पहुँचाने के लिए संस्था के अध्यक्ष रिज़वान अली, उपाध्यक्ष मोहम्मद सलीम, उप शाखा प्रमुख अलीमुद्दीन (छिपटहरी) तथा सदस्य नसीर खान को सौंपे गए। टीम ने सभी भोजन पैकेट ज़रूरतमंद और जरूरतमंद परिवारों तक पहुँचाकर इंसानियत और सेवा की मिसाल पेश की।
बाँदा रोटी बैंक सोसाइटी लगातार समाज के सहयोग से भूखे और असहाय लोगों तक भोजन पहुँचाने का कार्य कर रही है। यह सेवा अभियान समाज के सहयोग और दानदाताओं की भागीदारी से ही संभव हो पा रहा है।
🤝 आप भी बन सकते हैं इस नेक काम का हिस्सा
यदि आप भोजन, कपड़े या आर्थिक सहयोग के माध्यम से बाँदा रोटी बैंक सोसाइटी से जुड़कर जरूरतमंदों की मदद करना चाहते हैं, तो कृपया निम्नलिखित मोबाइल नंबरों पर संपर्क करें:
📞 9451988451
📞 8318456975
आइए, मिलकर कोई भी भूखा न सोए—इंसानियत की इस मुहिम में अपना योगदान दें।
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कटरा कालिंजर (जनपद बाँदा) में मोहर्रम के अवसर पर निकला भव्य ताजिया, अकीदत और भाईचारे की दिखी अनूठी मिसाल।
मोहर्रम के पवित्र अवसर पर कटरा कालिंजर में हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और शहीदाने कर्बला की याद में अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के साथ भव्य ताजिया निकाला गया। सफेद रंग की आकर्षक कारीगरी, सुंदर गुंबदों, रंगीन शीशों और पारंपरिक सजावट से सुसज्जित यह ताजिया सभी के आकर्षण का केंद्र रहा।
जुलूस में बड़ी संख्या में अज़ादारों, बुज़ुर्गों, युवाओं और बच्चों ने पूरे अनुशासन और श्रद्धा के साथ भाग लिया। पूरे मार्ग में "या हुसैन" की सदाएँ गूँजती रहीं और लोगों ने शहीदाने कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश की। स्थानीय लोगों ने भी जुलूस का स्वागत कर आपसी प्रेम, सद्भाव और गंगा-जमुनी तहज़ीब का परिचय दिया।
मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि सत्य, न्याय, इंसानियत, त्याग और अत्याचार के विरुद्ध डटकर खड़े रहने का संदेश भी देता है। कर्बला की घटना आज भी पूरी दुनिया को यह सिखाती है कि सच्चाई और इंसाफ की राह पर चलने वालों का बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाता।
कटरा कालिंजर की यह ऐतिहासिक परंपरा वर्षों से धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे का प्रतीक बनी हुई है। हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग इस पवित्र आयोजन में शामिल होकर हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके 72 साथियों की शहादत को याद करते हैं तथा उनके आदर्शों से प्रेरणा लेते हैं।
या हुसैन (अ.स.) सलाम शहीदाने कर्बला।
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भीषण गर्मी में सेवा की मिसाल: बांदा में 57वें दिन भी जारी रहा शीतल जल व छबील वितरण अभियान
बांदा। बुंदेलखंड की तपती धरती पर इस समय जहां गर्म हवाएं और लू लोगों को बेहाल कर रही हैं, वहीं बांदा जनपद में सेवा और मानवता की एक अनोखी तस्वीर भी देखने को मिल रही है। जिलाधिकारी बांदा श्री अमित आसेरी की प्रेरणा से जनपद में पिछले 57 दिनों से लगातार राहत एवं सेवा अभियान संचालित किया जा रहा है।
इस अभियान के तहत विभिन्न सामाजिक संगठनों, समाजसेवियों और प्रशासनिक विभागों के सहयोग से शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में राहगीरों और जरूरतमंदों को शीतल जल, छबील, पेठा, बिस्किट, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक तथा झलमुरी जैसी सामग्री वितरित की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य केवल प्यास बुझाना नहीं, बल्कि भीषण गर्मी और हीटवेव से लोगों को सुरक्षित रखना भी है।
इसी क्रम में आज जजी चौराहे पर नगर पालिका परिषद बांदा द्वारा दो दिवसीय छबील वितरण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर के दौरान राहगीरों को शीतल पेयजल और छबील वितरित कर गर्मी से राहत प्रदान की गई।
कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती मालती बासू, अधिशासी अधिकारी श्री चंद्र चौधरी, समाजसेवी शूटर रामेंद्र शर्मा, सुनील सक्सेना सहित कई गणमान्य नागरिक, अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। सभी ने स्वयं सेवा भाव से राहगीरों को शीतल जल वितरित किया।
यह सेवा अभियान इस बात का संदेश दे रहा है कि कठिन परिस्थितियों में भी मानवता सबसे बड़ी शक्ति है, और एक प्यासे को राहत देना सबसे बड़ा पुण्य कार्य है। बांदा का यह अभियान आज पूरे प्रदेश में प्रेरणा का स्रोत बनता जा रहा है।
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चरखारी की ऐतिहासिक धरोहर ने फिर पहनी शाही शान
बुंदेलखंड की ऐतिहासिक नगरी चरखारी के लिए यह गर्व और खुशी का क्षण है। वर्षों से उपेक्षा और जर्जर अवस्था में खड़ा ड्योढ़ी महल, जिसे सन् 1908 में महाराजा मलखान सिंह ने बनवाया था, अब एक बार फिर अपनी शाही पहचान के साथ जीवंत हो उठा है।
इस ऐतिहासिक इमारत का जीर्णोद्धार इसकी मूल वास्तुकला और ऐतिहासिक स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए किया गया है। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित इस आलीशान हेरिटेज होटल ने न केवल एक विरासत को नया जीवन दिया है, बल्कि चरखारी रियासत के गौरवशाली इतिहास को भी फिर से लोगों के सामने ला खड़ा किया है।
यह पुनर्स्थापन केवल एक भवन का नवीनीकरण नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर, इतिहास और पहचान को संरक्षित करने का प्रेरणादायक उदाहरण है। अब आने वाली पीढ़ियाँ उस राजसी वैभव को अपनी आँखों से देख सकेंगी, जिसकी कहानियाँ अब तक केवल बड़े-बुजुर्गों की जुबानी सुनने को मिलती थीं।
ऐसी पहलें बुंदेलखंड के पर्यटन, स्थानीय रोजगार और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को नई दिशा देंगी। उम्मीद है कि क्षेत्र की अन्य ऐतिहासिक धरोहरों का भी इसी तरह संरक्षण और पुनर्जीवन होगा।
"विरासत तभी जीवित रहती है, जब उसे संजोया जाए। चरखारी का ड्योढ़ी महल इसका सुंदर उदाहरण बन गया है।"
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बाँदा का ऐतिहासिक मोहर्रम : 9वीं तारीख पर बाबू बख्श और रामा के इमामबाड़ों में खेला गया अलाव, निकलीं पारंपरिक ढालें
बाँदा शहर में मोहर्रम की दस दिवसीय धार्मिक एवं पारंपरिक श्रृंखला के अंतर्गत बुधवार को 9वीं मोहर्रम पर बाबू बख्श के इमामबाड़े और रामा के इमामबाड़े में वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार अलाव खेला गया। इस दौरान शहर के विभिन्न मोहल्लों से पारंपरिक ढालें भी निकाली गईं, जिनमें बड़ी संख्या में अज़ादारों और श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
अलाव की रस्म देखने के लिए दोनों इमामबाड़ों पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी। अज़ादारों ने पूरी अकीदत के साथ अलाव की परंपरा निभाई और इमाम हुसैन (अ.स.) तथा शहीदाने कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश की। नौहाख्वानी, मातम और "या हुसैन" की सदाओं से पूरा वातावरण गम और श्रद्धा से सराबोर रहा।
बाँदा का मोहर्रम अपनी ऐतिहासिक और अनूठी परंपराओं के लिए पूरे बुंदेलखंड में विशेष पहचान रखता है। विशेष रूप से बाबू बख्श का इमामबाड़ा और रामा का इमामबाड़ा 9वीं मोहर्रम के अलाव की परंपरा के लिए प्रसिद्ध हैं। यहाँ आयोजित धार्मिक रस्में गंगा-जमुनी तहज़ीब, आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की मिसाल पेश करती हैं।
मोहर्रम के ये आयोजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि इमाम हुसैन (अ.स.) की कुर्बानी, सत्य, न्याय, इंसानियत और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष के संदेश को भी जन-जन तक पहुँचाते हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी सभी समुदायों के लोगों की सहभागिता ने बाँदा की साझा संस्कृति को और मजबूत किया।
या हुसैन (अ.स.)
बाँदा की ऐतिहासिक मोहर्रम परंपरा हमारी सांस्कृतिक विरासत है, जिसे संजोकर रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
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अब प्राइवेट स्कूलों की मनमानी नहीं चलेगी!
ए. एस. नोमानी का गुस्सा: शिक्षा के नाम पर लूट कब तक?
हर नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही हजारों अभिभावकों को भारी आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ता है। कई निजी स्कूलों पर आरोप लगते हैं कि वे अभिभावकों को एक तय दुकान से ही महंगी किताबें, कॉपियां, यूनिफॉर्म और अन्य सामग्री खरीदने के लिए बाध्य करते हैं। इसके साथ ही प्रवेश शुल्क और अन्य मदों में भी अतिरिक्त खर्च का दबाव महसूस किया जाता है।
बुंदेलखंड इंसाफ सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए. एस. नोमानी ने इस मुद्दे पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार का आर्थिक शोषण स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि यदि कोई स्कूल किसी विशेष दुकान से किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए दबाव बनाता है, तो यह अभिभावकों के अधिकारों का उल्लंघन है।
उन्होंने मांग की कि:
सभी स्कूलों में फीस और अन्य सभी शुल्कों की पारदर्शी रसीद अनिवार्य हो।
किसी एक दुकान से किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने की बाध्यता समाप्त की जाए।
गुणवत्तापूर्ण और किफायती किताबें सभी छात्रों को उपलब्ध कराई जाएं।
सरकारी और निजी विद्यालयों के लिए समान एवं पारदर्शी नियम लागू किए जाएं, ताकि सभी बच्चों को समान अवसर मिल सके।
उन्होंने यह भी कहा कि गरीब परिवारों पर बढ़ते शैक्षणिक खर्च का सबसे अधिक असर पड़ता है और शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो हर बच्चे के लिए सुलभ और न्यायसंगत हो।
यदि किसी निजी स्कूल द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जाता है, तो संबंधित कानूनों के अनुसार उसके विरुद्ध कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान हो सकता है। हालांकि, प्रत्येक मामले में कार्रवाई संबंधित राज्य के लागू नियमों और सक्षम प्राधिकारी की जांच पर निर्भर करती है।
आपकी राय क्या है?
क्या निजी स्कूलों द्वारा किताबें और यूनिफॉर्म किसी विशेष दुकान से खरीदने की शर्त पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें।
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शहीदाने कर्बला की याद में बाँदा रोटी बैंक द्वारा किया गया ठंडा जल वितरण सेवा कार्यक्रम

आज दिनांक 23/06/2026 (मंगलवार) को बाँदा रोटी बैंक सोसाइटी के तत्वावधान में, शहीदाने कर्बला की याद में मोहर्रम की सातवीं के अवसर पर एक सेवा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम बाँदा रोटी बैंक के जिला कार्यालय, जिला परिषद परिसर में सम्पन्न हुआ।
इस आयोजन का नेतृत्व संरक्षक जनाब शेख सादी जमा साहब एवं सह संरक्षक श्री चंद्रमौलि भारद्वाज जी के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बाँदा रोटी बैंक के सदस्य जगदीश श्रीवास द्वारा की गई तथा अलीमुद्दीन (उप शाखा प्रमुख, छिप्तहरी) के विशेष नेतृत्व में ठंडा जल वितरण सेवा संपन्न हुई।
भीषण गर्मी और मोहर्रम के अवसर पर आए आज़मीनों एवं राहगीरों को ठंडा जल उपलब्ध कराया गया, जिससे लोगों ने अपनी प्यास बुझाई और बाँदा रोटी बैंक की टीम को दुआओं एवं आशीर्वाद से नवाज़ा।
इस सेवा कार्य में संगठन के अनेक पदाधिकारी, सदस्य एवं समाजसेवियों ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया—
अध्यक्ष: रिज़वान अली
उपाध्यक्ष: मोइनुद्दीन फ़ारूक़ी, मोहम्मद सलीम
सचिव: मोहम्मद इदरीश
महामंत्री: मोहम्मद अज़हर
संगठन मंत्री: सुनील सक्सेना
कार्यालय प्रभारी: मोहम्मद शमीम
सोशल मीडिया प्रभारी: अख़्तर किरमानी
शाखा प्रमुख:
खाईपार: इरफान खान
मढ़िया नाका: मोहम्मद याक़ूब
गूलर नाका: मोहम्मद हामिद
उप शाखा प्रमुख: अलीमुद्दीन (छिप्तहरी)
समाजसेवी एवं सदस्यगण:
तुलसीदास पेशकार, प्रवीण निगम, जगदीश श्रीवास, नसीर खान, जमशेद खान, मोहम्मद रईस खान, अपसाना खातून, मोहम्मद यूनुस, मोहम्मद ख़ालिक़, संतोष आनंद, मोहम्मद इरफान शेख, राकिब फ़ारूक़ी एवं अन्य सभी सहयोगी उपस्थित रहे।
बाँदा रोटी बैंक का यह सेवा कार्य मानवता, भाईचारे और सामाजिक सहयोग की भावना को और मजबूत करता है।
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छात्र सुरक्षा से कोई समझौता नहीं!

लखनऊ में हुई दुखद घटना के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। जिलाधिकारी बाँदा के निर्देश पर जनपद में संचालित सभी कोचिंग संस्थानों, लाइब्रेरी एवं अन्य शिक्षण संस्थाओं का व्यापक निरीक्षण कराया जा रहा है। विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों की टीम लगातार जांच अभियान चला रही है।

🔹 बिना पंजीकरण संचालित संस्थानों की पहचान की जा रही है।
🔹 अग्निशमन एवं सुरक्षा मानकों का गहन परीक्षण किया जा रहा है।
🔹 सुरक्षित प्रवेश-निकास एवं आपातकालीन व्यवस्थाओं की जांच की जा रही है।
🔹 मानकों की अनदेखी करने वाले संस्थानों के विरुद्ध तत्काल एवं कठोर कार्रवाई की जा रही है।

अभिभावकों और विद्यार्थियों से अपील:
किसी भी कोचिंग या लाइब्रेरी में प्रवेश लेने से पहले उसकी सुरक्षा व्यवस्था, अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास, पंजीकरण एवं अन्य आवश्यक मानकों की जानकारी अवश्य लें। यदि किसी संस्थान में सुरक्षा संबंधी गंभीर कमी दिखाई दे, तो इसकी सूचना तत्काल संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को दें। आपकी सतर्कता किसी बड़ी दुर्घटना को होने से रोक सकती है।

जिला प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। सुरक्षित एवं मानक अनुरूप शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराने के लिए यह अभियान लगातार जारी रहेगा।

— Amit Aasery
ज़िला अधिकारी बांदा
CPGRAMS (Centralized Public Grievance Redress and Monitoring System) 
यह भारत सरकार का आधिकारिक ऑनलाइन शिकायत पोर्टल है। इसका संचालन प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) करता है। इस पोर्टल के माध्यम से नागरिक केंद्र सरकार, राज्य सरकारों तथा विभिन्न सरकारी विभागों से जुड़ी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। शिकायत की प्रगति ऑनलाइन ट्रैक की जा सकती है और समाधान से असंतुष्ट होने पर अपील भी की जा सकती है। 
CPGRAMS (PG Portal)
CPGRAMS पर किन विषयों की शिकायत की जा सकती है?
सड़क निर्माण, गड्ढे, पुल आदि
बिजली आपूर्ति एवं विद्युत विभाग की समस्याएं
पेयजल एवं जलापूर्ति
सरकारी अस्पतालों में लापरवाही, स्वास्थ्य सेवाएं
सरकारी विद्यालय, कॉलेज एवं शिक्षा विभाग
राजस्व, नगर निकाय, पंचायत एवं अन्य सरकारी सेवाएं
अवैध खनन
अवैध वृक्ष कटान
गौशाला एवं पशु संरक्षण से जुड़ी शिकायतें
पर्यावरण प्रदूषण
सरकारी योजनाओं में अनियमितता
भ्रष्टाचार या सरकारी अधिकारियों द्वारा कार्य में लापरवाही (जहां संबंधित विभाग के अधिकार क्षेत्र में हो) 
शिकायत कैसे करें?
CPGRAMS पोर्टल पर पंजीकरण करें।
संबंधित मंत्रालय/विभाग का चयन करें।
समस्या का स्पष्ट विवरण लिखें।
फोटो, वीडियो या अन्य दस्तावेज़ (यदि उपलब्ध हों) संलग्न करें।
शिकायत जमा करने के बाद एक पंजीकरण संख्या (Registration ID) प्राप्त होगी, जिससे शिकायत की स्थिति ऑनलाइन देखी जा सकती है। 
यदि समाधान संतोषजनक न हो
यदि शिकायत का निस्तारण संतोषजनक नहीं है, तो CPGRAMS पर उपलब्ध अपील (Appeal) सुविधा का उपयोग किया जा सकता है। 
जन-जागरूकता संदेश:
*"यदि आपके क्षेत्र में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, अवैध खनन, वृक्षों की कटान, गौशाला या किसी अन्य सरकारी सेवा से जुड़ी समस्या है, तो केवल सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के बजाय CPGRAMS पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। आपकी शिकायत संबंधित विभाग तक पहुंचती है, उसकी निगरानी की जाती है और उसके निस्तारण की प्रक्रिया ऑनलाइन ट्रैक की जा सकती है। जागरूक नागरिक बनें और अपने अधिकारों का उपयोग करें।"
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शहीदाने कर्बला की याद में बाँदा रोटी बैंक द्वारा ठंडे जल का वितरण — सेवा, इंसानियत और भाईचारे की मिसाल ❤️
दोस्तों,
मोहर्रम के पवित्र अवसर पर बाँदा में सेवा, इंसानियत और भाईचारे की एक प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिली।
📅 23 जून 2026 को मोहर्रम की सातवीं के अवसर पर बाँदा रोटी बैंक सोसाइटी द्वारा शहीदाने कर्बला की याद में जिला परिषद स्थित कार्यालय पर राहगीरों एवं अज़ादारों के लिए ठंडे जल का वितरण किया गया।
यह सेवा कार्य संस्था के संरक्षक जनाब शेख सादी जमा साहब, सह संरक्षक श्री चंद्रमौलि भारद्वाज जी के संरक्षण, सदस्य जगदीश श्रीवास की अध्यक्षता तथा अलीमुद्दीन (उप शाखा प्रमुख, छिपटहरी) के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। इस आयोजन में श्री चंद्रमौलि भारद्वाज जी का विशेष सहयोग भी रहा।
भीषण गर्मी के बीच बड़ी संख्या में राहगीरों और अज़ादारों ने ठंडा जल ग्रहण किया तथा बाँदा रोटी बैंक की पूरी टीम को दुआएँ और शुभकामनाएँ दीं। इस सेवा अभियान में संस्था के पदाधिकारियों, सदस्यों एवं समाजसेवियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और यह संदेश दिया कि "मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।"
🌹 शहीद-ए-कर्बला हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) का पैगाम इंसाफ, सब्र, कुर्बानी और इंसानियत का है। ऐसे सेवा कार्य उसी महान संदेश को समाज तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम हैं।
🙏 आप सभी से एक अपील
यदि आपके आसपास भी रक्तदान, जल वितरण, गरीबों की सहायता या अन्य सामाजिक सेवा के कार्य हो रहे हैं, तो अपनी क्षमता के अनुसार अवश्य सहयोग करें। आपकी छोटी-सी मदद भी किसी ज़रूरतमंद के लिए बड़ी राहत बन सकती है।
💬 कमेंट करके बताइए कि आपके क्षेत्र में मोहर्रम के अवसर पर कौन-कौन से सेवा कार्य आयोजित किए जा रहे हैं।
जय हिंद। 🇮🇳
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CPGRAMS (Centralized Public Grievance Redress and Monitoring System) 
यह भारत सरकार का आधिकारिक ऑनलाइन शिकायत पोर्टल है। इसका संचालन प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) करता है। इस पोर्टल के माध्यम से नागरिक केंद्र सरकार, राज्य सरकारों तथा विभिन्न सरकारी विभागों से जुड़ी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। शिकायत की प्रगति ऑनलाइन ट्रैक की जा सकती है और समाधान से असंतुष्ट होने पर अपील भी की जा सकती है। 
CPGRAMS (PG Portal)
CPGRAMS पर किन विषयों की शिकायत की जा सकती है?
सड़क निर्माण, गड्ढे, पुल आदि
बिजली आपूर्ति एवं विद्युत विभाग की समस्याएं
पेयजल एवं जलापूर्ति
सरकारी अस्पतालों में लापरवाही, स्वास्थ्य सेवाएं
सरकारी विद्यालय, कॉलेज एवं शिक्षा विभाग
राजस्व, नगर निकाय, पंचायत एवं अन्य सरकारी सेवाएं
अवैध खनन
अवैध वृक्ष कटान
गौशाला एवं पशु संरक्षण से जुड़ी शिकायतें
पर्यावरण प्रदूषण
सरकारी योजनाओं में अनियमितता
भ्रष्टाचार या सरकारी अधिकारियों द्वारा कार्य में लापरवाही (जहां संबंधित विभाग के अधिकार क्षेत्र में हो) 
शिकायत कैसे करें?
CPGRAMS पोर्टल पर पंजीकरण करें।
संबंधित मंत्रालय/विभाग का चयन करें।
समस्या का स्पष्ट विवरण लिखें।
फोटो, वीडियो या अन्य दस्तावेज़ (यदि उपलब्ध हों) संलग्न करें।
शिकायत जमा करने के बाद एक पंजीकरण संख्या (Registration ID) प्राप्त होगी, जिससे शिकायत की स्थिति ऑनलाइन देखी जा सकती है। 
यदि समाधान संतोषजनक न हो
यदि शिकायत का निस्तारण संतोषजनक नहीं है, तो CPGRAMS पर उपलब्ध अपील (Appeal) सुविधा का उपयोग किया जा सकता है। 
जन-जागरूकता संदेश:
*"यदि आपके क्षेत्र में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, अवैध खनन, वृक्षों की कटान, गौशाला या किसी अन्य सरकारी सेवा से जुड़ी समस्या है, तो केवल सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के बजाय CPGRAMS पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। आपकी शिकायत संबंधित विभाग तक पहुंचती है, उसकी निगरानी की जाती है और उसके निस्तारण की प्रक्रिया ऑनलाइन ट्रैक की जा सकती है। जागरूक नागरिक बनें और अपने अधिकारों का उपयोग करें।"
UP 90 Creator 
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छात्र सुरक्षा से कोई समझौता नहीं!

लखनऊ में हुई दुखद घटना के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। जिलाधिकारी बाँदा के निर्देश पर जनपद में संचालित सभी कोचिंग संस्थानों, लाइब्रेरी एवं अन्य शिक्षण संस्थाओं का व्यापक निरीक्षण कराया जा रहा है। विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों की टीम लगातार जांच अभियान चला रही है।

🔹 बिना पंजीकरण संचालित संस्थानों की पहचान की जा रही है।
🔹 अग्निशमन एवं सुरक्षा मानकों का गहन परीक्षण किया जा रहा है।
🔹 सुरक्षित प्रवेश-निकास एवं आपातकालीन व्यवस्थाओं की जांच की जा रही है।
🔹 मानकों की अनदेखी करने वाले संस्थानों के विरुद्ध तत्काल एवं कठोर कार्रवाई की जा रही है।

अभिभावकों और विद्यार्थियों से अपील:
किसी भी कोचिंग या लाइब्रेरी में प्रवेश लेने से पहले उसकी सुरक्षा व्यवस्था, अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास, पंजीकरण एवं अन्य आवश्यक मानकों की जानकारी अवश्य लें। यदि किसी संस्थान में सुरक्षा संबंधी गंभीर कमी दिखाई दे, तो इसकी सूचना तत्काल संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को दें। आपकी सतर्कता किसी बड़ी दुर्घटना को होने से रोक सकती है।

जिला प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। सुरक्षित एवं मानक अनुरूप शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराने के लिए यह अभियान लगातार जारी रहेगा।

— Amit Aasery
ज़िला अधिकारी बांदा
श्रीमंत बाजीराव पेशवा – कुंवर मस्तानी साहिबा की विरासत और नवाब शादाब अली बहादुर (नवाब बांदा)

मराठा साम्राज्य के महान पेशवा श्रीमंत बाजीराव प्रथम और कुंवर मस्तानी साहिबा की प्रेम कहानी आज भी भारतीय इतिहास की सबसे चर्चित गाथाओं में गिनी जाती है। उनके पुत्र शमशेर बहादुर प्रथम से आगे बढ़ी वंश परंपरा ने बुंदेलखंड, विशेषकर बांदा से जुड़कर एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पहचान बनाई।

इसी वंश परंपरा से जुड़े नवाब शादाब अली बहादुर स्वयं को श्रीमंत बाजीराव पेशवा– कुंवर मस्तानी साहिबा की आठवीं पीढ़ी का वंशज बताते हैं। उन्होंने कई अवसरों पर अपने परिवार की ऐतिहासिक विरासत और श्रीमंत बाजीराव पेशवा– कुंवर मस्तानी साहिबा के इतिहास को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी है। वर्ष 2019 में फिल्म पानीपत के एक संवाद पर उन्होंने आपत्ति जताई थी और वर्ष 2025 में पुणे स्थित एनडीए में श्रीमंत बाजीराव पेशवा प्रथम की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम के दौरान भी उन्होंने अपने वंश और ऐतिहासिक पहचान से जुड़े मुद्दे उठाए थे।

इतिहासकारों के अनुसार, श्रीमंत बाजीराव पेशवा– कुंवर मस्तानी साहिबा के पुत्र शमशेर बहादुर प्रथम के पुत्र अली बहादुर प्रथम ने बुंदेलखंड में अपना प्रभाव स्थापित किया और आगे चलकर बांदा के नवाब के रूप में यह वंश प्रसिद्ध हुआ। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में भी इस वंश के नवाब अली बहादुर द्वितीय ने रानी लक्ष्मीबाई के साथ अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष किया, जिससे बांदा का नाम भारतीय इतिहास में विशेष रूप से दर्ज हुआ।

 श्रीमंत बाजीराव पेशवा– कुंवर मस्तानी साहिबा की यह विरासत केवल एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास, बुंदेलखंड की संस्कृति और बांदा की ऐतिहासिक पहचान का भी महत्वपूर्ण अध्याय है।
जामा मस्जिद, बांदा में नवाब शादाब अली बहादुर साहब के साथ।
आज मैं आप सभी को जामा मस्जिद, बांदा में ली गई नवाब शादाब अली बहादुर साहब की एक तस्वीर साझा कर रहा हूँ।
नवाब शादाब अली बहादुर स्वयं को श्रीमंत बाजीराव पेशवा– कुंवर मस्तानी साहिबा की आठवीं पीढ़ी का वंशज बताते हैं। उनका परिवार ऐतिहासिक रूप से बांदा के नवाबों के वंश से जुड़ा माना जाता है।
इतिहास और विरासत से जुड़े ऐसे व्यक्तित्वों से मिलना और उन्हें आप सभी से रूबरू कराना मेरे लिए खुशी की बात है। उम्मीद है कि यह तस्वीर और इससे जुड़ी ऐतिहासिक जानकारी आपको भी पसंद आएगी।
आप इस ऐतिहासिक विरासत के बारे में क्या जानते हैं? अपनी राय कमेंट में ज़रूर साझा करें।
UP 90 Creator 

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शहीदाने कर्बला की याद में बाँदा रोटी बैंक द्वारा किया गया ठंडा जल वितरण सेवा कार्यक्रम

आज दिनांक 23/06/2026 (मंगलवार) को बाँदा रोटी बैंक सोसाइटी के तत्वावधान में, शहीदाने कर्बला की याद में मोहर्रम की सातवीं के अवसर पर एक सेवा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम बाँदा रोटी बैंक के जिला कार्यालय, जिला परिषद परिसर में सम्पन्न हुआ।
इस आयोजन का नेतृत्व संरक्षक जनाब शेख सादी जमा साहब एवं सह संरक्षक श्री चंद्रमौलि भारद्वाज जी के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बाँदा रोटी बैंक के सदस्य जगदीश श्रीवास द्वारा की गई तथा अलीमुद्दीन (उप शाखा प्रमुख, छिप्तहरी) के विशेष नेतृत्व में ठंडा जल वितरण सेवा संपन्न हुई।
भीषण गर्मी और मोहर्रम के अवसर पर आए आज़मीनों एवं राहगीरों को ठंडा जल उपलब्ध कराया गया, जिससे लोगों ने अपनी प्यास बुझाई और बाँदा रोटी बैंक की टीम को दुआओं एवं आशीर्वाद से नवाज़ा।
इस सेवा कार्य में संगठन के अनेक पदाधिकारी, सदस्य एवं समाजसेवियों ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया—
अध्यक्ष: रिज़वान अली
उपाध्यक्ष: मोइनुद्दीन फ़ारूक़ी, मोहम्मद सलीम
सचिव: मोहम्मद इदरीश
महामंत्री: मोहम्मद अज़हर
संगठन मंत्री: सुनील सक्सेना
कार्यालय प्रभारी: मोहम्मद शमीम
सोशल मीडिया प्रभारी: अख़्तर किरमानी
शाखा प्रमुख:
खाईपार: इरफान खान
मढ़िया नाका: मोहम्मद याक़ूब
गूलर नाका: मोहम्मद हामिद
उप शाखा प्रमुख: अलीमुद्दीन (छिप्तहरी)
समाजसेवी एवं सदस्यगण:
तुलसीदास पेशकार, प्रवीण निगम, जगदीश श्रीवास, नसीर खान, जमशेद खान, मोहम्मद रईस खान, अपसाना खातून, मोहम्मद यूनुस, मोहम्मद ख़ालिक़, संतोष आनंद, मोहम्मद इरफान शेख, राकिब फ़ारूक़ी एवं अन्य सभी सहयोगी उपस्थित रहे।
बाँदा रोटी बैंक का यह सेवा कार्य मानवता, भाईचारे और सामाजिक सहयोग की भावना को और मजबूत करता है।
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बांदा में मुहर्रम की परंपरा और ढाल सवारियों का ऐतिहासिक मिलाप
बांदा शहर मुहर्रम के अवसर पर अपनी गहरी धार्मिक आस्था और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। यहां इमाम हुसैन (अ.स.) और कर्बला के शहीदों की याद में पूरे शहर में ग़म, अकीदत और श्रद्धा का माहौल देखने को मिलता है।
शहर के विभिन्न इमामबाड़ों और मोहल्लों में मजलिसों का आयोजन किया जाता है, जिनमें मर्सिया, नौहा और मातम के माध्यम से कर्बला के बलिदान को याद किया जाता है।
बांदा की प्रमुख परंपरा – ढाल सवारियों का मिलाप
Banda की सबसे प्रसिद्ध और ऐतिहासिक परंपराओं में से एक ढाल सवारियों (अलम/ताज़िया) का मिलाप है। इस अवसर पर:
अलग-अलग मोहल्लों और इमामबाड़ों से ढाल सवारियां और अलम जुलूस की शक्ल में निकलते हैं
अजादार नौहाख्वानी और मातम करते हुए निर्धारित स्थानों पर पहुंचते हैं
विभिन्न अंजुमनों और अखाड़ों की सवारियों का मिलन होता है
यह मिलाप आपसी भाईचारे, एकता और अकीदत का प्रतीक माना जाता है
इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोग दूर-दराज़ से पहुंचकर इस ऐतिहासिक और भावनात्मक परंपरा का हिस्सा बनते हैं। पूरे शहर में धार्मिक वातावरण के साथ-साथ अनुशासन और सुरक्षा की विशेष व्यवस्थाएं भी की जाती हैं।
मुहर्रम बांदा की न केवल धार्मिक पहचान है, बल्कि यह उसकी जीवंत सांस्कृतिक विरासत का भी अहम हिस्सा है।
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बाँदा में निजी अस्पतालों की मनमानी नहीं चलेगी!
उत्तर प्रदेश के बाँदा सहित पूरे प्रदेश में कुछ निजी अस्पतालों और मेडिकल माफियाओं द्वारा मरीजों के साथ की जा रही कथित मनमानी, गलत बिलिंग, अनावश्यक जांच, इलाज में लापरवाही और आर्थिक शोषण के खिलाफ अब आवाज बुलंद होगी।
बुंदेलखंड इंसाफ सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए. एस. नोमानी ने कहा है कि यदि किसी मरीज या उसके परिजनों के साथ किसी भी निजी अस्पताल में गलत बिलिंग, अनावश्यक जांच, इलाज में लापरवाही या किसी भी प्रकार का आर्थिक शोषण हुआ है, तो वे अकेले नहीं हैं। आपकी हर जायज शिकायत को संबंधित अधिकारियों तक पहुँचाकर निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की जाएगी।
यदि आपके साथ किसी निजी अस्पताल में किसी भी प्रकार का अन्याय हुआ है, तो अपनी पूरी जानकारी कमेंट में साझा करें। यदि संभव हो तो बिल, पर्ची, जांच रिपोर्ट या अन्य संबंधित अभिलेख भी उपलब्ध कराएं, ताकि तथ्यों के आधार पर आपकी आवाज प्रभावी ढंग से उठाई जा सके।
जनहित से जुड़े इस अभियान में आपकी भागीदारी महत्वपूर्ण है। आइए, मिलकर स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में कदम बढ़ाएं।
जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
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कमिश्नर के औचक निरीक्षण में खुली सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल, आकाश इंस्टीट्यूट में शिक्षण कार्य तत्काल स्थगित
बाँदा, 23 जून 2026।
हाल ही में लखनऊ समेत देश के विभिन्न हिस्सों में हुए दर्दनाक अग्निकांडों के बाद भी कई संस्थान अग्नि सुरक्षा नियमों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे विशेष निरीक्षण अभियान के तहत मंगलवार को चित्रकूटधाम मंडल के आयुक्त अजीत कुमार ने मुख्य अग्निशमन अधिकारी और सिटी मजिस्ट्रेट के साथ बाँदा के निजी अस्पतालों एवं कोचिंग संस्थानों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था में कई गंभीर खामियां सामने आईं।
आकाश इंस्टीट्यूट में बड़ी लापरवाही, शिक्षण कार्य रोका गया
रेडियन प्लाजा स्थित आकाश इंस्टीट्यूट में अग्निशामक सिलेंडरों की वैधता समाप्त पाई गई। साथ ही भवन का आपातकालीन निकास द्वार मानकों के अनुरूप नहीं था और बेहद संकरा मिला। इसे गंभीर खतरा मानते हुए आयुक्त ने निकास द्वार को मानकानुसार चौड़ा किए जाने तक संस्थान में शिक्षण कार्य तत्काल प्रभाव से स्थगित करने के निर्देश दिए।
इन संस्थानों में भी मिलीं गंभीर खामियां
अवनी परिधि मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल: अग्निशामक सिलेंडरों की वैधता समाप्त, फायर अलार्म खराब तथा फायर हाइड्रेंट में पानी का रिसाव और दबाव की कमी मिली। प्रबंधन को 24 घंटे में सभी कमियां दूर करने का अल्टीमेटम दिया गया।
कैलाश हॉस्पिटल (मोबुदा): अग्निशामक सिलेंडरों में भरा ड्राई पाउडर एक्सपायर मिला। तत्काल रिफिलिंग कराने के निर्देश दिए गए।
नरेन्द्र गुप्ता मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल: फायर पम्प कक्ष में ताला लगा मिला। आयुक्त ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए पम्प कक्ष को हर समय खुला एवं संचालित रखने के निर्देश दिए।
बाँदा सुपर स्पेशियलिटी सेंटर: फायर अलार्म और फायर पम्प पूरी तरह निष्क्रिय पाए गए। पानी का दबाव भी पर्याप्त नहीं था। तत्काल सुधार कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
शिव कृष्णा मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल: आपातकालीन निकास की सीढ़ियां अत्यधिक संकरी मिलीं। सुरक्षित निकासी के लिए इन्हें मानकों के अनुरूप बनाने के निर्देश दिए गए।
अनुराग नर्सिंग होम बना मिसाल
निरीक्षण के दौरान केवल अनुराग नर्सिंग होम में अग्निशमन एवं आपातकालीन निकास की व्यवस्थाएं संतोषजनक मिलीं। यहां लगे अग्निशामक सिलेंडरों की वैधता वर्ष 2027 तक पाई गई, जिस पर आयुक्त ने प्रबंधन की सराहना की।
आयुक्त का सख्त संदेश
आयुक्त अजीत कुमार ने कहा कि अग्नि सुरक्षा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि लोगों के जीवन की सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। नियमों की अनदेखी किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।
उन्होंने मुख्य अग्निशमन अधिकारी को जिले के सभी निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम, कोचिंग संस्थानों, हॉस्टलों, स्कूलों एवं शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का चरणबद्ध निरीक्षण करने के निर्देश दिए। साथ ही सभी संस्थानों में नियमित मॉक ड्रिल आयोजित करने तथा कर्मचारियों को अग्निशमन उपकरणों के संचालन का प्रशिक्षण देने के भी निर्देश जारी किए।
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कीरत सागर, महोबा — चंदेलों की अद्भुत जल विरासत का जीवंत प्रतीक
उत्तर प्रदेश के महोबा जनपद में स्थित कीरत सागर केवल एक झील नहीं, बल्कि बुंदेलखंड के गौरवशाली इतिहास, संस्कृति और प्राचीन जल संरक्षण प्रणाली का शानदार उदाहरण है। लगभग 11वीं शताब्दी में चंदेल शासक राजा कीर्तिवर्मन द्वारा निर्मित यह विशाल सरोवर आज भी अपनी ऐतिहासिक भव्यता और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है।
चंदेल राजाओं ने उस समय जल संरक्षण के महत्व को समझते हुए ऐसी झीलों का निर्माण कराया, जो न केवल सिंचाई और पेयजल का प्रमुख स्रोत बनीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की समृद्धि का आधार भी रहीं। कीरत सागर उन्हीं दूरदर्शी प्रयासों का जीवंत प्रमाण है।
हर वर्ष सावन-भादों के दौरान यहाँ लगने वाला प्रसिद्ध कजली मेला महोबा की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। इस मेले में हजारों श्रद्धालु, पर्यटक और लोक कलाकार शामिल होते हैं। लोकगीतों, पारंपरिक संस्कृति और उत्सव का अद्भुत संगम यहाँ देखने को मिलता है।
सुबह की सुनहरी किरणों से लेकर शाम के मनमोहक सूर्यास्त तक, कीरत सागर का हर दृश्य प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों को आकर्षित करता है। यदि आप इतिहास, संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम देखना चाहते हैं, तो महोबा का कीरत सागर आपकी यात्रा सूची में अवश्य होना चाहिए।
आइए, अपनी ऐतिहासिक धरोहरों को जानें, उनका सम्मान करें और आने वाली पीढ़ियों के लिए इन्हें सुरक्षित रखने का संकल्प लें।
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नवाब जुल्फिकार अली बहादुर की ऐतिहासिक मेहमान सराय
नवाब जुल्फिकार अली बहादुर की फैय्याज़ी, मेहमाननवाज़ी और जनसेवा की मिसाल आज भी बांदा की ऐतिहासिक धरोहरों में दिखाई देती है। बाहर से आने वाले यात्रियों और मेहमानों के ठहरने के लिए उन्होंने बांदा में एक विशाल एवं भव्य मेहमान सराय का निर्माण कराया था।
आज भी उसका बुलंद पत्थर का मुख्य द्वार और विशाल संरचना उनके दूरदर्शी व्यक्तित्व की गवाही देती है।
"पुल, मस्जिद, कुआँ और मेहमान सराय बनवाने वाले का नाम हमेशा ज़िंदा रहता है।"
दुर्भाग्य से आज यह ऐतिहासिक धरोहर नगर पालिका के किरायेदारों की दुकानों के बीच लगभग छिप चुकी है। सराय के पुराने कमरों और पारंपरिक ढांचे को तोड़कर नई इमारतें बनाई जा रही हैं, जिससे इसकी ऐतिहासिक पहचान धीरे-धीरे मिटती जा रही है।
जैसा कि इमारत में दिखाई दे रहा है कि नल के पाइप की फिटिंग दीवार में कीले ठोंक कर बगल वाली इमारत में भेजी गई है और इस दीवार को क्षतिग्रस्त किया जा रहा है।
क्या हमारी ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करना प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और समाज—सभी की जिम्मेदारी नहीं है?
आपकी राय क्या है? इस धरोहर की वर्तमान स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है? अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें।
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बांदा में मोहर्रम की सातवीं पर निकला मातमी जुलूस, लंगर और मेलों में उमड़ी भीड़, सुरक्षा के रहे कड़े इंतज़ाम
बांदा शहर में मोहर्रम की सातवीं तारीख पर बुधवार को अकीदत और गम का माहौल देखने को मिला। शहर के विभिन्न इलाकों से मातमी जुलूस निकाले गए, जिनमें बड़ी संख्या में अज़ादार शामिल हुए। जुलूस के दौरान या हुसैन की सदाओं के बीच लोगों ने मातम कर कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
मोहर्रम के अवसर पर शहर के कई स्थानों पर लंगर का आयोजन किया गया। भीषण गर्मी को देखते हुए राहगीरों और अज़ादारों के लिए शर्बत और ठंडे पानी का वितरण भी किया गया। लोगों ने बढ़-चढ़कर लंगर में अपनी सेवाएं दीं।
वहीं, मोहर्रम के मेलों में भी अच्छी-खासी रौनक रही। ज़िला परिषद, जामा मस्जिद रोड और गूलर नाका सहित प्रमुख स्थानों पर देर रात तक खचाखच भीड़ रही। बच्चों और परिवारों ने मेलों का आनंद लिया तथा विभिन्न दुकानों पर जमकर खरीदारी की।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर शहर के संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया। शहर कोतवाल स्वयं लगातार भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे, जबकि सभी थाना प्रभारी और चौकी प्रभारी अपने-अपने क्षेत्रों में सतर्क निगरानी बनाए रहे। चप्पे-चप्पे पर पुलिस की मौजूदगी के चलते मोहर्रम का कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
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लखनऊ कोचिंग सेंटर अग्निकांड: 15 छात्रों की दर्दनाक मौत, कई घायल
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र के पुरनिया स्थित एक एनीमेशन/कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इस दर्दनाक हादसे में 15 छात्रों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग लगने के बाद भवन में धुआं तेजी से फैल गया, जिससे कई छात्र अंदर फंस गए। जान बचाने के लिए कुछ छात्रों ने ऊंचाई से छलांग भी लगाई। दमकल और प्रशासन की टीमों ने घंटों तक राहत एवं बचाव अभियान चलाया।
मुख्यमंत्री ने घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। वहीं प्रशासन ने मामले में कार्रवाई शुरू करते हुए जांच तेज कर दी है।
इस दुखद घटना पर बुंदेलखंड इंसाफ सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए. एस. नोमानी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि:
मृतक छात्र-छात्राओं के प्रत्येक परिजन को ₹1 करोड़ की आर्थिक सहायता दी जाए।
प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी प्रदान की जाए।
सभी घायलों का निःशुल्क एवं बेहतर इलाज कराया जाए।
प्रदेश में संचालित अवैध कोचिंग सेंटरों को तत्काल बंद कर उनके अग्नि सुरक्षा मानकों की सख्ती से जांच कराई जाए।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत छात्रों की आत्मा को शांति प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवारों को यह असीम दुख सहने की शक्ति दें। 🕊️
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बांदा में मुहर्रम की 5वीं तारीख की रात का विशेष धार्मिक और पारंपरिक महत्व है। इस रात शहर के विभिन्न इमामबाड़ों और मोहल्लों में मजलिसें आयोजित होती हैं, जिनमें इमाम हुसैन (अ.स.) और कर्बला के शहीदों की याद में मर्सिया, नौहा और मातम किया जाता है।
बांदा की प्रमुख परंपरा – ढाल सवारियों का मिलाप
बांदा में 5वीं मुहर्रम की रात निकलने वाली ढाल सवारियों (अलम/ताज़ियों) का मिलाप एक ऐतिहासिक और प्रसिद्ध परंपरा मानी जाती है। इस दौरान:
शहर के अलग-अलग मोहल्लों और इमामबाड़ों से ढाल सवारियां और अलम जुलूस की शक्ल में निकलते हैं।
अजादार नौहाख्वानी और मातम करते हुए निर्धारित स्थान पर पहुंचते हैं।
विभिन्न अंजुमनों और अखाड़ों की सवारियों का मिलाप होता है, जो आपसी भाईचारे, एकता और इमाम हुसैन (अ.स.) के प्रति अकीदत का प्रतीक माना जाता है।
बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और आसपास के क्षेत्रों से आए श्रद्धालु इस परंपरा को देखने और उसमें शामिल होने पहुंचते हैं।
यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ बांदा की सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुहर्रम के दौरान शहर में सुरक्षा और यातायात की विशेष व्यवस्था भी की जाती है।
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मुंबई का HNCII: कैंसर उपचार में उम्मीद की नई किरण
मुंबई स्थित Head & Neck Cancer Institute of India (HNCII) देश के प्रमुख कैंसर अस्पतालों में से एक बनकर उभरा है। यहाँ सिर एवं गर्दन के कैंसर के साथ-साथ महिलाओं से जुड़े कैंसरों का भी आधुनिक तकनीक और अनुभवी विशेषज्ञों की टीम द्वारा उपचार किया जाता है।
इस संस्थान के संस्थापक एवं वरिष्ठ सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. सुल्तान ए. प्रधान पिछले लगभग 50 वर्षों से कैंसर चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। उन्होंने टाटा मेमोरियल अस्पताल सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया है और हेड एंड नेक कैंसर सर्जरी के क्षेत्र में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
HNCII का उद्देश्य केवल इलाज करना ही नहीं, बल्कि मरीजों को सम्मान, संवेदनशीलता और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा उपलब्ध कराना भी है। यही कारण है कि देशभर से मरीज यहाँ उपचार के लिए पहुँचते हैं।
🙏 कैंसर के प्रति जागरूक रहें, समय पर जाँच कराएँ और शुरुआती लक्षणों को कभी नज़रअंदाज़ न करें।
UP 90 Creator 
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