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BANDA NEWS

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जौहर यूनिवर्सिटी पर ए.एस. नोमानी का बयान, शिक्षा संस्थानों के संरक्षण की उठाई मांग
बांदा। बुंदेलखंड इंसाफ सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए.एस. नोमानी ने जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर बयान जारी करते हुए समाजवादी पार्टी के नेतृत्व और उसके जनप्रतिनिधियों से सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के पास लगभग 100 विधायक और 37 सांसद हैं। ऐसे में उन्होंने प्रश्न किया कि क्या पार्टी नेतृत्व और उसके जनप्रतिनिधि जौहर यूनिवर्सिटी के संरक्षण के लिए प्रभावी प्रयास करेंगे।
नोमानी ने कहा कि उनके अनुसार जौहर यूनिवर्सिटी एक शिक्षा का मंदिर है। उनका कहना है कि यह केवल किसी एक व्यक्ति की संपत्ति नहीं, बल्कि देश के नागरिकों के खून-पसीने की कमाई और चंदे से निर्मित एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों से विद्यार्थियों के हित में शिक्षा संस्थानों के संरक्षण के लिए आगे आने की अपील की।
अपने बयान में ए.एस. नोमानी ने यह भी सवाल उठाया कि यदि जौहर यूनिवर्सिटी एक शिक्षा का मंदिर है, तो क्या ऐसे शिक्षा संस्थानों पर बुलडोज़र चलना उचित है? उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज और राष्ट्र के भविष्य की नींव होती है, इसलिए शिक्षा संस्थानों का संरक्षण और संवर्धन प्राथमिकता होनी चाहिए।
हालांकि, जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े कानूनी और प्रशासनिक मामलों पर संबंधित न्यायालयों एवं सरकारी एजेंसियों की प्रक्रिया अलग से जारी है।
इस मुद्दे पर आपकी क्या राय है? क्या शिक्षा संस्थानों पर इस प्रकार की कार्रवाई उचित है, या उनका संरक्षण होना चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में साझा करें।
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बांदा: 50 माह से चल रहे वृक्षारोपण जन-जागरूकता महाअभियान के तृतीय चरण का शुभारंभ
बांदा, 16 जुलाई 2026।
भगवती मानव कल्याण संगठन एवं बुंदेलखंड हरियाली मिशन, बांदा के तत्वावधान में पर्यावरण प्रहरी गुलाब चंद्र कुशवाहा द्वारा पिछले 50 माह से निरंतर चलाए जा रहे वृक्षारोपण जन-जागरूकता महाअभियान के तृतीय चरण का शुभारंभ गुरुवार को डॉ. भीमराव अंबेडकर शिक्षा सदन, बिलगांव (बांदा) में किया गया। कार्यक्रम में सैकड़ों छात्र-छात्राओं, युवाओं और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गुलाब चंद्र कुशवाहा ने बताया कि पिछले 50 महीनों में विभिन्न प्रजातियों के 3,000 से अधिक पौधों का सुरक्षित स्थानों पर रोपण किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है और प्रत्येक नागरिक को इसमें अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण, पेड़-पौधे, नदियां और प्राकृतिक संसाधन गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने विकास कार्यों के दौरान पुराने पीपल, बरगद और अन्य छायादार पेड़ों की कटाई पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। यदि योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाए तो पुराने पेड़ों को बचाते हुए भी विकास संभव है।
उन्होंने बांदा में पेड़ बचाओ अभियान चला रहे लव सिन्हा और उनकी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से कई पुराने पेड़ संरक्षित किए जा सके हैं, जो समाज के लिए प्रेरणादायक है।
इस अवसर पर विद्यालय परिसर में अमरूद, कदंब सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधों का निःशुल्क वितरण किया गया। साथ ही "जन्मदिन पर पौधा लगाओ अभियान" का शुभारंभ भी किया गया। उपस्थित छात्र-छात्राओं एवं ग्रामीणों ने प्रत्येक वर्ष अपने जन्मदिन और अपने पूर्वजों की पुण्यतिथि पर कम से कम एक पौधा लगाने तथा उसकी देखभाल करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में विद्यालय के प्रबंधक मनीष कुमार द्विवेदी, प्रधानाचार्य पंकज कुमार, कुशल सिंह, मनोज, दशरथ, अमित कुशवाहा सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।
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बांदा: 50 माह से चल रहे वृक्षारोपण जन-जागरूकता महाअभियान के तृतीय चरण का शुभारंभ
बांदा, 16 जुलाई 2026।
भगवती मानव कल्याण संगठन एवं बुंदेलखंड हरियाली मिशन, बांदा के तत्वावधान में पर्यावरण प्रहरी गुलाब चंद्र कुशवाहा द्वारा पिछले 50 माह से निरंतर चलाए जा रहे वृक्षारोपण जन-जागरूकता महाअभियान के तृतीय चरण का शुभारंभ गुरुवार को डॉ. भीमराव अंबेडकर शिक्षा सदन, बिलगांव (बांदा) में किया गया। कार्यक्रम में सैकड़ों छात्र-छात्राओं, युवाओं और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गुलाब चंद्र कुशवाहा ने बताया कि पिछले 50 महीनों में विभिन्न प्रजातियों के 3,000 से अधिक पौधों का सुरक्षित स्थानों पर रोपण किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है और प्रत्येक नागरिक को इसमें अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण, पेड़-पौधे, नदियां और प्राकृतिक संसाधन गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने विकास कार्यों के दौरान पुराने पीपल, बरगद और अन्य छायादार पेड़ों की कटाई पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। यदि योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाए तो पुराने पेड़ों को बचाते हुए भी विकास संभव है।
उन्होंने बांदा में पेड़ बचाओ अभियान चला रहे लव सिन्हा और उनकी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से कई पुराने पेड़ संरक्षित किए जा सके हैं, जो समाज के लिए प्रेरणादायक है।
इस अवसर पर विद्यालय परिसर में अमरूद, कदंब सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधों का निःशुल्क वितरण किया गया। साथ ही "जन्मदिन पर पौधा लगाओ अभियान" का शुभारंभ भी किया गया। उपस्थित छात्र-छात्राओं एवं ग्रामीणों ने प्रत्येक वर्ष अपने जन्मदिन और अपने पूर्वजों की पुण्यतिथि पर कम से कम एक पौधा लगाने तथा उसकी देखभाल करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में विद्यालय के प्रबंधक मनीष कुमार द्विवेदी, प्रधानाचार्य पंकज कुमार, कुशल सिंह, मनोज, दशरथ, अमित कुशवाहा सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।
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क्या विकास और प्रकृति साथ-साथ चल सकते हैं?
किसी के लिए जंगल सिर्फ पेड़ों का एक समूह हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों के लिए वही जंगल उनका घर, उनकी पहचान और उनकी पूरी दुनिया है।
मध्य प्रदेश के पन्ना और छतरपुर के जंगलों में रहने वाले आदिवासी समुदायों का रिश्ता प्रकृति से सदियों पुराना है। इन जंगलों से उन्हें सिर्फ भोजन और रोज़गार नहीं मिलता, बल्कि उनकी संस्कृति, परंपराएं और पूर्वजों की विरासत भी जुड़ी हुई है।
आज जब इन क्षेत्रों में बड़े विकास कार्यों की चर्चा हो रही है, तो इन समुदायों की चिंता केवल जमीन खोने की नहीं है। उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर जंगल ही नहीं रहेगा, तो क्या उनका पारंपरिक जीवन, संस्कृति और पहचान भी सुरक्षित रह पाएगी?
केन नदी, जंगल और जमीन उनके लिए सिर्फ प्राकृतिक संसाधन नहीं हैं, बल्कि उनके अस्तित्व का अभिन्न हिस्सा हैं।
विकास किसी भी समाज के लिए आवश्यक है, लेकिन यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि विकास की प्रक्रिया में प्रभावित होने वाले लोगों की बात सुनी जाए, उनकी आजीविका, संस्कृति और अधिकारों का सम्मान किया जाए, और पर्यावरणीय संतुलन का भी ध्यान रखा जाए।
आपकी राय में विकास और आदिवासी समुदायों के अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाया जा सकता है? अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें।
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बांदा में भगवान जगन्नाथ रथयात्रा श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली गई
बांदा। जनपद में भगवान जगन्नाथ स्वामी की रथयात्रा रविवार को पूरे श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ निकाली गई। परंपरागत रूप से आयोजित यह रथयात्रा राम जानकी मंदिर, भगवान दास कुंजबिहारी भवन, छोटी बाजार से सायंकाल प्रारंभ हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
रथयात्रा से पूर्व मंदिर परिसर में ओमर वैश्य महिला संघ की पूर्व अध्यक्षा श्रीमती सुनीता ओमर के सहयोग से बालिकाओं ने मनमोहक सांस्कृतिक एवं संगीत आधारित नृत्य प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में ओमर वैश्य मंदिर सुधार समिति के सदस्यों की सक्रिय भूमिका रही। वहीं कानपुर से आई आस्तिक, अस्मिता और कृषिव की मंडली ने भी अपनी आकर्षक प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।
रथयात्रा में विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल, मातृशक्ति एवं दुर्गावाहिनी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस दौरान भारत माता एवं रानी लक्ष्मीबाई की आकर्षक झांकियां निकाली गईं, जबकि बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने शौर्य प्रदर्शन कर दर्शकों का उत्साह बढ़ाया।
कार्यक्रम में नगर पालिका चेयरमैन मालती बासु, सुनील गुप्ता, चंद्रमोहन बेदी, विजय आमेर, संजय ओमर, अजय ओमर, उमा, पंकज, विदित गुप्ता, अनिल, विष्णु ओमर, पूर्व चेयरमैन राजकुमार राज, मनोज जैन, अमित सेठ भोलू सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
इधर कैलाशपुरी स्थित वामदेव मंदिर से भी भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निकाली गई। यात्रा में पुत्तन तिवारी, सुरेश, प्रकाश, नीरज, पवन, अखिलेश, रोहित, अभिषेक मिश्रा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर भगवान जगन्नाथ के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
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बांदा: चकबंदी में धांधली के विरोध में किसानों का एक माह पुराना अनशन समाप्त, कार्रवाई के आश्वासन पर बनी सहमति
बांदा। जनपद के अशोक लाट तिराहे पर पिछले लगभग एक माह से चकबंदी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध में चल रहा किसानों का अनशन शुक्रवार को प्रशासन की ओर से मिले आश्वासन के बाद समाप्त हो गया।
किसानों का आरोप था कि अमलीकौर और लोहरा ग्राम में चकबंदी प्रक्रिया के दौरान भारी धांधली हुई है तथा इसमें भ्रष्ट अधिकारियों और कुछ नेताओं की मिलीभगत रही है। इसी के विरोध में किसान लंबे समय से न्याय की मांग को लेकर अनशन पर बैठे थे।
अनशन स्थल पर चकबंदी आयुक्त, लखनऊ के प्रतिनिधि ने किसानों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और विस्तार से चर्चा की। प्रतिनिधि ने किसानों को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी, पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी तथा यदि किसी अधिकारी की भूमिका भ्रष्टाचार में पाई जाती है तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इन आश्वासनों के बाद किसानों ने आपसी सहमति से अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।
इस अवसर पर किसान नेता जयराम सिंह बछेउरा ने कहा कि यह केवल अनशन का समापन है, संघर्ष का नहीं। उन्होंने कहा कि किसानों को न्याय दिलाना और उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान कराना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि प्रशासन द्वारा समयबद्ध और संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई तो किसान दोबारा आंदोलन शुरू करने से पीछे नहीं हटेंगे।
अनशन समाप्त होने के बाद किसानों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन अपने वादों पर अमल करेगा और चकबंदी से जुड़े विवाद का निष्पक्ष समाधान सुनिश्चित करेगा।
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बांदा: 50 माह से चल रहे वृक्षारोपण जन-जागरूकता महाअभियान के तृतीय चरण का शुभारंभ
बांदा, 16 जुलाई 2026।
भगवती मानव कल्याण संगठन एवं बुंदेलखंड हरियाली मिशन, बांदा के तत्वावधान में पर्यावरण प्रहरी गुलाब चंद्र कुशवाहा द्वारा पिछले 50 माह से निरंतर चलाए जा रहे वृक्षारोपण जन-जागरूकता महाअभियान के तृतीय चरण का शुभारंभ गुरुवार को डॉ. भीमराव अंबेडकर शिक्षा सदन, बिलगांव (बांदा) में किया गया। कार्यक्रम में सैकड़ों छात्र-छात्राओं, युवाओं और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गुलाब चंद्र कुशवाहा ने बताया कि पिछले 50 महीनों में विभिन्न प्रजातियों के 3,000 से अधिक पौधों का सुरक्षित स्थानों पर रोपण किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है और प्रत्येक नागरिक को इसमें अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण, पेड़-पौधे, नदियां और प्राकृतिक संसाधन गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने विकास कार्यों के दौरान पुराने पीपल, बरगद और अन्य छायादार पेड़ों की कटाई पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। यदि योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाए तो पुराने पेड़ों को बचाते हुए भी विकास संभव है।
उन्होंने बांदा में पेड़ बचाओ अभियान चला रहे लव सिन्हा और उनकी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से कई पुराने पेड़ संरक्षित किए जा सके हैं, जो समाज के लिए प्रेरणादायक है।
इस अवसर पर विद्यालय परिसर में अमरूद, कदंब सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधों का निःशुल्क वितरण किया गया। साथ ही "जन्मदिन पर पौधा लगाओ अभियान" का शुभारंभ भी किया गया। उपस्थित छात्र-छात्राओं एवं ग्रामीणों ने प्रत्येक वर्ष अपने जन्मदिन और अपने पूर्वजों की पुण्यतिथि पर कम से कम एक पौधा लगाने तथा उसकी देखभाल करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में विद्यालय के प्रबंधक मनीष कुमार द्विवेदी, प्रधानाचार्य पंकज कुमार, कुशल सिंह, मनोज, दशरथ, अमित कुशवाहा सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।
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बाँदा: रोटी बैंक सोसाइटी की महिला सदस्य फरज़ाना बेगम और शहाना खान ने फिर निभाई मानव सेवा की मिसाल
बाँदा, 16 जुलाई 2026।
बाँदा रोटी बैंक सोसाइटी की जिम्मेदार सदस्य फरज़ाना बेगम और शहाना खान पिछले पाँच वर्षों से लगातार जरूरतमंदों की सेवा में समर्पित हैं। समाज सेवा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें जिला अधिकारी श्रीमती दुर्गा शक्ति नागपाल द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है।
गुरुवार को अपने निर्धारित दिन और समय पर फरज़ाना बेगम ने आज़ाद नगर क्षेत्र के 10 घरों से 10 भोजन पैकेट एकत्र किए। वहीं शहाना खान ने छावनी क्षेत्र से 42 भोजन पैकेट जुटाए। इसके अतिरिक्त निषाद फर्नीचर की ओर से 2 भोजन पैकेट प्राप्त हुए।
इस प्रकार कुल 54 भोजन पैकेट बाँदा रोटी बैंक सोसाइटी के अध्यक्ष रिज़वान अली, उपाध्यक्ष मोहम्मद सलीम, संगठन मंत्री सुनील सक्सेना तथा सदस्य नसीर खान को सौंपे गए। टीम ने सभी भोजन पैकेट जरूरतमंद एवं असहाय लोगों तक पहुँचाकर मानवता की सेवा का कार्य किया।
बाँदा रोटी बैंक सोसाइटी ने आमजन से अपील की है कि जो भी व्यक्ति भोजन, कपड़े या आर्थिक सहयोग के माध्यम से इस सेवा अभियान से जुड़ना चाहता है, वह इन मोबाइल नंबरों पर संपर्क कर सकता है: 9451988451, 8318456975
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बांदा: सड़क बनाने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे बच्चे, गूंजा नारा— "रोड नहीं तो स्कूल नहीं"
बांदा जनपद की तहसील अतर्रा क्षेत्र के अतर्रा केन कैनाल कार्यालय से नहर पटरी पर स्थित भूरा यादव का पुरवा के बच्चों ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। बच्चों ने हाथों में तख्तियां लेकर "रोड नहीं तो स्कूल नहीं" के नारे लगाए और प्रशासन से जल्द से जल्द सड़क बनवाने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क न होने के कारण बच्चों को स्कूल आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जिससे शिक्षा भी प्रभावित होती है।
बच्चों की मांग है कि उन्हें सुरक्षित और बेहतर रास्ता उपलब्ध कराया जाए ताकि वे बिना किसी परेशानी के स्कूल जा सकें।
क्या आपको लगता है कि बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा को देखते हुए इस सड़क का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।
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बांदा में अवैध कटान रोकने और वृक्षारोपण में पारदर्शिता की मांग, जिला वनाधिकारी को सौंपा छह सूत्रीय ज्ञापन
बांदा। जनपद में लगातार हो रही अवैध पेड़ों की कटाई और बढ़ती भीषण गर्मी को लेकर "जल, जंगल, पहाड़ बचाओ अभियान (सेव द बांदा कैंपेन)" के बैनर तले जागरूक नागरिकों ने जिला वनाधिकारी को छह सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में हरे पेड़ों की कटाई पर पूर्ण रोक, विकास कार्यों में काटे गए पेड़ों की भरपाई, पंडित जे.एन. डिग्री कॉलेज में हुई पेड़ों की कटाई की जांच व दोषियों पर कार्रवाई, तथा 5 जून और 12 जुलाई को हुए वृक्षारोपण अभियान की ग्राम पंचायतवार जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की गई।
अभियान से जुड़े वक्ताओं ने कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी सुरक्षा, सिंचाई और निगरानी भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि अवैध कटान पर जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो इस मुद्दे पर व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा।
कार्यक्रम में सुरेंद्र मिश्रा, अभिषेक शुक्ला, लव सिन्हा, यश त्रिवेदी, अमित यादव, साजिद अली, कार्तिक आनंद, अरविंद श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में जागरूक नागरिक मौजूद रहे।
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बांदा में अवैध कटान रोकने और वृक्षारोपण में पारदर्शिता की मांग, जिला वनाधिकारी को सौंपा छह सूत्रीय ज्ञापन
बांदा। जनपद में लगातार हो रही अवैध पेड़ों की कटाई और बढ़ती भीषण गर्मी को लेकर "जल, जंगल, पहाड़ बचाओ अभियान (सेव द बांदा कैंपेन)" के बैनर तले जिले के जागरूक नागरिकों ने जिला वनाधिकारी को छह सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर प्रभावी कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन में हरे पेड़ों की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने, विकास कार्यों में काटे गए पेड़ों की भरपाई सुनिश्चित करने तथा पंडित जे.एन. डिग्री कॉलेज में काटे गए वृक्षों के मामले में दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की गई। साथ ही 5 जून को लगाए गए 8.58 लाख पौधों तथा 12 जुलाई के महावृक्षारोपण अभियान के तहत लगाए गए पौधों का ग्राम पंचायतवार विवरण और उनकी वर्तमान स्थिति सार्वजनिक करने की भी मांग उठाई गई।
पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सुरेंद्र मिश्रा ने कहा कि जिले में हो रही अवैध कटाई पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए। पत्रकार अभिषेक शुक्ला ने चेतावनी दी कि यदि वन विभाग ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो इस मुद्दे पर बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा।
छात्र लव सिन्हा ने वन माफियाओं पर अंकुश लगाने के लिए विशेष समिति गठित करने की मांग की। साजिद अली और अमित यादव ने कहा कि वन विभाग केवल पौधारोपण तक सीमित न रहे, बल्कि पौधों की नियमित सिंचाई, सुरक्षा और निगरानी भी सुनिश्चित करे।
छात्रनेता शमशेर यादव और कार्तिक आनंद ने कहा कि यदि अवैध कटाई नहीं रुकी, तो बांदा का पर्यावरण गंभीर संकट में पड़ जाएगा और इसका असर व्यापार व जनजीवन पर भी पड़ेगा। पत्रकार अरविंद श्रीवास्तव ने भीषण गर्मी से किसानों की फसलों को हुए नुकसान का मुद्दा उठाया, जबकि यश त्रिवेदी ने मुख्यमंत्री से बांदा के पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने की अपील की।
कार्यक्रम का संचालन लव सिन्हा ने किया। इस अवसर पर सुरेंद्र मिश्रा (पप्पू), सुनील सक्सेना, अभिषेक शुक्ला, राहुल द्विवेदी, अरविंद श्रीवास्तव, लव सिन्हा, यश त्रिवेदी, अमित यादव, ओम राजपूत, साजिद अली, अभिषेक शुक्ला (अंश), शिवा शुक्ला, कार्तिक आनंद, विक्की यादव, लियाकत अली, अमित वर्मा, सूरज वर्मा, सूरज सिंह, आशाराम, संजय बाबू पाल, अरविंद सिंह, हर्षित श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में जागरूक नागरिक मौजूद रहे।
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बांदा के विकास को मिलेगी नई रफ्तार!
बांदा में दूसरा रेलवे ब्रिज तेजी से बन रहा है और रेलवे लाइन के दोहरीकरण का कार्य भी युद्ध स्तर पर जारी है। यह परियोजना पूरी होने के बाद ट्रेनों का संचालन अधिक सुगम होगा, क्रॉसिंग पर होने वाली देरी कम होगी और यात्रियों के सफर का समय घटने की उम्मीद है। साथ ही मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों की आवाजाही भी अधिक तेज़ और सुरक्षित हो सकेगी।
रेलवे के इस बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से बांदा और पूरे बुंदेलखंड की कनेक्टिविटी मजबूत होगी, जिससे व्यापार, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को भी नई गति मिलने की संभावना है।
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बांदा: बुंदेलखंड इंसाफ सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए. एस. नोमानी ने मीडिया को जारी प्रेस नोट में कहा कि नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट सहित महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहे आंदोलन में कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक की मांगों का बुंदेलखंड इंसाफ सेना समर्थन करती है।
उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक की तबीयत लगातार बिगड़ रही है और उनका लगभग 8 किलोग्राम वजन कम हो चुका है। नोमानी ने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि "क्या सरकार उनके मरने का इंतज़ार कर रही है?"
ए. एस. नोमानी ने कहा कि सरकार को आंदोलनकारियों के स्वास्थ्य और देश के विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि देश में "आपातकाल जैसे हालात" बने हुए हैं और लोकतांत्रिक तरीके से चल रहे इस आंदोलन में सभी नागरिकों को अपनी भागीदारी निभानी चाहिए। 
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बांदा में अवैध कटान रोकने और वृक्षारोपण में पारदर्शिता की मांग, जिला वनाधिकारी को सौंपा छह सूत्रीय ज्ञापन
बांदा। जनपद में लगातार हो रही अवैध पेड़ों की कटाई और बढ़ती भीषण गर्मी को लेकर "जल, जंगल, पहाड़ बचाओ अभियान (सेव द बांदा कैंपेन)" के बैनर तले जिले के जागरूक नागरिकों ने जिला वनाधिकारी को छह सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर प्रभावी कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन में हरे पेड़ों की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने, विकास कार्यों में काटे गए पेड़ों की भरपाई सुनिश्चित करने तथा पंडित जे.एन. डिग्री कॉलेज में काटे गए वृक्षों के मामले में दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की गई। साथ ही 5 जून को लगाए गए 8.58 लाख पौधों तथा 12 जुलाई के महावृक्षारोपण अभियान के तहत लगाए गए पौधों का ग्राम पंचायतवार विवरण और उनकी वर्तमान स्थिति सार्वजनिक करने की भी मांग उठाई गई।
पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सुरेंद्र मिश्रा ने कहा कि जिले में हो रही अवैध कटाई पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए। पत्रकार अभिषेक शुक्ला ने चेतावनी दी कि यदि वन विभाग ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो इस मुद्दे पर बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा।
छात्र लव सिन्हा ने वन माफियाओं पर अंकुश लगाने के लिए विशेष समिति गठित करने की मांग की। साजिद अली और अमित यादव ने कहा कि वन विभाग केवल पौधारोपण तक सीमित न रहे, बल्कि पौधों की नियमित सिंचाई, सुरक्षा और निगरानी भी सुनिश्चित करे।
छात्रनेता शमशेर यादव और कार्तिक आनंद ने कहा कि यदि अवैध कटाई नहीं रुकी, तो बांदा का पर्यावरण गंभीर संकट में पड़ जाएगा और इसका असर व्यापार व जनजीवन पर भी पड़ेगा। पत्रकार अरविंद श्रीवास्तव ने भीषण गर्मी से किसानों की फसलों को हुए नुकसान का मुद्दा उठाया, जबकि यश त्रिवेदी ने मुख्यमंत्री से बांदा के पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने की अपील की।
कार्यक्रम का संचालन लव सिन्हा ने किया। इस अवसर पर सुरेंद्र मिश्रा (पप्पू), सुनील सक्सेना, अभिषेक शुक्ला, राहुल द्विवेदी, अरविंद श्रीवास्तव, लव सिन्हा, यश त्रिवेदी, अमित यादव, ओम राजपूत, साजिद अली, अभिषेक शुक्ला (अंश), शिवा शुक्ला, कार्तिक आनंद, विक्की यादव, लियाकत अली, अमित वर्मा, सूरज वर्मा, सूरज सिंह, आशाराम, संजय बाबू पाल, अरविंद सिंह, हर्षित श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में जागरूक नागरिक मौजूद रहे।
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ए. एस. नोमानी की माननीय मुख्यमंत्री जी से अपील
"शिक्षा के मंदिर बचाइए, भविष्य संवारिए"
जनता के टैक्स और संसाधनों से निर्मित किसी भी शिक्षण संस्थान को ध्वस्त करना जनहित में उचित नहीं है। यदि किसी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक अनियमितता हो, तो उसका समाधान संविधान और कानून के दायरे में किया जाना चाहिए। साथ ही विद्यार्थियों की शिक्षा, शोध कार्य और उनके भविष्य को प्रभावित होने से बचाया जाना चाहिए।
जौहर यूनिवर्सिटी एक शिक्षण संस्था है, जहाँ विभिन्न पृष्ठभूमि और समुदायों के विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करते हैं। किसी भी शैक्षणिक संस्थान से संबंधित निर्णय लेते समय विद्यार्थियों के भविष्य, शिक्षकों के हित तथा समाज के दीर्घकालिक शैक्षिक हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
शिक्षण संस्थानों को नष्ट करने के बजाय, यदि आवश्यक हो तो उनकी कमियों को दूर कर उन्हें और अधिक सुदृढ़ बनाया जाए, ताकि समाज और देश को शिक्षित, सक्षम एवं जिम्मेदार नागरिक मिल सकें।
हमारी विनम्र अपील है कि—
शिक्षा का संरक्षण किया जाए।
विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित रखा जाए।
जनता के धन और संसाधनों का सदुपयोग हो।
सभी निर्णय संविधान, कानून और जनहित को सर्वोपरि रखते हुए लिए जाएँ।
"इमारतें गिराने से नहीं, शिक्षा को सशक्त बनाने से राष्ट्र मजबूत होता है।"
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मुख्यमंत्री जी, इमारतें गिराने से नहीं, बल्कि शिक्षा को सशक्त बनाने से राष्ट्र मजबूत होता है।
शिक्षा के मंदिरों की रक्षा कीजिए, क्योंकि इन्हीं से देश का भविष्य तैयार होता है। किसी भी शैक्षणिक संस्थान से जुड़ी समस्या का समाधान कानून और संवाद के माध्यम से होना चाहिए, न कि शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करके।
शिक्षा के मंदिर बचाइए, बच्चों के भविष्य को संवारीए।
— ए. एस. नोमानी
राष्ट्रीय अध्यक्ष, बुंदेलखंड इंसाफ सेना
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जंतर-मंतर पर अनशन के 18वें दिन सोनम वांगचुक का संदेश
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी अपने अनशन के 18वें दिन सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने समर्थकों के नाम एक भावनात्मक संदेश जारी किया।
उन्होंने कहा, "मैं ठीक हूँ, लेकिन इतना भी ठीक नहीं हूँ। मुझसे मेरा उपवास तोड़ने के लिए कहने के बजाय कृपया हमारी मांगों का समर्थन करें।"
सोनम वांगचुक ने लोगों से अपील की कि वे आंदोलन के मुद्दों के प्रति अपनी आवाज़ बुलंद करें और लोकतांत्रिक तरीके से समर्थन दें। उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य संबंधित मांगों की ओर सरकार और समाज का ध्यान आकर्षित करना है।
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चार्जिंग के दौरान ई-स्कूटी की बैटरी में धमाके से कल नोएडा में दो लोगों की दर्दनाक मौत बेहद दुखद और चिंताजनक है।
आख़िर कब तक ऐसी घटनाएँ होती रहेंगी?
सरकार और संबंधित एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बाजार में बिकने वाली ई-वाहनों की बैटरियाँ उच्च सुरक्षा मानकों पर खरी उतरें। साथ ही बैटरी बनाने वाली कंपनियों की गुणवत्ता, परीक्षण और सुरक्षा मानकों की नियमित जांच होनी चाहिए। यदि किसी कंपनी की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
इसके साथ ही उपभोक्ताओं को भी केवल प्रमाणित चार्जर का उपयोग करना चाहिए, बैटरी में स्थानीय स्तर पर छेड़छाड़ या अनधिकृत मरम्मत से बचना चाहिए और चार्जिंग के दौरान आवश्यक सुरक्षा सावधानियों का पालन करना चाहिए।
तकनीक लोगों की सुविधा और सुरक्षा के लिए होती है, उनकी जान जोखिम में डालने के लिए नहीं। हर नागरिक की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
आपकी क्या राय है? क्या ई-वाहनों की बैटरियों की सुरक्षा जांच और नियमों को और सख्त किया जाना चाहिए?
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बाँदा रोटी बैंक सोसाइटी: सेवा का एक और सराहनीय प्रयास
बाँदा रोटी बैंक सोसाइटी की ज़िम्मेदार महिला कोषाध्यक्ष श्रीमती रेणुका गुप्ता जी लगातार मानव सेवा और जरूरतमंदों की सहायता में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
दिनांक 15 जुलाई 2026 को अपने निर्धारित दिन और समय पर उन्होंने अपने घर से स्वयं 10 पैकेट भोजन तैयार कर उपलब्ध कराए। इसके अतिरिक्त 2 पैकेट भोजन निषाद फर्नीचर की ओर से प्राप्त हुए। इस प्रकार कुल 12 पैकेट भोजन बाँदा रोटी बैंक सोसाइटी के अध्यक्ष रिज़वान अली, उपाध्यक्ष मोहम्मद सलीम, उप शाखा प्रमुख (छिप्तहरी) अलीमुद्दीन तथा सदस्य नसीर खान को सौंपे गए।
सोसाइटी के सदस्यों ने यह भोजन जरूरतमंद एवं असहाय लोगों तक पहुँचाकर मानवता की मिसाल पेश की।
आपसे एक विनम्र अपील:
यदि आप भी बाँदा रोटी बैंक सोसाइटी के इस सेवा अभियान से जुड़ना चाहते हैं और भोजन, कपड़े या आर्थिक सहयोग देना चाहते हैं, तो कृपया नीचे दिए गए मोबाइल नंबरों पर संपर्क करें:
📞 9451988451
📞 8318456975
इंसानियत की सेवा ही सबसे बड़ी इबादत है।
बांदा: सड़क बनाने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे बच्चे, गूंजा नारा— "रोड नहीं तो स्कूल नहीं"
बांदा जनपद की तहसील अतर्रा क्षेत्र के अतर्रा केन कैनाल कार्यालय से नहर पटरी पर स्थित भूरा यादव का पुरवा के बच्चों ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। बच्चों ने हाथों में तख्तियां लेकर "रोड नहीं तो स्कूल नहीं" के नारे लगाए और प्रशासन से जल्द से जल्द सड़क बनवाने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क न होने के कारण बच्चों को स्कूल आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जिससे शिक्षा भी प्रभावित होती है।
बच्चों की मांग है कि उन्हें सुरक्षित और बेहतर रास्ता उपलब्ध कराया जाए ताकि वे बिना किसी परेशानी के स्कूल जा सकें।
क्या आपको लगता है कि बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा को देखते हुए इस सड़क का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।
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एक विनम्र अपील – आइए, एक मासूम की जिंदगी में उम्मीद की किरण बनें 🙏

जय हिंद साथियों,

कल मैंने ग्राम जारी, जनपद बाँदा के एक बेहद गरीब और असहाय बच्चे की पीड़ा आप सभी के साथ साझा की थी। उस वीडियो को देखने के बाद आप सभी ने जो संवेदना, प्रेम और सहयोग की भावना दिखाई, उसके लिए मैं हृदय की गहराइयों से आपका आभार व्यक्त करता हूँ।

आज मैं आप सभी से हाथ जोड़कर निवेदन करता हूँ कि यदि आपकी सामर्थ्य हो, तो कृपया इस बच्चे की मदद के लिए अपनी स्वेच्छा से आर्थिक सहयोग करें। आपका ₹10, ₹50, ₹100 या उससे अधिक का छोटा-सा योगदान भी उस परिवार के लिए बहुत बड़ी राहत बन सकता है।

ऑनलाइन सहयोग हेतु:📱 Google Pay / PhonePe: 8882096636भुगतान करते समय "ज्योति देवी" नाम दिखाई देगा, वही सही प्राप्तकर्ता हैं।

याद रखिए, किसी जरूरतमंद के आँसू पोंछने से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। आपका एक छोटा-सा सहयोग किसी मासूम के चेहरे पर मुस्कान और उसके परिवार के जीवन में उम्मीद लौटा सकता है।

आइए, इंसानियत का हाथ बढ़ाएँ और इस नेक कार्य में सहभागी बनें।
सादर धन्यवाद।
ए एस नोमानी 
राष्ट्रीय अध्यक्ष बुंदेलखंड इंसाफ सेना बांदा 
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केन नदी बांदा में आज दिनांक 15/07/2026 का जल स्तर देखें कोई खतरे की बात नहीं है। बहुत ही सुन्दर दृश्य।
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बांदा: बुंदेलखंड इंसाफ सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए. एस. नोमानी ने मीडिया को जारी प्रेस नोट में कहा कि नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट सहित महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहे आंदोलन में कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक की मांगों का बुंदेलखंड इंसाफ सेना समर्थन करती है।
उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक की तबीयत लगातार बिगड़ रही है और उनका लगभग 8 किलोग्राम वजन कम हो चुका है। नोमानी ने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि "क्या सरकार उनके मरने का इंतज़ार कर रही है?"
ए. एस. नोमानी ने कहा कि सरकार को आंदोलनकारियों के स्वास्थ्य और देश के विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि देश में "आपातकाल जैसे हालात" बने हुए हैं और लोकतांत्रिक तरीके से चल रहे इस आंदोलन में सभी नागरिकों को अपनी भागीदारी निभानी चाहिए। <nis:link nis:type=tag nis:id=up90creator nis:value=UP90Creator nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=sonamwangchuk nis:value=SonamWangchuk nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=neet nis:value=NEET nis:enabled=true nis:link/>
रोडवेज़ बस स्टैंड बांदा में लगा जाम हमेशा की तरह।
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बांदा: महज़ 30 मीटर की दूरी पर दो सरकारी हैंडपंप, लोगों ने उठाए सवाल
बांदा के बिजलीखेड़ा मोहल्ले में जल संस्थान द्वारा वर्षों पहले लगाए गए दो हैंडपंप आज चर्चा का विषय बने हुए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, दोनों हैंडपंप लगभग 30 मीटर की दूरी पर लगे हैं।
मोहल्ले के लोगों का कहना है कि इनमें से एक हैंडपंप पूरी तरह खराब है, जबकि दूसरे से भी काफी देर तक चलाने के बाद ही पानी निकलता है। पानी निकालने में अधिक मेहनत लगने के कारण लोग इनका कम ही उपयोग करते हैं।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब एक हैंडपंप उपयोगी नहीं है, तो क्या उसे ऐसे स्थान पर स्थानांतरित किया जाना चाहिए जहाँ लोगों को इसकी वास्तव में आवश्यकता हो? स्थानीय लोग यह भी पूछ रहे हैं कि क्या इतने कम अंतर पर दो हैंडपंप लगाना सरकारी संसाधनों के उचित उपयोग का उदाहरण है?
आपकी क्या राय है?
क्या खराब हैंडपंप को किसी जरूरतमंद इलाके में लगाया जाना चाहिए?
क्या संबंधित विभाग को इसकी जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए?
अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।
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