बछवाड़ा प्रखंड अतंर्गत दियारा क्षेत्र में गंगा के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि के बाद स्थिति गंभीर हो गई है। दादूपुर, बिशनपुर, चमथा एक, दो और तीन सहित पांच पंचायत का हिस्सा जलमग्न हो गया हैं। इसके चलते पशुपालक अपने मवेशियों के साथ घर-द्वार छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।
पिछले तीन दिनों से गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। इस वजह से दियारा क्षेत्र के खेत-खलिहान पानी में डूब गए हैं, जिससे मवेशियों के चारे को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। चमथा और बछवाड़ा को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर लोदियाही और अजीतपुर बिशनपुर के समीप पानी में ऊपर से बह रहा है, और लोग घुटने भर पानी से होकर आवाजाही कर रहे हैं।
दियारा क्षेत्र के निचले इलाकों जैसे बिचली दीरी, वसूलिया टोल, रतलाहपुर दियारा और जमाइन काट में आवागमन के लिए नाव ही एकमात्र सहारा बचा है। लोग नावों का उपयोग कर रहे हैं। देर शाम से बाया नदी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे दियारा क्षेत्र में पानी तेजी से फैल रहा है।
स्थानीय निवासी उमाशंकर पासवान, पिंटू कुमार, नीतिलाल राउत, रामबाबू राय, शिवसागर, भाजपा नेता शत्रुघ्न कुमार, शिक्षक चंदन कुमार और बिशनपुर पंचायत के पूर्व मुखिया श्री राम राय ने बताया कि गंगा का जलस्तर बढ़ने से चारों ओर पानी भर गया है। किसानों की मक्का और मिर्च सहित अन्य फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं, जिससे उन्हें लाखों रुपए का नुकसान हुआ है।
पशुपालकों के सामने मवेशियों के चारे का घोर संकट उत्पन्न हो गया है, जिसके कारण वे अपने गांवों को छोड़कर अन्य सुरक्षित स्थानों पर जा रहे हैं। आवागमन के लिए लोगों को प्रतिदिन 100 से 150 रुपए में नाव किराए पर लेनी पड़ रही है। देर शाम नाविक अपनी नावें लेकर चले जाते हैं, जिससे रात में बाजार जाने या अन्य जगहों से लौटने में परेशानी होती है। स्वास्थ्य खराब होने पर डॉक्टर भी इन इलाकों में आने से कतराते हैं।
उन्होंने कहा कि मनरेगा योजना के तहत दियारा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बाढ़ आश्रय स्थल का निर्माण कराया गया। लेकिन धरातल पर करोड़ों खर्च के बावजूद आश्रय लेने का जगह नहीं है। जिस वजह से मजबूरन लोग गांव घर छोड़कर अन्य जगहों पर पलायन करने को विवश है।