MDDM कॉलेज की छात्राओं ने दिखाई सिनेमा की अनकही कहानी! पर्दे पर उतरा समाज का संघर्ष, गरीबी और हकीकत का आईना
सिनेमा सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज की तस्वीर और इतिहास को समझने का एक सशक्त माध्यम भी है। इसी सोच को रचनात्मक अंदाज में प्रस्तुत किया मुजफ्फरपुर के महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय (MDDM) की छात्राओं ने।
मंगलवार को महाविद्यालय में 'सिनेमा का इतिहास' विषय पर एक आकर्षक कोलाज प्रेजेंटेशन का आयोजन किया गया। इसमें छात्राओं ने भारतीय सिनेमा के सफर के साथ-साथ यथार्थवादी और समानांतर सिनेमा की महत्ता को बखूबी दर्शाया।
प्रस्तुति के दौरान बताया गया कि किस तरह व्यावसायिक फिल्मों से अलग समानांतर सिनेमा ने गरीबी, जातिगत भेदभाव और आम आदमी के संघर्षों को पर्दे पर जगह दी। सत्यजीत रे की कालजयी फिल्म 'पथेर पांचाली', बिमल रॉय और श्याम बेनेगल के योगदान को भी प्रमुखता से रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्राचार्या डॉ. अलका जायसवाल ने कहा कि भारतीय सिनेमा हमारे समाज, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना का जीवंत दस्तावेज है। वहीं, विशिष्ट अतिथि डॉ. अर्चना पांडे ने भी कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. प्रांजलि के मंच संचालन में आयोजित इस कार्यक्रम में शर्मिला, नेहा, अनु, शाल्वि, रिमझिम, निशा और नगमा खातून ने शानदार प्रस्तुतियां दीं।
इस आयोजन ने छात्राओं को सिनेमा के इतिहास के साथ समाज की वास्तविकताओं को समझने का एक नया नजरिया दिया।
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