**व्यवस्था से हारकर शत-प्रतिशत दिव्यांग दीपक गुप्ता ने की परिवार से संबंध तोड़ने की घोषणा; ६ मूलभूत सुविधाओं और रुकी पेंशन के लिए ३० जून से कलेक्ट्रेट के सामने करेंगे क्रमिक अनशन**
**मऊगंज** मऊगंज जिले के ग्राम पंचायत सीतापुर से प्रशासनिक उपेक्षा और एक दिव्यांग के आत्मसम्मान की लड़ाई का ऐसा झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरी शासकीय व्यवस्था की संवेदनशीलता पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। क्षेत्र के जाने-माने शत-प्रतिशत दिव्यांग दीपक गुप्ता ने विपरीत परिस्थितियों और शारीरिक लाचारी के चलते मध्य प्रदेश सरकार और मऊगंज जिला प्रशासन के समक्ष वैधानिक रूप से अपने समस्त पारिवारिक और सगे-संबंधियों से रिश्ते समाप्त करने की आत्मघाती घोषणा कर दी है। दीपक गुप्ता का कहना है कि वे अब पूर्णतः अकेले रहकर अपने आत्मसम्मान के साथ जीवन यापन करना चाहते हैं, लेकिन इस दृढ़ निर्णय के बाद अकेले जीवन-यापन के लिए सरकार द्वारा दिव्यांगों को दी जाने वाली ६ मूलभूत शासकीय सुविधाएं पाना उनका वैधानिक अधिकार है, जिससे उन्हें आज तक वंचित रखा गया है। उनकी मांगों में कई महीनों से रुकी हुई दिव्यांग सामाजिक सुरक्षा पेंशन को तत्काल बहाल करना, जीवन-यापन के लिए बीपीएल पात्रता पर्ची (राशन कार्ड) के तहत मुफ्त राशन उपलब्ध कराना, और सामाजिक न्याय विभाग के माध्यम से स्वतंत्र आवागमन के लिए तत्काल बैटरी चालित मोटराइज्ड व्हीलचेयर प्रदान करना शामिल है। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत अपने व्यवसाय के विस्तार के लिए कम ब्याज या सब्सिडी पर लोन स्वीकृत करने, दिव्यांग श्रेणी के अंतर्गत प्राथमिकता के आधार पर पीएम आवास (कुटीर) स्वीकृत करने और परिवहन व रेलवे में मुफ्त यात्रा पास सुलभ कराने की मांग मुख्यमंत्री और जिला दण्डाधिकारी से की है। यह लड़ाई सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं है; अपनी इन न्यायसंगत मांगों को लेकर और मऊगंज क्षेत्र के अन्य सैकड़ों पीड़ित वृद्ध, विधवा व दिव्यांग पेंशनधारियों के हक में आवाज बुलंद करते हुए दीपक कुमार गुप्ता आगामी मंगलवार, दिनांक ३० जून २०२६ से क्षेत्र के १०० सम्मानित पीड़ित नागरिकों के साथ सीधे मऊगंज कलेक्ट्रेट परिसर के सामने 'जल ग्रहण करते हुए क्रमिक शांतिपूर्ण अनशन' पर बैठने जा रहे हैं। चूंकि वे शारीरिक रूप से कलेक्ट्रेट कार्यालयों में बार-बार आने-जाने में पूरी तरह असमर्थ हैं, इसलिए उन्होंने इस हस्ताक्षरित आवेदन पत्र को सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों (व्हाट्सएप/ईमेल) के जरिए जिला प्रशासन, एसपी और मुख्यमंत्री तक भेजा है और अनशन स्थल पर आवश्यक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की चेतावनी दी है। अब देखना यह होगा कि मऊगंज जिला प्रशासन इस शत-प्रतिशत दिव्यांग पत्रकार और सैकड़ों बुजुर्गों की इस दर्दभरी पुकार पर समय रहते संज्ञान लेता है या फिर ३० जून को कलेक्ट्रेट के सामने व्यवस्था की असंवेदनशीलता का एक नया अध्याय लिखा जाएगा।
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Mauganj, Rewa | Jun 25, 2026