❤️ 9 साल पहले बिछड़ी मां लखनऊ की सड़क पर मिली, बेटे से मिलते ही दोनों लिपटकर रो पड़े; बेटा बोला- भगवान ने मेरी प्रार्थना सुन ली
गुजरात से वर्ष 2017 में लापता हुईं 55 वर्षीय रतन बेन आखिरकार नौ साल बाद लखनऊ में अपने परिवार से मिल गईं। मानसिक रूप से अस्वस्थ रतन बेन को कुछ दिन पहले हजरतगंज थाना क्षेत्र में बालू अड्डा के पास पुलिस ने परेशान हालत में सड़क पर घूमते हुए पाया था।
बेटे से मिलने का पल इतना भावुक था कि थाने में मौजूद पुलिसकर्मी भी भावुक हो गए। रतन बेन को सामने देखते ही उनका बेटा विशाल जयेश भाई कुछ पल के लिए स्तब्ध रह गया। इसके बाद वह मां से लिपटकर रोने लगा। रतन बेन ने भी बेटे का हाथ पकड़ लिया और काफी देर तक नहीं छोड़ा।
बुधवार शाम विशाल अपनी मां को लेकर गुजरात के लिए रवाना हो गया। उसने मां को खोजने में मदद करने के लिए लखनऊ पुलिस का धन्यवाद किया।
‘फूलपाड़ा’ शब्द ने पहुंचाया परिवार तक
हजरतगंज थाना प्रभारी विक्रम सिंह के मुताबिक, कुछ दिन पहले पुलिस को बालू अड्डा के पास एक महिला परेशान हालत में मिली थीं। वह मानसिक रूप से अस्वस्थ लग रही थीं। पुलिसकर्मी उन्हें थाने लेकर आए और महिला पुलिसकर्मियों ने बातचीत के जरिए उनकी पहचान और घर का पता जानने की कोशिश की।
हालांकि रतन बेन ज्यादा जानकारी नहीं दे पा रही थीं और टूटे-फूटे शब्दों में ही जवाब दे रही थीं। इसी दौरान उन्होंने सिर्फ एक शब्द स्पष्ट रूप से कहा—‘फूलपाड़ा’।
पुलिस ने गूगल मैप पर फूलपाड़ा तलाशा तो गुजरात का एक इलाका सामने आया। इसके बाद लखनऊ पुलिस ने गुजरात पुलिस से संपर्क किया। जांच में पता चला कि 2017 में रतन बेन की गुमशुदगी दर्ज हुई थी।
वीडियो कॉल पर मां को देखकर हैरान रह गया बेटा
गुजरात पुलिस ने रतन बेन के परिवार से संपर्क किया। पता चला कि उनका बेटा विशाल सूरत के फूलपाड़ा स्थित विराज पैलेस में रहता है और सूरत नगर निगम में काम करता है।
हजरतगंज पुलिस ने मंगलवार को वीडियो कॉल के जरिए विशाल की अपनी मां से बात कराई। स्क्रीन पर मां को सामने देखकर विशाल कुछ पल तक विश्वास नहीं कर सका। नौ साल से जिस मां की तलाश कर रहा था, वह लखनऊ में मिल चुकी थीं।
थाने में आमने-सामने हुए मां-बेटा
बुधवार को विशाल गुजरात पुलिस, अपने दोस्त प्रवीण और एक अन्य व्यक्ति के साथ लखनऊ के हजरतगंज थाने पहुंचा।
उस समय रतन बेन थाना प्रभारी के कमरे में कुर्सी पर बैठी थीं। जैसे ही उनकी नजर बेटे पर पड़ी, वह रोने लगीं। विशाल भी कुछ सेकेंड तक मां को देखता रहा और फिर उनसे लिपटकर रो पड़ा।
रतन बेन ने बेटे का हाथ पकड़ लिया और काफी देर तक उसे छोड़ा नहीं। पुलिसकर्मियों ने दोनों को संभाला।
पति और मायके में मौतों के बाद बिगड़ी मानसिक स्थिति
विशाल ने पुलिस को बताया कि उसके पिता जयेश भाई रौठार, मामा और नानी की मौत के बाद उसकी मां गहरे सदमे में चली गई थीं। इसके बाद उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई थी।
विशाल के मुताबिक, वर्ष 2017 से पहले भी रतन बेन एक बार घर से चली गई थीं, लेकिन कुछ दिनों बाद उनका पता चल गया था।
उसने बताया कि उसकी शादी और बेटे के जन्म के बाद रतन बेन दोबारा घर से निकल गईं। इस बार वह वापस नहीं लौटीं।
परिवार ने गुजरात के अलग-अलग थानों, आश्रयगृहों और संभावित स्थानों पर उनकी तलाश की, लेकिन नौ साल तक कोई सुराग नहीं मिला।
आखिरकार लखनऊ पुलिस को मिले ‘फूलपाड़ा’ शब्द के जरिए परिवार तक पहुंचने का रास्ता खुला और नौ साल से बिछड़ी मां-बेटे की मुलाकात हो गई।
बुधवार शाम विशाल अपनी मां को लेकर गुजरात के लिए रवाना हो गया।