कुएँ के मेढ़क से आकाश के पक्षी व मानव सहित—दुनिया की असली पहचान
“एक कुएँ के मेढ़क को लगता है कि दुनिया उतनी ही बड़ी है, जितना उसका कुआँ।”
यही बात उस चूहे के बिल में कब्जा करके रहने वाले साँप पर भी लागू होती है, जिसे लगता है कि उसका बिल ही उसकी पूरी दुनिया है। नाली और घर के आसपास घूमने वाला छछूंदर, गली-गली उछलने वाला बंदर, जंगल का राजा कहलाने वाला शेर और आकाश में दूर-दूर तक उड़ान भरने वाला पक्षी—हर किसी की अपनी एक सीमा है और उसी सीमा के आधार पर वह दुनिया को समझता है।
लेकिन दुनिया वास्तव में कितनी बड़ी है, समाज का दस्तूर क्या है, अच्छाई क्या है और बुराई क्या है—इसे वही समझ सकता है जिसने दुनिया को केवल देखा ही नहीं, बल्कि उसे करीब से जाना और समझा भी हो।
किसी छोटे से दायरे में रहकर पूरी दुनिया के बारे में फैसला कर लेना सबसे बड़ी भूल है। कई बार इंसान अपने थोड़े से ज्ञान, थोड़ी सी सफलता, थोड़े से अनुभव और अपने आसपास के लोगों को देखकर स्वयं को दुनिया का सबसे समझदार व्यक्ति मान बैठता है। जबकि वास्तविकता यह है कि दुनिया उसके अनुमान से कहीं अधिक बड़ी, जटिल और विरोधाभासों से भरी हुई है।
यह संसार अच्छाई और बुराई, सत्य और असत्य, त्याग और स्वार्थ, प्रेम और घृणा—इन सबका संगम है। यहां हर मुस्कुराता चेहरा अपना नहीं होता और हर कठोर दिखने वाला व्यक्ति बुरा नहीं होता। कुछ लोग अच्छाई का मुखौटा पहनकर भीतर से स्वार्थी होते हैं और कुछ लोग कठोर दिखाई देकर भी दूसरों के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देते हैं।
कहा जाता है कि कलयुग की सबसे बड़ी पहचान यही है कि कभी-कभी दानव राम का किरदार निभाते दिखाई देते हैं और देवता असुरों के रूप में दिखाई पड़ते हैं। अर्थात केवल चेहरे, वेशभूषा, शब्दों और दिखावे से किसी व्यक्ति के चरित्र का निर्णय नहीं किया जा सकता।
आज आवश्यकता इस बात की है कि हम लोगों को उनके शब्दों से नहीं, उनके कर्मों से पहचानें। कौन कितना धार्मिक दिखाई देता है, कौन कितनी बड़ी-बड़ी बातें करता है, कौन कितना प्रभावशाली है—यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना यह कि उसके व्यवहार से समाज को क्या मिला और उसके कर्मों से किसी दूसरे के जीवन में क्या परिवर्तन आया।
जिसने दुनिया को केवल अपने आंगन तक देखा, उसकी दुनिया छोटी ही रहेगी। जिसने समाज को करीब से देखा, लोगों के सुख-दुख को समझा, रिश्तों के बदलते रंग देखे और समय के साथ इंसानों के वास्तविक चेहरों को पहचाना—वही जीवन की सच्चाई को समझ पाएगा।
इसलिए दुनिया को समझने के लिए आंखें ही नहीं, अनुभव भी चाहिए; लोगों को पहचानने के लिए चेहरा नहीं, चरित्र देखना चाहिए; और सत्य को समझने के लिए भीड़ नहीं, विवेक का साथ चाहिए।
क्योंकि यह कलयुग है—यहां हर चमकती चीज सोना नहीं और हर अंधेरा बुरा नहीं।
जो इस अंतर को पहचान गया, उसने जीवन को समझ लिया।
और जो केवल दिखावे को सच मानता रहा, वह सारी उम्र अपनी ही बनाई हुई छोटी-सी दुनिया में जीता रहा। #viralreelsfacebook Ranjeet Bahadur Manoj Kumar Srivastav Harihar Kumar Srivastava Sharad Srivastava Shyam Kumar Srivastava Chandan Ramayani Ratnesh Kumar Srivastav Raja Kasim Sonam Sonam Bjp Barabanki Ashutosh Krishna Srivastava