विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस सप्ताह के तहत विकासखंड बिछुआ के पांच गांवों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
ग्रामीणों को मानसिक समस्याओं की पहचान, परामर्श और उपचार की दी जानकारी
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विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस सप्ताह के अवसर पर ग्रामीण आदिवासी समाज विकास संस्थान द्वारा संचालित लिव लव लॉफ सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत आज विकासखंड बिछुआ के पांच गांवों गुम्मज खमरिया, बच्चाकुही, घाटकामठा, धनेगांव और धौलपुर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीणों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान, समय पर उपचार और प्रभावित व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार की जानकारी दी गई।
इस वर्ष की थीम “अनुभवों की आवाज़ सुनें, वास्तविक बदलाव लाएं” के अनुरूप मानसिक परेशानियों से जूझ रहे लोगों की बात सुनने, उनके अनुभवों को समझने और उन्हें सहयोग देने का संदेश दिया गया। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी भ्रांतियों और सामाजिक भेदभाव को दूर करने तथा जरूरतमंदों को उपचार सेवाओं से जोड़ने पर जोर दिया गया।
ग्राम गुम्मज खमरिया में सरपंच श्री महिपाल मरकाम, आशा कार्यकर्ता श्रीमती चंद्रकला धुर्वे और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती कृष्णा मसकोले उपस्थित थी। ग्राम बच्चाकुही में पूर्व सरपंच श्रीमती दीपमाला इनवाती, पंच श्री अनिल भलावी, आशा कार्यकर्ता श्रीमती प्रमिला गोनेकर और स्टेकहोल्डर श्री जबर वानखेड़े शामिल हुए। ग्राम घाटकामठा में सरपंच श्री अरुण सराठे, आशा कार्यकर्ता श्रीमती हिरेंद्र कुमारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती बेबी सराठे सहित ग्रामीण मौजूद थे।
ग्राम धौलपुर में सरपंच श्री अरुण सराठे और आशा कार्यकर्ता श्रीमती हिरेंद्र विश्वकर्मा उपस्थित थे। वहीं, ग्राम धनेगांव में जागरूकता स्टॉल लगाकर पम्पलेट वितरित किए गए तथा लोगों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और परामर्श दिया गया। संभावित मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें आवश्यक सहायता एवं उपचार सेवाओं से जोड़ने की पहल भी की गई।
संस्था के क्षेत्र समन्वयक श्री वीरेंद्र घागरे ने कहा कि सामाजिक झिझक और भेदभाव के कारण कई लोग मानसिक परेशानियों के बारे में खुलकर बात नहीं कर पाते। ऐसे में परिवार और समुदाय की भूमिका महत्वपूर्ण है। किसी व्यक्ति के व्यवहार या भावनाओं में लगातार बदलाव दिखाई देने पर उसकी बात संवेदनशीलता से सुनना, बिना भेदभाव सहयोग देना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद उपलब्ध कराना जरूरी है। समय पर परामर्श और उपचार से प्रभावित व्यक्तियों को बेहतर जीवन जीने में मदद मिल सकती है।
संस्था द्वारा इन कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने, सामाजिक भ्रांतियां दूर करने और जरूरतमंद लोगों के लिए सहयोगपूर्ण वातावरण विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
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