किशनगंज डीएम के निर्देश पर विभागों के बीच समन्वय तेज,प्रतिदिन मॉनिटरिंग और व्यापक स्क्रीनिंग पर विशेष जोर
प्रेस विज्ञप्ति 515, दिनांक 03.07.2026
किशनगंज जिले में टीबी के खिलाफ निर्णायक लड़ाई को गति देने के लिए जिला प्रशासन ने अब अभियान को पूरी तरह मिशन मोड में संचालित करने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री के 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जिले में स्क्रीनिंग, जांच, उपचार और निगरानी की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक आदेश जारी किए गए हैं। जिला स्तर के अधिकारियों को अलग-अलग प्रखंडों की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि आरबीएसके टीम, आशा कार्यकर्ता, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को प्रतिदिन निर्धारित लक्ष्य पूरा करने का निर्देश दिया गया है। सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने कहा कि टीबी केवल एक संक्रामक बीमारी नहीं, बल्कि समय पर जांच नहीं कराने और बीच में दवा छोड़ देने की प्रवृत्ति के कारण समाज के लिए गंभीर चुनौती बन जाती है। यही लापरवाही आगे चलकर एमडीआर (मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट) टीबी जैसी जटिल स्थिति पैदा करती है, जिसका उपचार लंबा और कठिन होता है। इसी कारण अब अभियान का फोकस केवल मरीज खोजने तक सीमित नहीं रहकर हर संदिग्ध व्यक्ति की समय पर जांच और पूर्ण उपचार सुनिश्चित करने पर है।
जिला स्तर के अधिकारियों को मिली प्रखंडवार जिम्मेदारी, हर दिन होगी समीक्षा
डीपीएम डॉ मुनाजिम ने कहा कि जारी आदेश के अनुसार सिविल सर्जन, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी, जिला अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारी, जिला योजना समन्वयक सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारियों को अलग-अलग स्वास्थ्य संस्थानों और प्रखंडों का दैनिक अनुश्रवण सौंपा गया है। सभी अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे संबंधित प्रखंडों का नियमित निरीक्षण करेंगे तथा प्रत्येक दिन आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में अद्यतन प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।साथ ही प्रखंड स्तर पर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, जीविका, पंचायत राज विभाग तथा अन्य विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप देने के निर्देश दिए गए हैं।
आरबीएसके टीम और आशा कार्यकर्ताओं को मिला विशेष दायित्व
अभियान को गति देने के लिए आरबीएसके टीमों को प्रतिदिन प्रत्येक टीम द्वारा कम-से-कम 100 लोगों की टीबी स्क्रीनिंग करने का लक्ष्य दिया गया है। प्रत्येक शनिवार को भी स्क्रीनिंग जारी रखने तथा प्रतिदिन के आंकड़ों को निक्षय पोर्टल पर अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं।वहीं सभी आशा कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया गया है कि वे प्रतिदिन कम-से-कम 15 संभावित लाभार्थियों को स्क्रीनिंग के लिए संबंधित आयुष्मान आरोग्य मंदिर भेजें। आशा फैसिलिटेटर इसके कार्यों की निगरानी करेंगे तथा दैनिक प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराएंगे।इसके अलावा सभी जिला अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में ओपीडी आने वाले लगभग 75 प्रतिशत मरीजों की टीबी स्क्रीनिंग सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। जहां सीएचओ उपलब्ध नहीं हैं, वहां एएनएम द्वारा स्क्रीनिंग कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
100 दिवसीय अभियान से बढ़ी जांच, छूटे हुए मरीज भी आ रहे सामने
स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत अब तक 17,920 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिसमें 333 नए टीबी मरीजों की पहचान हुई है। वहीं जिले में अब तक कुल 24,130 लोगों की जांच पूरी की जा चुकी है।01 जनवरी 2026 से अब तक जिले में कुल 906 टीबी मरीजों की पहचान हुई है। इनमें सर्वाधिक 620 मरीज किशनगंज शहरी क्षेत्र से मिले हैं। इसके अलावा पोठिया में 91, दिघलबैंक में 36, बहादुरगंज में 26, कोचाधामन में 30, ठाकुरगंज में 14 तथा टेढ़ागाछ में 11 मरीजों की पहचान की गई है।स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर संदिग्ध मरीजों की पहचान, बलगम जांच, डिजिटल एक्स-रे और आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध करा रही हैं, जिससे पहले छूटे हुए मरीज भी अब उपचार से जुड़ रहे हैं।
पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे और निक्षय पोषण योजना से मिल रही राहत
दूरदराज के गांवों में रहने वाले लोगों को अस्पताल तक आने की आवश्यकता कम हो, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे मशीन के माध्यम से गांवों में ही जांच शिविर लगाए जा रहे हैं। इससे शुरुआती अवस्था में ही मरीजों की पहचान संभव हो रही है।साथ ही निक्षय पोषण योजना के तहत उपचाररत मरीजों के बैंक खातों में प्रतिमाह आर्थिक सहायता भेजी जा रही है। जरूरतमंद मरीजों को निक्षय मित्रों के माध्यम से पोषण पोटली भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे इलाज के दौरान उनका पोषण स्तर बेहतर बना रहे।
अधूरा इलाज बढ़ा रहा एमडीआर टीबी का खतरा
जिले में वर्तमान में एमडीआर टीबी के 12 मरीज उपचाराधीन हैं। इनमें किशनगंज शहरी क्षेत्र से 4, दिघलबैंक से 2, बहादुरगंज से 1, कोचाधामन से 3, ठाकुरगंज से 2 तथा टेढ़ागाछ से 2 मरीज शामिल हैं।माता गुजरी मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डॉ. शिव कुमार ने बताया कि अधिकांश मामलों में एमडीआर टीबी का कारण मरीजों द्वारा बीच में दवा छोड़ देना या नियमित उपचार नहीं लेना होता है। ऐसे मरीजों के लिए विशेष दवाओं और लगातार चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता होती है।
टीबी मुक्त किशनगंज के लिए जनभागीदारी जरूरी :
जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान केवल स्वास्थ्य विभाग का कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूरे समाज की सहभागिता से सफल होने वाला जनअभियान है। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित विभाग, पंचायत प्रतिनिधि, आशा कार्यकर्ता, जीविका समूह और आम नागरिक मिलकर यदि समय पर संदिग्ध मरीजों की पहचान और जांच सुनिश्चित करें, तो टीबी को जड़ से समाप्त करने का लक्ष्य तेजी से हासिल किया जा सकता है।उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन प्रतिदिन अभियान की समीक्षा कर रहा है तथा प्रत्येक प्रखंड में निर्धारित लक्ष्य की निगरानी की जा रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक खांसी, लगातार बुखार, रात में पसीना आना, वजन कम होना या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना किसी संकोच के निकटतम सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर निःशुल्क जांच कराएं और पूरा उपचार लें।
District Kishanganj Bihar Health Department
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