मुगलसराय के शाहिद जमाल को भूख लगी तो पैदल चलकर काशी के अन्नपूर्णा मंदिर स्थित अन्नक्षेत्र पहुंच गया,मकसद सिर्फ एक था, दो वक्त का पेट भर खाना......!
सिर पर मुस्लिम टोपी थी,इसलिए सुरक्षा कर्मियों की नजर पड़ी, तलाशी में चाकू मिला तो मामला थाने पहुंच गया,लेकिन पूछताछ में सामने आया कि चाकू सब्जी काटने वाला था.....!
जिसे वह आयोजनों में सब्जी काटने के लिए लेकर चलता था,और सबसे भावुक बात ये कि जिस जगह पहले पेट भर खाना मिला था, भूख ने उसे दोबारा वहीं पहुंचा दिया......!
सोचिए,जिस देश में इंसान की पहचान अक्सर उसके नाम और कपड़ों से होने लगती है,वहां एक भूखे इंसान की पहचान सिर्फ इतनी होनी चाहिए कि उसे खाना चाहिए.....!
मंदिर हो या मस्जिद,गुरुद्वारा हो या चर्च,भूख के सामने धर्म छोटा पड़ जाता है और इंसानियत सबसे बड़ी हो जाती है,आखिर में पुलिस ने जांच के बाद उसे बैठाया.....!
और अन्नपूर्णा अन्नक्षेत्र से उसके लिए भोजन भी मंगवाया, पेट की आग का कोई धर्म नहीं होता,और भूखे को खाना खिलाने से बड़ा कोई मजहब नहीं......!