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Rajanikant Prabhanjan

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बांदा में जमीन पैमाइश बनी बवाल की वजह,गिरवा थाना क्षेत्र के खेरवा गांव में विवाद के बाद पति को थाने ले जा रही पुलिस से महिला भिड़ गई.....!

घटनाक्रम के बाद लेखपाल की तहरीर पर महिला और उसके पति के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ,अब सवाल यह है कि आखिर पैमाइश के दौरान ऐसा क्या हुआ कि मामला सीधे एफआईआर तक पहुंच गया....? 

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छोटा क्रिकेटर <nis:link nis:type=tag nis:id=शौर्य_प्रभंजन nis:value=शौर्य_प्रभंजन nis:enabled=true nis:link/>  <nis:link nis:type=tag nis:id=cricket nis:value=Cricket nis:enabled=true nis:link/>
Sonam wagnchuk या सिस्टम.. ? | 17 दिन की भूख हड़ताल,फिर भी कोई सुनवाई नहीं! | सोनम वांगचुक को बचाइए, छात्रों की आवाज़ बचाइए...! 

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परम् आदरणीय बड़े भैया Ajay Mishra जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं
सहज, सौम्य, सर्वप्रिय व्यक्तित्व एवं सेवा, समर्पण और सामाजिक सरोकारों के पर्याय, जन-जन के आत्मीय, कर्मनिष्ठ युवा समाजसेवी प्रिय अनुज श्री माधव पाण्डेय जी को जन्मदिवस की अनंत मंगलकामनाएँ.....! 

ईश्वर से प्रार्थना है कि आपको उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, यश, कीर्ति, अखंड ऊर्जा एवं निरंतर जनसेवा का सामर्थ्य प्रदान करें। आपका व्यक्तित्व सदैव समाजहित और लोककल्याण के पथ पर प्रेरणास्रोत बना रहे।

जन्मदिवस की हार्दिक एवं अशेष शुभकामनाएँ! 🎉🎂🌺
यूपी के आगरा के नगला भुजा इलाके में एक घर के फ्रिज के भीतर बर्फ की ऐसी आकृति दिखाई देने का दावा किया जा रहा है,जिसे कई लोग शिवलिंग और बाबा अमरनाथ का स्वरूप मान रहे हैं....! 

खबर फैलते ही वहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और लोग श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करने लगे,कुछ लोग इसे आस्था का चमत्कार बता रहे हैं,तो कुछ इसे बर्फ के प्राकृतिक रूप से बनने वाली आकृति मान रहे हैं......! 

आपकी क्या राय है? क्या यह दिव्य संकेत है या सिर्फ संयोग? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए...?
<nis:link nis:type=tag nis:id=चंदौली nis:value=चंदौली nis:enabled=true nis:link/> में <nis:link nis:type=tag nis:id=भाजपा nis:value=भाजपा nis:enabled=true nis:link/> कार्यक्रम के दौरान <nis:link nis:type=tag nis:id=ब्राह्मण nis:value=ब्राह्मण nis:enabled=true nis:link/> समाज की नाराज़गी खुलकर सामने आई,भाजपा के एक कार्यक्रम में मंच पर दर्जनों लोगों को जगह दी गई......!

लेकिन आरोप है कि ब्राह्मण समाज के किसी प्रतिनिधि को मंच पर स्थान नहीं मिला, इसे लेकर ब्राह्मण समाज के लोगों ने अपनी नाराज़गी जताई और कहा कि समाज की लगातार उपेक्षा की जा रही है......! 

पूरे चंदौली में युवाओं के लोकप्रिय और जिला पंचायत सदस्य संजय पाण्डेय का कहना है कि भाजपा हमेशा "सबका साथ,सबका विकास की बात करती है,लेकिन यदि किसी समाज को मंच और संगठन में उचित सम्मान नहीं मिलेगा......!

तो सवाल उठना स्वाभाविक है,उन्होंने कहा कि सम्मान केवल टिकट देने से नहीं,बल्कि सहभागिता और प्रतिनिधित्व से भी मिलता है, साथ ही यह भी कहा कि यदि आने वाले विधानसभा चुनावों में भी ब्राह्मण समाज की अनदेखी जारी रही......!

तो समाज अपनी रणनीति खुद तय करेगा,उनका कहना था कि ब्राह्मण समाज सब कुछ देख और समझ रहा है तथा समय आने पर लोकतांत्रिक तरीके से अपना निर्णय देगा......! 

सम्मान चाहिए,उपेक्षा नहीं, इसी मांग के साथ चंदौली में ब्राह्मण समाज की नाराज़गी चर्चा का विषय बनी हुई है....!

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दहेज़ केस,घरेलू हिंसा का मुकदमा, ₹30,000 महीना भरण-पोषण और फिर प्रेमी संग होटल....?

आगरा के इस मामले ने कानून के दुरुपयोग को लेकर नई बहस छेड़ दी है,सवाल यह है कि अगर आरोप सही हैं,तो ऐसे मामलों में जवाबदेही किसकी होगी....?

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अन्ना हज़ारे और सोनम वांगचुक के अनशन की तुलना कई सवाल खड़े करती है,2011 में अन्ना हज़ारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को देशभर में व्यापक जनसमर्थन मिला,लंबे जनदबाव के बाद तत्कालीन केंद्र सरकार ने उनसे बातचीत की और उनकी कई मांगों पर विचार करने की प्रक्रिया शुरू की.......! 

दूसरी ओर,सोनम वांगचुक ने लद्दाख से जुड़े मुद्दों, जैसे संवैधानिक सुरक्षा,पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों के अधिकारों को लेकर भूख हड़ताल की,उनके आंदोलन को भी समर्थन मिला,लेकिन कई लोगों का मानना है कि उनकी मांगों पर अपेक्षित स्तर की राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली......! 

यही वजह है कि आज लोग सवाल पूछ रहे हैं,क्या आंदोलनों को सरकारें उनके मुद्दों के आधार पर सुनती हैं,या फिर राजनीतिक परिस्थितियाँ भी प्रतिक्रिया तय करती हैं?लोकतंत्र की ताकत यही है कि असहमति को सुना जाए......!

संवाद हो और शांतिपूर्ण आंदोलनों को गंभीरता से लिया जाए,किसी भी सरकार से यही अपेक्षा होती है कि वह नागरिकों की आवाज़ को समय रहते सुने आख़िरकार, लोकतंत्र में संवाद टकराव से अधिक शक्तिशाली होता है......!

और किसी भी नागरिक का जीवन किसी भी राजनीतिक मतभेद से अधिक मूल्यवान है......!
बिहार की राजनीति अब बदलती हुई दिखाई दे रही है,प्रशांत किशोर ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जनता के बीच उनकी पकड़ लगातार मजबूत हो रही है.......! 

आज बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नामांकन में उमड़ी भारी भीड़ सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं थी,बल्कि बदलाव की चाह रखने वाले लोगों का संदेश भी थी......! 

कुछ लोग इसे सिर्फ भीड़ कहकर खारिज करने की कोशिश करेंगे, लेकिन लगातार बढ़ता जनसमर्थन इस बात का संकेत है कि जन सुराज अब बिहार की राजनीति में एक बड़ी ताकत बनकर उभर रही है......!

बांकीपुर का यह चुनाव पारंपरिक भाजपा बनाम राजद की लड़ाई से आगे निकलता हुआ दिखाई दे रहा है,चर्चा इस बात की ज्यादा है कि क्या जन सुराज भाजपा को सीधी चुनौती देकर बिहार की राजनीति का नया अध्याय लिख पाएगी.....?

अब फैसला जनता के हाथ में है,अगर यह जनसमर्थन मतदान के दिन भी वोट में बदलता है,तो बांकीपुर का उपचुनाव सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं,बल्कि बिहार की राजनीति की नई दिशा तय करने वाला चुनाव बन सकता है.......!

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नौगढ़ में ADM के सामने युवक का फूटा गुस्सा—"भरत तिवारी ने आवाज़ उठाई, इसलिए ए"नकाउंटर कर दिया!

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गोरखपुर की बेटी शिवांगी शुक्ला अपने बीमार पिता को अस्पताल ले जा रही थी,रास्ते में एक बाइक कार से टकराई, आरोप है कि इसके बाद बाइक सवार ने अपने साथियों को बुलाया और फिर एक अकेली लड़की के साथ मारपीट की गई......!

कार में भी तोड़फोड़ हुई,यदि यह आरोप सही हैं,तो यह बेहद गंभीर मामला है,सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर किसी बेटी के साथ खुलेआम ऐसी घटना होती है,तो कानून का डर आखिर किसे है.?

जो लोग हर मुद्दे पर समाज,संस्कृति और सम्मान की बात करते हैं, क्या इस घटना पर भी उतनी ही मजबूती से आवाज़ उठाएँगे.? या फिर राजनीतिक सुविधा के हिसाब से चुप्पी साध ली जाएगी.?

यदि किसी के साथ अन्याय हुआ है,तो उसकी जाति,पार्टी या विचारधारा नहीं देखी जानी चाहिए,न्याय हर नागरिक का अधिकार है......! 

जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार लोगों से अपेक्षा है कि वे निष्पक्ष होकर इस मामले पर बोलें,दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करें और पीड़िता को न्याय दिलाने में अपनी भूमिका निभाएँ..!

आज सवाल सिर्फ शिवांगी का नहीं है,सवाल हर उस बेटी की सुरक्षा का है जो अपने घर से यह भरोसा लेकर निकलती है कि कानून उसके साथ खड़ा रहेगा, अन्याय पर चुप्पी, अन्याय को ताकत देती है.....!
बंटी यादव ह"त्याकांड सिर्फ एक परिवार का नहीं,बल्कि कानून व्यवस्था और न्याय व्यवस्था पर उठ रहे गंभीर सवालों का मामला बन चुका है.....! 

लोगों के मन में यह सवाल है कि पटना जंक्शन जैसे हाई-सिक्योरिटी इलाके से किसी व्यक्ति का अपहरण कैसे हुआ?जब आसपास सीसीटीवी कैमरे मौजूद थे और आरोपियों के चेहरे भी सामने आने की बात कही जा रही है........!

तो फिर मामले की गुत्थी सुलझने में इतनी देरी क्यों हुई? यह मामला निष्पक्ष,पारदर्शी और समयबद्ध जांच की मांग करता है,यदि किसी को भी लगता है कि सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र एजेंसी से जांच जरूरी है,.....!

तो वह लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज़ उठा सकता है,आज सवाल सिर्फ बंटी यादव का नहीं है, न्याय और सुरक्षा किसी एक जाति या समुदाय का मुद्दा नहीं,बल्कि हर नागरिक का अधिकार है.....! 

इसलिए जाति से ऊपर उठकर निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की जानी चाहिए,न्याय में देरी,न्याय से वंचित होने जैसी महसूस हो सकती है......! 

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अगर भरत तिवारी के मामले में पूरा बिहार एकजुट होकर न्याय की मांग कर सकता है,तो बंटी यादव के मामले में भी वही संवेदनशीलता और वही आवाज़ उठनी चाहिए......!

जब सवाल किसी इंसान की जान का हो,तब राजनीतिक निष्ठा नहीं, न्याय सबसे बड़ा मुद्दा होना चाहिए,यदि बंटी यादव की ह"त्या के पीछे कोई साजिश,......!

अपराध या प्रभावशाली लोगों की भूमिका होने की आशंका है,तो उसकी निष्पक्ष,पारदर्शी और समयबद्ध जांच होना लोकतंत्र की कसौटी है......! 

न्याय चुनिंदा लोगों के लिए नहीं,सबके लिए होना चाहिए, अगर आवाज़ उठानी है,तो सिद्धांत के लिए उठाइए व्यक्ति देखकर नहीं....!
पिछले एक दशक से मुगलसराय सीट को अक्सर भाजपा का मजबूत गढ़ कहा जाता है,लेकिन चुनावी नतीजे यह भी बताते हैं कि यहां जीत हमेशा आसान नहीं होती......!

भाजपा जब जीतती है,तो अक्सर मजबूत जनसमर्थन और व्यापक चुनावी माहौल के साथ बड़ी बढ़त दर्ज करती है, यानी यहां जीत केवल संगठन की नहीं.....!

बल्कि जनता के रुझान और चुनावी लहर की भी कहानी कहती है...! 

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क्या बंटी यादव की ह"त्या सिर्फ एक ह"त्या थी,या किसी बड़े नेटवर्क के खिलाफ उठी आवाज़ को हमेशा के लिए खामोश करने की कोशिश...?

देह व्यापार के कथित नेटवर्क का भंडाफोड़ करने और उसके खिलाफ आवाज़ उठाने के बाद बंटी यादव का अपहरण कर उनकी ह"त्या कर दी गई......!

साथ ही यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि पटना रेलवे स्टेशन पर खुलेआम महिलाओं की खरीद-फरोख्त जैसी गतिविधियाँ होती हैं, लेकिन डर और दबाव के कारण कोई खुलकर बोलने की हिम्मत नहीं करता......! 

यदि इन आरोपों में सच्चाई है,तो यह बेहद गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष,पारदर्शी व तेज़ जांच होनी चाहिए,दोषी चाहे कोई भी हो,उसे कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए......!

सवाल सिर्फ बंटी यादव का नहीं,बल्कि उस व्यवस्था का है जहाँ सच बोलने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए.....! 

पिछले कुछ समय में बिहार में कानून व्यवस्था लचर दिखाई पड़ी है.....! मानो अपराधियों में कानून का भय ना हो? 

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प्रिय अनुज सत्येन्द्र यादव मऊ को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं
चंदौली के मुगलसराय क्षेत्र के पुरैनी गांव में ग्रामीणों का आरोप है कि रेलवे उनकी जमीन पर अधिकार जता रहा है,जबकि उनका कहना है कि संबंधित भूमि उनकी निजी संपत्ति है.? 

इस मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है और प्रभावित लोगों ने अपनी आपत्तियां भी दर्ज कराई है, फिलहाल, ग्रामीणों के आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है......!

वहीं, रेलवे प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है,मामले की वास्तविक स्थिति संबंधित दस्तावेजों और सक्षम अधिकारियों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.....! 

प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है.....! 

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राजनीति में मतभेद और दल बदल अक्सर देखने को मिलते हैं, लेकिन किसी नेता के टिकट कटने के बाद जनता और संगठन के एक बड़े वर्ग की इतनी भावनात्मक प्रतिक्रिया कम ही देखने को मिलती है......! 

बताया जा रहा है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने के बाद कई जनप्रतिनिधियों और पार्टी पदाधिकारियों ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दिया,यदि यह घटनाक्रम इसी रूप में है,तो यह उनके लंबे समय से बने व्यक्तिगत संबंधों और संगठनात्मक प्रभाव को दर्शाता है.......! 

यह किसी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध नहीं,बल्कि उस जनाधार और व्यक्तिगत छवि की चर्चा है जो वर्षों के व्यवहार, संवाद और कार्यशैली से बनती है......! 

राजनीति में पद और टिकट समय के साथ बदलते रहते हैं,लेकिन लोगों का विश्वास और सम्मान अर्जित करना सबसे बड़ी उपलब्धि माना जाता है.......!
आज बड़े भैया Abhi Tiwari  जी से आत्मीय मुलाकात हुई। आपका स्नेह और मार्गदर्शन हमेशा ऊर्जा देता है। 🙏
जब माँ-बहनों को घसीट-घसीटकर पी"टा जा रहा था, तब ये लोग कहाँ थे? <nis:link nis:type=tag nis:id=viralreel nis:value=Viralreel nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=bjp nis:value=Bjp nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=samajwadiparty nis:value=Samajwadiparty nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=cmyogi nis:value=CMYogi nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=up nis:value=UP nis:enabled=true nis:link/>
एक युवक अपनी ही शादी में जूतों की जगह साधारण चप्पल पहनकर पहुँचा, सोशल मीडिया पर लोगों ने उसे ट्रोल करना शुरू कर दिया,तरह-तरह के ताने दिए और उसका मज़ाक बनाया,लेकिन जब सच्चाई सामने आई,तो वही लोग खामोश हो गए......!

युवक ने बताया कि उसकी माँ गंभीर रूप से बीमार थीं,इलाज में उसकी सारी जमा-पूंजी खर्च हो गई,ऐसे में उसने नए जूते खरीदने के बजाय अपनी माँ के इलाज को प्राथमिकता दी और शादी में चप्पल पहनकर चला गया........!

याद रखिए,किसी की चप्पल,कपड़े या हालत देखकर उसका मज़ाक मत उड़ाइए,हो सकता है वह इंसान अपनी ज़िंदगी की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रहा हो,गरीबी नहीं,किसी की मजबूरी का मज़ाक उड़ाना सबसे बड़ी गरीबी है.......!
राजनीति में मतभेद और दल बदल अक्सर देखने को मिलते हैं, लेकिन किसी नेता के टिकट कटने के बाद जनता और संगठन के एक बड़े वर्ग की इतनी भावनात्मक प्रतिक्रिया कम ही देखने को मिलती है......! 

बताया जा रहा है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने के बाद कई जनप्रतिनिधियों और पार्टी पदाधिकारियों ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दिया,यदि यह घटनाक्रम इसी रूप में है,तो यह उनके लंबे समय से बने व्यक्तिगत संबंधों और संगठनात्मक प्रभाव को दर्शाता है.......! 

यह किसी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध नहीं,बल्कि उस जनाधार और व्यक्तिगत छवि की चर्चा है जो वर्षों के व्यवहार, संवाद और कार्यशैली से बनती है......! 

राजनीति में पद और टिकट समय के साथ बदलते रहते हैं,लेकिन लोगों का विश्वास और सम्मान अर्जित करना सबसे बड़ी उपलब्धि माना जाता है.......!
विदेश में भाषण देने से पहले,अपने ही देश के बच्चों के बीच एक दिन बिताइए, हकीकत से सामना होगा,तो अपनी नाकामियाँ खुद शर्मिंदा कर देंगी.......!

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मोदी जी ने आज न्यूज़ीलैंड में एक ऐसी बात साझा की जिसने कई लोगों का ध्यान खींचा,भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि करीब 30 साल पहले जब वे पहली बार न्यूज़ीलैंड आए थे........!

तब उन्हें उपहार में एक मफलर,कैप और दस्ताने मिले थे, उन्होंने कहा कि वही मफलर आज भी उन्होंने संभालकर रखा है और इस बार अपने साथ लेकर आए हैं.......! 

बताइए मोदी जी 30 साल पहले मिले मफलर को अबतक सहेज कर रखें हैं...? 😀