जीरो टिलेज तकनीक से चना बोवनी का प्रदर्शन, नरवाई प्रबंधन और कम पानी वाली फसलों पर जोर
कलेक्टर श्री नारायन के मार्गदर्शन में कृषि विभाग की पहल, किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने के लिए किया प्रेरित
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कलेक्टर श्री हरेंद्र नारायन के मार्गदर्शन में कृषि विभाग द्वारा जीरो टिलेज (बिना जुताई) तकनीक से चना बोवनी का प्रदर्शन उपसंचालक कृषि श्री मोरिस नाथ की उपस्थिति में आयोजित किया गया। प्रदर्शन का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ना, खेती की लागत कम करना, मिट्टी में उपलब्ध नमी का बेहतर उपयोग करना तथा नरवाई प्रबंधन के प्रति जागरूक करना है।
प्रदर्शन के दौरान जीरो टिलेज मशीन के माध्यम से चने की बोवनी की गई। इस अवसर पर परियोजना संचालक आत्मा श्री धीरज ठाकुर, सहायक कृषि अभियंत्रिकी श्री अश्विनी सिंह, सहायक संचालक कृषि श्री दीपक चौरसिया, बीटीएम श्रीमती प्रिया कराड़े, एटीएम श्री योगेश चोपड़े, एईओ श्री पंकज पराड़कर, राजा भोज से श्रीमती नंदिनी लाड़े तथा प्रगतिशील कृषक श्री रघुवर भादे उपस्थित थे।
उपसंचालक कृषि ने कम पानी वाली फसलों को प्राथमिकता देने की अपील की - उपसंचालक कृषि श्री मोरिस नाथ ने किसानों से अपील की कि कम वर्षा एवं सीमित सिंचाई की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए रबी मौसम में कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों जैसे चना, मसूर, सरसों एवं अलसी को प्राथमिकता दें। किसान अपनी भूमि की प्रकृति, उपलब्ध नमी एवं सिंचाई संसाधनों के अनुसार फसल का चयन करें। उन्होंने कहा कि उपलब्ध जल का विवेकपूर्ण उपयोग एवं उचित फसल चयन खेती की लागत कम करने और जोखिम घटाने में सहायक हो सकता है।
परियोजना संचालक आत्मा ने आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने पर दिया जोर - परियोजना संचालक आत्मा श्री धीरज ठाकुर ने किसानों को जीरो टिलेज जैसी आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि इस तकनीक में पारंपरिक जुताई किए बिना विशेष मशीन से सीधे बोवनी की जाती है, जिससे खेत की तैयारी में लगने वाले समय, डीजल एवं मजदूरी की बचत होती है। उपयुक्त परिस्थितियों में यह तकनीक मिट्टी में उपलब्ध नमी के बेहतर उपयोग तथा समय पर बोवनी करने में भी सहायक है।
नरवाई न जलाये, फसल अवशेषों का करें वैज्ञानिक प्रबंधन - कृषि विभाग ने किसानों से नरवाई नहीं जलाने की अपील करते हुए फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने पर जोर दिया। विभाग के अनुसार, नरवाई जलाने से मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्मजीव प्रभावित होते हैं तथा वायु प्रदूषण बढ़ता है। किसानों को उपलब्ध कृषि यंत्रों की सहायता से फसल अवशेषों का प्रबंधन करने की सलाह दी गई। उपयुक्त परिस्थितियों में जीरो टिलेज तकनीक से फसल अवशेषों के बीच सीधे बोवनी कर मिट्टी की नमी एवं संरचना के संरक्षण में सहायता मिल सकती है।
कृषि विभाग द्वारा आयोजित यह प्रदर्शन किसानों को कम लागत वाली खेती, आधुनिक कृषि तकनीकों, जल संरक्षण तथा वैज्ञानिक नरवाई प्रबंधन के प्रति जागरूक करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
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