नशा मुक्ति और दिव्यांग बच्चों के अधिकारों पर जागरूकता का संदेश, जिला शिक्षा केंद्र विदिशा का विशेष कार्यक्रम संपन्न
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जिला शिक्षा केंद्र विदिशा के तत्वावधान में नशा मुक्ति अभियान तथा दिव्यांग बच्चों के लिए छात्रावास चिन्हांकन संबंधी जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में नशा मुक्ति के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा दिव्यांग बच्चों को उपलब्ध शैक्षणिक एवं आवासीय सुविधाओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाना था। कार्यक्रम में लगभग 70 से 80 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर विषय की गंभीरता को समझा और अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के दौरान एपीसी आईईडी श्रीमती ज्योति केदार ने नशा मुक्ति के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि नशा न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि उसके मानसिक संतुलन, पारिवारिक संबंधों और सामाजिक जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। उन्होंने कहा कि नशे की लत से पूरे परिवार को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, इसलिए प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह स्वयं नशे से दूर रहे और दूसरों को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करे।
श्रीमती केदार ने दिव्यांग बच्चों के चिन्हांकन, उनके अधिकारों तथा शासन द्वारा संचालित छात्रावास एवं अन्य सुविधाओं की जानकारी भी विस्तार से दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र दिव्यांग बच्चा शासकीय योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। इसके लिए समुदाय और अभिभावकों की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है।
कार्यक्रम में संजय श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में दिव्यांग बच्चों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं एवं सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग का दायित्व है कि वह ऐसे बच्चों की शिक्षा, विकास और आत्मनिर्भरता के लिए सहयोग प्रदान करे। उन्होंने उपस्थित लोगों से अपील की कि वे अपने आसपास के पात्र बच्चों की पहचान कर उन्हें योजनाओं से जोड़ने में मदद करें।
इस अवसर पर राज्य स्वास्थ्य केंद्र करैया खेड़ा से आईं श्रीमती बबीता शर्मा ने नशा मुक्त समाज के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नशे के कारण युवाओं का भविष्य प्रभावित होता है और सामाजिक ताना-बाना कमजोर पड़ता है। इसलिए जागरूकता अभियान और सामूहिक प्रयास ही इस समस्या का स्थायी समाधान बन सकते हैं। उन्होंने सभी से नशा विरोधी संदेश को घर-घर तक पहुंचाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में एमआरसी विदिशा से नीता नागरानी, एमआरसी ग्यारसपुर से रूपेश मालवीय तथा एमआरसी लटेरी से सतीश शर्मा ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई। वहीं पीएस कन्या खारी फाटक के समस्त स्टाफ की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और प्रभावी बनाया। उपस्थित अधिकारियों, शिक्षकों एवं प्रतिभागियों ने नशा मुक्ति के सामाजिक प्रभाव, उससे बचाव के उपायों तथा दिव्यांग बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक कदमों पर विस्तृत चर्चा की।
कार्यक्रम के समापन पर सभी अधिकारियों, शिक्षकों और प्रतिभागियों ने नशा मुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लिया। साथ ही दिव्यांग बच्चों के हित में संचालित योजनाओं की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने तथा पात्र बच्चों को इन सुविधाओं से जोड़ने का भी संकल्प व्यक्त किया। उपस्थितजनों ने इस पहल को समाज हित में एक प्रेरणादायक और महत्वपूर्ण प्रयास बताते हुए इसकी सराहना की। अंत में सभी प्रतिभागियों को स्वल्पाहार वितरित किया गया।
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