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Rajanikant Prabhanjan

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कर्नाटक के मांड्या में नूर नाम की बुजुर्ग महिला पूरी जिंदगी भीख मांगकर गुज़ारा करती रही,लेकिन मौ"त के बाद उनके कमरे का जो कैश बॉक्स खुला,उसे देखकर हर कोई हैरान रह गया......!

कमरे में बोरे और बैगों में 8 लाख रुपये से ज्यादा के सिक्के और नोट मिले,जिंदगी में दो रोटी के लिए किसी ने हाल तक नहीं पूछा, लेकिन मौ"त के बाद जमा पैसों पर......!

रिश्तेदारों के बीच खींचतान शुरू हो गई,कहानी बस इतनी सी है जिंदा थी तो बेचारी भिखारी,मरते ही लाखों की मालकिन निकल गई.....! 

कभी-कभी जिंदगी भी ऐसा हिसाब करती है कि इंसान सोचता रह जाता है पैसा था,मगर उसके साथ जीने वाला कोई नहीं था.....!

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चंदौली के चहनियां के रूपेठा गाँव में विकास के दावों की खुली पोल! 😡

रूपेठा गांव का मुख्य मार्ग देखकर सवाल उठता है—क्या गरीब और दलितों का विकास सिर्फ कागजों और भाषणों में हुआ है?

सड़क की बदहाल तस्वीरें जमीनी हकीकत खुद बयां कर रही हैं।
दावे बड़े हैं,लेकिन गांव की सड़क आज भी बदहाल क्यों..?

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खान सर को लेकर एक मुस्लिम युवती के कथित बयान का वीडियो/दावा तेजी से चर्चा में है,इसमें आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ हिंदू छात्राओं से राखी बंधवाने के बाद उनके मोबाइल नंबर कथित तौर पर दूसरे लोगों तक पहुंचाए गए......!

लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल है,क्या यह आरोप सच है या सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा एक अपुष्ट दावा? खान सर के राखी कार्यक्रम की तस्वीरें और खबरें जरूर सामने आई हैं.......!

2025 में पटना में 15 हजार से अधिक छात्राओं द्वारा उन्हें राखी बांधने की बात खुद खान सर ने साझा की थी और इसे उन्होंने जाति-धर्म से ऊपर इंसानी रिश्ते का उदाहरण बताया था......! 

ऐसे में अगर किसी छात्रा ने वास्तव में नंबर साझा करने या किसी अनुचित व्यवहार का आरोप लगाया है,तो आरोप लगाने वाली युवती का पूरा बयान, मूल वीडियो,तारीख,स्थान और उपलब्ध सबूत सामने आने चाहिए......!

किसी भी शिक्षक या संस्था पर गंभीर आरोप हों तो न तो बिना जांच के उसे सच मानना चाहिए और न ही शिकायत को सिर्फ इसलिए खारिज कर देना चाहिए कि सामने वाला व्यक्ति लोकप्रिय है.....! 

अगर आरोप झूठा है तो उसका खंडन और सबूत सामने आएं...!

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आरक्षण के खिलाफ उतरा दलित समाज कुछ ही जातियों तक क्यों सीमित रहे पूरा फायदा...?

महाराष्ट्र में अनुसूचित जाति समाज के भीतर आरक्षण में वर्गीकरण और क्रीमी लेयर की मांग को लेकर प्रदर्शन की खबरें सामने आ रही हैं,प्रदर्शनकारियों का सवाल बेहद सीधा है......!

जब SC वर्ग में कई जातियां शामिल हैं,तो आरक्षण का लाभ बार बार कुछ ही अपेक्षाकृत प्रभावशाली जातियों तक क्यों पहुंचे.?
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि.....!

आरक्षण का उद्देश्य उन लोगों तक अवसर पहुंचाना है जो सामाजिक और शैक्षणिक रूप से सबसे पीछे हैं,अगर एक ही व्यवस्था का लाभ कुछ जातियां लगातार उठाती रहें.....!

और दूसरी जातियां पीढ़ियों तक उसी स्थिति में बनी रहें,तो इस असमानता पर सवाल उठना स्वाभाविक है,इसीलिए मांग उठ रही है कि SC आरक्षण के भीतर न्यायपूर्ण वर्गीकरण हो.....!

ताकि जिन जातियों तक आरक्षण का लाभ अपेक्षाकृत कम पहुंचा है,उन्हें भी उचित प्रतिनिधित्व मिल सके,साथ ही क्रीमी लेयर पर भी बहस हो कि......!

आरक्षण का लाभ वास्तव में जरूरतमंद परिवारों तक कैसे पहुंचे, सवर्ण समाज भी लंबे समय से यही सवाल उठाता रहा है कि आरक्षण खत्म करने से ज्यादा जरूरी क्या इसे जरूरतमंदों तक सीमित और न्यायपूर्ण बनाना नहीं है.....?

आपकी राय क्या है—आरक्षण में वर्गीकरण और क्रीमी लेयर लागू होनी चाहिए या नहीं? कमेंट में अपनी बात जरूर रखें

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जब गाली-गलौज और जातिगत टिप्पणी के आधार पर SC/ST एक्ट है,तो फिर सवर्ण और पिछड़ा वर्ग के लिए ऐसा कानून क्यों नहीं.? जातिगत गालियां और टिप्पणियां सिर्फ एक वर्ग नहीं,सवर्ण और पिछड़े भी झेलते हैं। सहमत लोग शेयर करें
सवर्णों ने हजारों साल तक शोषण किया,ऐसे बड़े दावों को बार-बार दोहराने से वे इतिहास का प्रमाण नहीं बन जाते,इतिहास भावनाओं से नहीं,प्रमाणों से तय होता है, - सर्वेश पाण्डेय सवर्ण आर्मी प्रमुख.

अगर आज किसी समुदाय की सामाजिक स्थिति,शिक्षा,आर्थिक स्थिति और जनसंख्या को देखकर पूरे 5000 साल के इतिहास का फैसला नहीं किया जा सकता......!

तो उसी तरह पूरे सवर्ण समाज को हजारों साल के कथित शोषण का सामूहिक दोषी ठहराना भी तर्कसंगत नहीं है,सवर्ण समाज में भी गरीब,वंचित और संघर्ष करने वाले परिवार रहे हैं.....!

हर व्यक्ति को उसकी जाति के आधार पर अपराधी या शोषक मान लेना न्याय नहीं,बल्कि एक नया पूर्वाग्रह है,आरक्षण हो, सामाजिक न्याय हो या जातिगत भेदभाव—हर मुद्दे पर बहस होनी चाहिए....!

लेकिन तथ्यों,वर्तमान परिस्थितियों और समान नागरिक अधिकारों के आधार पर,सवाल किसी जाति को नीचा दिखाने का नहीं सवाल यह है.......!

कि क्या आज के व्यक्ति को उसके पूर्वजों के नाम पर दोषी ठहराना न्याय है? समानता चाहिए तो न्याय भी समान होना चाहिए, इतिहास का हिसाब इतिहास से हो,हर व्यक्ति से नहीं......! 

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कटेहरा ग्राम सभा में वीणा पाण्डेय के कामों की मिसाल आज भी लोगों की जुबान पर है..? 

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आपके जाति के नेताओं का विकास, लेकिन आप आज भी पीछे क्यों? | जाति की राजनीति का कड़वा सच.....

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वाराणसी में बाबा विश्वनाथ मंदिर से जुड़े तीन ब्राह्मण पुजारियों को चौक थाने के अंदर मीडिया कैमरों के सामने कथित तौर पर कान पकड़कर उठक-बैठक कराने की घटना बेहद गंभीर और शर्मनाक है......! 

सवाल सीधा है पुलिस को आखिर किस कानून या अधिकार के तहत किसी व्यक्ति को इस तरह सार्वजनिक रूप से अपमानित करने का अधिकार मिला.....?

अगर किसी पुजारी से गलती हुई थी तो कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए थी,कैमरों के सामने बेइज्जती क्यों? और अगर यह कार्रवाई गलत तरीके से हुई है......!

तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और सार्वजनिक माफी कब होगी? एक और सवाल जनता पूछ रही है, क्या कानून सबके लिए बराबर है.....?

बड़े आर्थिक घोटालों के आरोपों में घिरे लोगों के साथ भी क्या यही रवैया अपनाया जाता है? अगर नहीं, तो फिर छोटे लोगों को ही कैमरों के सामने अपमानित करने की यह व्यवस्था क्यों...?

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SC/ST का अपमान संविधान की भावना के खिलाफ है,तो सवाल यह भी है, क्या ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या किसी भी सामान्य वर्ग के व्यक्ति का अपमान संविधान की नजर में अपमान नहीं है.....?

कानून और संविधान की असली खूबसूरती समान सम्मान और समान न्याय में है,किसी जाति के अपमान को सही ठहराने में नहीं, जाति कोई भी हो,.....!

अपमान गलत है, सम्मान सबका न्याय सबके लिए....! 

 योग गुरु बाबा रामदेव
सवाल भाजपा से नहीं,अब सवर्ण वोटरों से है👇👇👇👇

गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा, नितिन नवीन और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन तमाम बड़े नेताओं को लेकर सवर्ण समाज अपनी राजनीतिक उम्मीदें जोड़ता है......! 

लेकिन सवाल सीधा है,UGC के मुद्दे पर इन नेताओं का स्पष्ट स्टैंड क्या है.? अगर UGC के खिलाफ बोलना है तो खुलकर बोलिए,पक्ष में हैं तो खुलकर बताइए,खामोशी क्यों.?

सबसे बड़ा सवाल सवर्ण वोटर से है,जब कोई दूसरा नेता UGC के पक्ष में बयान देता है तो आप उससे सवाल करते हैं,वोट न देने की बात करते हैं, लेकिन अपने पसंदीदा नेताओं से कभी पूछते क्यों नहीं कि UGC पर उनकी नीति क्या है.....?

लोकतंत्र में वोट कोई भावनात्मक चेक नहीं है,जिसे वोट देना है, उससे सवाल भी होना चाहिए,सवर्ण समाज को किसी पार्टी का स्थायी वोट बैंक बनने के बजाय हर नेता से जवाब मांगना चाहिए.....! 

और अगर जवाब नहीं मिलता तो सवाल सिर्फ इतना है वोट चाहिए तो UGC पर अपना स्पष्ट स्टैंड बताइए,आखिर सवर्ण वोटर कब तक सिर्फ वोट देगा और सवाल नहीं पूछेगा......?

पहले अपने नेताओं से पूछिए,फिर दूसरों के नेताओं पर फैसला सुनाइए.......! 

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देवरिया में सरकारी स्कूलों की बदहाली दिखाना अपराध है क्या.?

4 सरकारी स्कूलों की खस्ता हालत सामने रखने वाले रजत सिंह पर FIR दर्ज हो गई,सवाल सीधा है जिन स्कूलों की हालत दिखाई गई, उनकी बदहाली पर कार्रवाई होगी या उसे दिखाने वाले पर...?

स्कूल सुधारना जरूरी है या सच दिखाने वाले की आवाज दबाना..?
Reservation Hatao Andolan के बीच चंदौली वाले तिवारी जी ने सबको आड़े हाथ लिया | Jantar Mantar Protest

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तिरंगा पानी में डूब रहा था… उसे बचाने 22 साल का शोएब गंगा में उतर गया,लेकिन फिर कभी लौटकर नहीं आया! 💔

चंदौली के बड़गावा गांव में 22 वर्षीय शोएब अहमद उर्फ सुब्बू की गंगा में डूबने से दर्दनाक मौ"त हो गई,बताया जा रहा है कि 15 अगस्त को गांव के एक बच्चे ने गंगा के रेतीले इलाके में तिरंगा फहराया था......!

जलस्तर बढ़ने से वह जगह पानी में डूब गई और तिरंगा तेज धारा के बीच फंस गया,तिरंगे को सम्मानपूर्वक बाहर निकालने के लिए सोहेब गंगा में उतर गया,तेज बहाव में उसका संतुलन बिगड़ गया और वह गहरे पानी में डूबने लगा.......!

दोस्तों ने बचाने की कोशिश की,लेकिन सफल नहीं हो सके,बाद में ग्रामीणों ने उसे बाहर निकाला और सैदपुर अस्पताल पहुंचाया,जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया,सोहेब बीए का छात्र और दो भाइयों में छोटा था......!

बेटे की मौत से मां-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है,एक परिवार ने अपना जवान बेटा खो दिया,लेकिन तिरंगे की आन के लिए सोहेब का जज्बा पूरे गांव के दिल में हमेशा जिंदा रहेगा.......! 

सोहेब को भावपूर्ण श्रद्धांजलि, तिरंगे की शान के लिए उसके साहस को सलाम.....!

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दलित आज भी दलित क्यों.? विकास कब होगा.? 

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आरक्षण पर राजा भैया की दो टूक अब बहस असली मुद्दे पर होनी चाहिए!👇👇

रघुराज प्रताप सिंह ‘राजा भैया’ ने आरक्षण को लेकर एक बेहद अहम सवाल उठाया है, क्या सांसद,विधायक,मंत्री और बड़े अफसरों के बच्चों को भी उसी तरह.....!

आरक्षण का लाभ मिलता रहना चाहिए जबकि उनके परिवार को शिक्षा,संसाधन और अवसरों की कमी नहीं है? उनका कहना है जो वंचित नहीं है,उसे आरक्षण का लाभ क्यों......? 

आरक्षण का लाभ वंचितों को मिलना चाहिए, बात कड़वी हो सकती है,लेकिन सवाल बड़ा है,अगर किसी परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति इतनी मजबूत हो चुकी है......!

कि वह अपने बच्चों को महंगे स्कूलों में पढ़ा सकता है,बेहतर संसाधन दे सकता है और जरूरत पड़े तो विदेश तक भेज सकता है, तो क्या आरक्षण का लाभ सबसे पहले उसी परिवार को मिलना चाहिए.......?

आरक्षण किसी की स्थायी जागीर नहीं,बल्कि वंचितों को अवसर देने का संवैधानिक माध्यम है,इसलिए बहस आरक्षण खत्म करने की नहीं,बल्कि यह सुनिश्चित करने की होनी चाहिए.......!

कि उसका लाभ वास्तव में उस व्यक्ति तक पहुंचे जिसे इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है, सवाल सीधा है, जो पहले से सक्षम हो चुका है, क्या उसे बार-बार वही अवसर मिलना चाहिए.......!

जो किसी वास्तविक वंचित का हक बन सकता है? अब इस मुद्दे पर नारे नहीं,ईमानदार बहस और ठोस नीति चाहिए,आरक्षण रहे,लेकिन उसका लाभ सबसे जरूरतमंद तक पहुंचे.......!
आरक्षण खत्म करना है तो पहले जातिवाद खत्म करने की लड़ाई लड़िए👇👇👇!

अवध ओझा सर का कहना है, सवर्णों को सबसे पहले जातिवाद खत्म करने के लिए आंदोलन करना चाहिए,जब जाति व्यवस्था खत्म होगी,तो आरक्षण भी अपने आप खत्म हो जाएगा.......! 

और बात यहीं खत्म नहीं होती,उनका कहना है कि जब तक इस देश में जाति व्यवस्था मौजूद है,तब तक आरक्षण खत्म करना संभव नहीं है.....!

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अगर कोई नेता कहता है “आरक्षण था, आरक्षण है और आरक्षण रहेगा” तो अगला सवाल स्वाभाविक है, क्या आरक्षण का लाभ वास्तव में उन लोगों तक पहुँच रहा है........!

जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है? एक तरफ़ ऐसे परिवार हैं जिनके पास पीढ़ियों से राजनीतिक,आर्थिक और सामाजिक संसाधन मौजूद हैं.......!

दूसरी तरफ़ आज भी लाखों गरीब परिवार खेती,मजदूरी,पशुपालन और छोटे-मोटे कामों के सहारे जीवन चला रहे हैं, इसलिए सवाल किसी एक जाति या नेता के खिलाफ नहीं,......!

व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर होना चाहिए,गरीबी किसी की जाति देखकर नहीं आती,तो सामाजिक न्याय की नीतियों में गरीब और सबसे वंचित व्यक्ति की वास्तविक स्थिति पर भी गंभीर चर्चा क्यों न हो......?

आरक्षण रहे या उसमें सुधार हो, फैसला भावनाओं से नहीं, आंकड़ों  संविधान और वास्तविक सामाजिक-आर्थिक स्थिति के आधार पर होना चाहिए........!

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यही तो bjp चाहती थी👇👇

उघरहिं अंत न होई निबाहू, कालनेमि जिमि रावन राहु ,,
पिछले 10 साल में सरकारी नौकरियों के खाली पद 4.30 लाख से बढ़कर करीब 8.30 लाख हो गए, रेलवे में भी करीब 2.40 लाख पद खाली पड़े हैं......! 

और सरकारी कंपनियों में स्थायी कर्मचारियों की जगह ठेकेदारी का हिस्सा करीब 19% से बढ़कर 50% की तरफ बढ़ रहा है, मतलब नौकरी के दरवाजे बंद नहीं हैं…....!

दरवाजे खुले हैं,बस अंदर भर्ती होने वाला कोई नहीं है,सरकार का नया रोजगार मॉडल शायद यही है, पद खाली रखो,बेरोजगारों को उम्मीद में रखो और आंकड़ों में विकास दिखाओ......! 😏

बेरोजगार पूछ रहा है “नौकरी कब मिलेगी?” सरकार कह रही है भाई, पद तो बहुत हैं, तुम बस खाली पदों की तरह खाली बैठे
 रहो,😂😂
राष्ट्रगान चल रहा था... और यूपी विधानसभा के अध्यक्ष व बीजेपी के वरिष्ठ नेता सतीश महाना जी चल पड़े, शायद उन्हें कहीं ज्यादा जरूरी काम होगा…...!

आखिर बड़े लोग हैं,समय की कीमत जानते हैं,लेकिन सवाल छोटा सा है—राष्ट्रगान से बड़ा भी कोई प्रोटोकॉल हो सकता है क्या..?

देश का सम्मान सिर्फ भाषणों और नारों में नहीं,राष्ट्रगान के सम्मान में खड़े रहने से भी दिखता है, राष्ट्रगान बजता रहता है साहब… लेकिन सम्मान हर बार दिखाना पड़ता है......!

वीडियो कमेंट बॉक्स में 👇👇
GEN Z में किसकी लोकप्रियता ज्यादा—राहुल गांधी या मोदी?

सियासत में दावा दोनों तरफ से है, लेकिन असल सवाल सोशल मीडिया, युवाओं की पसंद और ग्राउंड कनेक्शन का है। 

GEN Z का मूड किसके साथ है—मोदी या राहुल? फैसला जनता करेगी!

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UGC Roll Back & ReservationReform की मांग को लेकर दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन हो रहा है.

UP के डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने प्रदर्शनकारियों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की, क्या अब सरकार की ओर से कोई बड़ा फैसला आएगा.....? 

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आरक्षण का पूरा सच?👇👇 

डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान में SC-ST वर्ग के लिए आरक्षण की व्यवस्था की थी, और अक्सर आपको यही कहते हुए लोग नजर आएंगे कि “हमें आरक्षण का हक संविधान ने दिया है......!

लेकिन क्या यही पूरा सच है.? शायद नहीं, 25 नवंबर 1949... संविधान सभा की last meeting चल रही थी,संविधान बनाने वाली प्रारूप समिति के अध्यक्ष......!

डॉ. अंबेडकर कई आशंकाओं और सवालों का जवाब देने के लिए खड़े हुए,उनके विचारों का सार यह था कि अगर आरक्षण से किसी वर्ग का सामाजिक और आर्थिक विकास हो जाता है......!

तो आने वाली पीढ़ी को भी हमेशा उसी व्यवस्था पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, ये बात किसी और ने नहीं, डॉ अम्बेडकर ने कही आरक्षण का उद्देश्य किसी को हमेशा के लिए.......!

सहारा देना नहीं,बल्कि उस व्यक्ति को equal opportunity तक पहुंचाना होना चाहिए,लेकिन अब जरा भारत की political journey देखिए......!

आरक्षण को एक सीमित और उद्देश्यपूर्ण व्यवस्था के रूप में देखा गया था,लेकिन समय के साथ इसका दायरा लगातार बढ़ता गया, संविधान लागू होने के करीब 40 साल बाद OBC वर्ग के लिए 27% आरक्षण लागू हुआ.......!

इसके बाद संविधान लागू होने के करीब 69 साल बाद EWS के लिए भी 10% आरक्षण की व्यवस्था आ गई, यानी सवाल सिर्फ आरक्षण होने या न होने का नहीं है.......!

सवाल ये है कि आरक्षण का असली उद्देश्य क्या था और आज उसकी दिशा क्या है? क्या आरक्षण हमेशा के लिए चलने वाली व्यवस्था है....?

UGC Roll Back & ReservationReform 

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हर्ष दुबे सरकार के मंत्री के साथ लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं सवाल सीधा है,जब आंदोलन जंतर-मंतर पर समाज के बीच चल रहा था, केंद्र सरकार से बातचीत की बात हो रही थी......!

तो अचानक उपमुख्यमंत्री से मुलाकात क्यों? और उससे भी बड़ा सवाल सरकार की तरफ से इसे हर्ष दुबे के नेतृत्व का आंदोलन क्यों बताया जा रहा है.....?

जब आंदोलन समाज के नेतृत्व में आरक्षण सुधार के लिए था,तो किसी एक व्यक्ति को उसका चेहरा बनाने की कोशिश क्यों.?
सरकार जंतर-मंतर पर मौजूद......!

समाज से सीधे बात क्यों नहीं कर सकी?क्या बातचीत के रास्ते इतने बंद हो गए हैं कि आंदोलनकारियों से मंच पर संवाद करने के बजाय चुनिंदा लोगों से बंद कमरे में बातचीत होगी......?

और याद रखिए,आंदोलन किसी व्यक्ति की राजनीतिक लॉन्चिंग का मंच नहीं है,न हर्ष दुबे का आंदोलन,न किसी और व्यक्ति का यह समाज का आंदोलन है.......!

मुद्दा समाज का है, संघर्ष समाज का है और जीत भी समाज की होनी चाहिए, चेहरे बदलते रहेंगे,लेकिन समाज की लड़ाई किसी एक चेहरे की मोहताज नहीं होनी चाहिए.......! 

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