सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूल मेंहुस में अनुमंडल पदाधिकारी की अध्यक्षता में भव्य शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी संपन्न।
आज दिनांक 12 सितंबर 2026 को सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूल, मेंहुस (शेखपुरा) में अनुमंडल पदाधिकारी सुश्री प्रियंका कुमारी की गरिमामयी अध्यक्षता में एक दिवसीय शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। ऊ उन्होंने कहा कि जिला पदाधिकारी, शेखपुरा के आदेश (ज्ञापांक 846/गो० दिनांक 07.08.2026) के द्वारा सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूल, मेंहुस को गोद लेने के लिए अनुमंडल पदाधिकारी को प्राधिकृत किया गया था। तत्पश्चात, जिला पदाधिकारी के पत्रांक 1456 दिनांक 07.09.2026 के निदेशों के अनुपालन में आज इस संगोष्ठी का आयोजन किया गया। उन्होंने संगोष्ठी में उपस्थित विद्यालय के प्रधानाचार्य द्वारा संस्थान के गौरवशाली इतिहास एवं वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने बताया कि इस विद्यालय की स्थापना वर्ष 1947 में हुई थी, जिसके लिए स्थानीय ग्रामीणों ने विद्यार्थियों के हित में अपनी भूमि दान दी थी।
वर्तमान में विद्यालय में कक्षा 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई होती है।
इस समय कुल 1,308 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। विद्यालय में प्रधानाध्यापक सहित कुल 33 शिक्षक पदस्थापित हैं। परिसर में कुल 23 कमरे उपलब्ध हैं, जिनमें कार्यालय संचालन के साथ नियमित वर्ग कक्ष चलते हैं। संगोष्ठी के दौरान अनुमंडल पदाधिकारी सुश्री प्रियंका कुमारी ने स्वयं विद्यालय के वर्ग कक्षों, विज्ञान प्रयोगशाला (लैब) और पुस्तकालय का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान व्यवस्थाएं काफी संतोषप्रद पाई गईं और सभी छात्र-छात्राएं अनुशासित होकर अपनी निर्धारित ड्रेस (गणवेश) में उपस्थित पाए गए। संगोष्ठी में भारी संख्या में स्थानीय अभिभावकों ने भाग लिया और विद्यालय प्रबंधन व शैक्षणिक माहौल पर संतोष व्यक्त किया। साथ ही अभिभावकों ने विद्यालय परिसर एवं विद्यार्थियों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था, पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाने,विद्यालय के मुख्य गेट की मरम्मती, एवं चहारदीवारी (बाउंड्री वॉल) की मरम्मत का अनुरोध किया। उन्होंने तमाम बातों व सुझावों को ध्यानपूर्वक सुनने के पश्चात अनुमंडल पदाधिकारी ने विद्यालय प्रशासन व अभिभावकों को हर संभव सहायता का पूर्ण आश्वासन दिया। उन्होंने प्रधानाध्यापक को निर्देशित किया कि विद्यालय की गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए भविष्य में भी समय-समय पर इस प्रकार की शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठियों का नियमित आयोजन सुनिश्चित किया जाए।