जिनसे कभी संघर्ष था, उन्हीं की कलाई पर बांधी राखी
भानुप्रतापपुर के ग्राम चौगेल (मुल्ला) स्थित पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पित माओवादियों ने डीआरजी जवानों को राखी बांधकर रक्षाबंधन मनाया।
आत्मसमर्पित माओवादी शांति कवाची ने कहा—
“पहली बार रक्षाबंधन का त्योहार मना रही हूं। मुख्यमंत्री कौशल विकास प्रशिक्षण के माध्यम से राखी बनाना सीखा और आज अपने हाथों से बनाई राखी पुलिस जवानों को बांधना मेरे लिए बेहद खास और भावुक अनुभव है। आत्मसमर्पण के बाद अब लग रहा है कि मैं समाज की मुख्यधारा में लौट आई हूं।”
वहीं डीआरजी जवान टेकेश्वर हिचामी ने कहा—
“पहले परिस्थितियां ऐसी थीं कि दोनों पक्ष बंदूक लेकर आमने-सामने रहते थे। आज वही हाथ राखी के पवित्र धागे से जुड़े हैं। यह मेरे लिए बेहद अलग और भावुक अनुभव है।”
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की नक्सल पुनर्वास नीति और कौशल विकास प्रशिक्षण से जुड़कर आत्मसमर्पित माओवादी अब हथियार छोड़कर हुनर के साथ नई जिंदगी की शुरुआत कर रहे हैं।
बंदूक से राखी तक का यह सफर सिर्फ रक्षाबंधन नहीं, बल्कि संघर्ष से शांति और अविश्वास से विश्वास की नई कहानी है। 🕊️❤️
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Kanker, Chhattisgarh | Aug 28, 2026