'एक साल बाद भी नहीं मिला इंसाफ': नगर निगम सफाईकर्मी मनीष मांझी हत्याकांड में परिजनों का फूटा गुस्सा, पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप; थाना अध्यक्ष बोले- आरोप निराधार, कई आरोपी जमानत पर बाहर
गया। गया शहर के डेल्हा थाना क्षेत्र के बैरागी अंदर मोहल्ला में नगर निगम के सफाईकर्मी मनीष मांझी की 3 अगस्त 2025 को गोली मारकर हुई हत्या के लगभग एक वर्ष पूरे होने को हैं। इस बीच मृतक के परिजनों ने गुरुवार को पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए गंभीर आरोप लगाए। मृतक की मां सुनीता देवी और पत्नी सलोनी कुमारी ने कहा कि अब तक उन्हें न्याय नहीं मिला है। उनका आरोप है कि हत्या के मामले में नामजद सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है, जबकि फरार आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और लगातार केस वापस लेने व जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। हालांकि, डेल्हा थाना अध्यक्ष ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पुलिस नियमानुसार कार्रवाई कर रही है और जिन आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, वे अदालत से जमानत पर बाहर हैं।
12 नामजद में सिर्फ 5 गिरफ्तार, बाकी पर कार्रवाई की मांग
परिजनों ने बताया कि मनीष मांझी हत्याकांड में कुल 12 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इनमें से केवल पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, जबकि शेष सात आरोपी आज भी बाहर हैं। उनका आरोप है कि यही आरोपी लगातार परिवार पर दबाव बना रहे हैं और केस उठाने की धमकी दे रहे हैं। परिवार का कहना है कि एक साल बीत जाने के बावजूद सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है।
मां का आरोप- पुलिस आरोपी को घर छोड़कर गई, विरोध करने पर जेल भेजने की दी धमकी
मृतक की मां सुनीता देवी ने पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि बुधवार की सुबह करीब तीन बजे डेल्हा थाना की पुलिस एक आरोपी को लेकर उनके घर पहुंची और उसे वहीं रहने देने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो पुलिसकर्मियों ने पूरे परिवार को जेल भेजने की धमकी दी।
सुनीता देवी ने कहा, "जिसने मेरे बेटे की हत्या की, उसे गिरफ्तार कर जेल भेजने की जगह पुलिस उसे संरक्षण दे रही है। मेरा बेटा वापस नहीं आएगा, लेकिन उसके हत्यारों को सजा तो मिलनी चाहिए। आखिर मेरे बेटे का कसूर क्या था? वह नगर निगम में सफाईकर्मी था और ड्यूटी करके घर लौट रहा था, तभी रास्ते में उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई।" उन्होंने मुख्य आरोपी के रूप में बबलू मांझी का नाम लेते हुए उसकी तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। उनका कहना है कि जब तक सभी आरोपी गिरफ्तार नहीं होंगे, तब तक उनके परिवार को न्याय नहीं मिलेगा।
'धमकी के साये में जी रहा है परिवार'
मृतक के मां सुनीता देवी ने कहा कि फरार आरोपी लगातार उन्हें और उनके परिवार को डराने-धमकाने का काम कर रहे हैं। केस वापस नहीं लेने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि हत्या के बाद से उनका पूरा परिवार भय के माहौल में जी रहा है। उन्होंने राज्य सरकार से अपील करते हुए कहा कि सरकार अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात करती है, लेकिन उनके बेटे के हत्यारे अब भी खुलेआम घूम रहे हैं। उन्होंने मांग की कि सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर कठोर सजा दिलाई जाए।
पत्नी बोलीं- दो बच्चों के साथ जिंदगी मुश्किल, पुलिस से नहीं मिला न्याय
मृतक की पत्नी सलोनी कुमारी ने कहा कि पति की हत्या के बाद पूरा परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा है। उन्होंने बताया कि उनके दो छोटे बच्चे हैं और परिवार का पालन-पोषण करना बेहद कठिन हो गया है।
सलोनी ने कहा, "मेरे पति ही घर के एकमात्र कमाने वाले थे। उनकी हत्या के बाद हम लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। बच्चों की परवरिश मुश्किल हो गई है। ऊपर से जिन लोगों ने मेरे पति की हत्या की, वे खुलेआम घूम रहे हैं। हमें लगातार डराया और धमकाया जा रहा है।"
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए गंभीरता से कार्रवाई नहीं कर रही है। उनका कहना है कि जब तक सभी नामजद अभियुक्त गिरफ्तार नहीं होंगे, तब तक उनके परिवार को न्याय नहीं मिलेगा।
थाना अध्यक्ष ने आरोपों को बताया गलत
दूसरी ओर, डेल्हा थाना अध्यक्ष वेंकटेश्वर ओझा ने परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि मनीष मांझी हत्याकांड में पुलिस अब तक पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। थाना अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि जिन अन्य आरोपियों की बात कही जा रही है, वे अदालत से जमानत पर बाहर हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा किसी आरोपी को संरक्षण देने या घर छोड़ने जैसी बातें सही नहीं हैं। पुलिस कानून के अनुसार कार्रवाई कर रही है और मामले में आगे भी विधिसम्मत कार्रवाई जारी रहेगी।
एक साल बाद भी इंसाफ का इंतजार
मनीष मांझी हत्याकांड को एक वर्ष पूरा होने वाला है, लेकिन परिजनों का कहना है कि उन्हें अब तक न्याय नहीं मिला। परिवार का आरोप है कि फरार अथवा जमानत पर बाहर आरोपी लगातार उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। वहीं पुलिस का कहना है कि मामले में कानून के तहत कार्रवाई की गई है और लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं।
अब इस मामले में निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि परिजनों की शिकायतों पर पुलिस और प्रशासन क्या कदम उठाते हैं तथा शेष आरोपियों के संबंध में आगे क्या कानूनी कार्रवाई होती है।
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