पशुपालकों को उन्नत पशुपालन एवं अधिक दुग्ध उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से गोपाल कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना के अंतर्गत 30 एवं 31 अक्टूबर को जिले के ग्राम पंचायत देदला, विकासखंड धार एवं ग्राम पंचायत सिरसोदिया, विकासखंड धरमपुरी में प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता के माध्यम से दोनों ग्रामों में देशी नस्ल की गायों का चयन कर पशुपालकों को दुग्ध उत्पादन के आधार पर पुरस्कृत करने के लिए चयनित किया गया।
प्रतियोगिता के तहत 31 अक्टूबर को पशुपालन विभाग के संबंधित विकासखंडों के विभागीय दल, ग्राम पंचायत समितियों एवं जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में चयनित देशी नस्ल की गायों का दुग्ध दोहन कराया गया। दुग्ध उत्पादन के आधार पर ग्राम देदला में श्री लाखन सिंह पिता श्री अमर सिंह (टेकरा वाले) की गाय ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। श्री लाखन सिंह सिसोदिया (सर) की गाय ने द्वितीय तथा श्री जगदीश जाट की गाय ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
इसी प्रकार ग्राम सिरसोदिया में श्री धरम सिंह पिता श्री जगन की गाय ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। श्री नरेंद्र पिता श्री हरि की गाय ने द्वितीय तथा श्री मोहन पिता श्री बाबू की गाय ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
योजना के अंतर्गत दोनों ग्रामों में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले पशुपालक को 1 लाख रुपये, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले को 50 हजार रुपये तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले पशुपालक को 25 हजार रुपये का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।
ग्राम देदला में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विधायक प्रतिनिधि धार श्री लाखन सिंह सिसोदिया उपस्थित रहे। इस दौरान ग्राम पंचायत देदला के सरपंच श्री लाल सिंह परमार एवं उप सरपंच श्री गोपी कामदार सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
वहीं ग्राम सिरसोदिया में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में धरमपुरी विधायक श्री कालूसिंह ठाकुर उपस्थित रहे। इस अवसर पर ग्राम पंचायत सिरसोदिया की सरपंच श्रीमती ललिता सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
उप संचालक पशुपालन विभाग डॉ. राकेश सिंह सिसोदिया के मार्गदर्शन में दोनों स्थानों पर विभागीय दलों द्वारा प्रतियोगिता की गतिविधियां संपन्न कराई गईं।
गोपाल कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना के माध्यम से पशुपालकों को देशी नस्ल की गायों के संरक्षण एवं संवर्धन, उन्नत पशुपालन पद्धतियों को अपनाने तथा दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को आजीविका के बेहतर साधन के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
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